भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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पृष्ठ 418

सिरसाकासमर । ४१७ ७ सात कोसलों मलखे ठाकुर मारत मारत गये हटाय ६० रंग बिरंगी पृथ्बी ह्वैगैं मज्जा चर्बिपरै दिखराय ॥ बड़ा लड़ैया बिरमा वाला ज्यहिका कही बनाफरराय ६१ त्यहि के संगर धरती काँपै थर थर आसमान थर्राय ॥ काह हकीकति है ताहर कै जो संगरते देयँ हटाय ६२ पाँउ पछारी को डारे ना यहु रणबाघु बीर मलखान ॥ कोऊ क्षत्री अस दूसर ना मलखे साथ करै मैदान ६३ मुर्चा फिरिगा पृथीराज का लौटा तबै बीर मलखान ॥ बाजे डंका अहंतंका के लौटे सबै सिपाही ज्वान ६४ पहुंचे पिरथी तब दिल्ली में सिरसा सिरसा का सरदार ॥ माता बिरमा त्यहि औसरमा द्वारे आरति लीन उतार ६५ एक समैया की बातें हैं आये उरई के सरदार ॥ आवो आवो बैठो बैठो बिरमा कीन बड़ा सतकार ६६ माहिल बैठा तब महलन मा करिकै रामचन्द्र को ध्यान ॥ बोला माहिल फिरि बिरमा ते तुम्हरौ पूत बड़ा बलवान ६७ बड़े लड़ैया दिल्ली वाले ते सब हारिगये चौहान ॥ कौनि तपस्या तुम कैराखी पैदा भये बीर मलखान ६८ सरबर मलखे की दुनियामा दूसर नहीं लीन औतार ॥ यहै मनावैं परमेश्वर ते इनका भलाकरौ कर्तार ६९ नाम हमारो है दुनिया मा भैने माहिल के बरियार ॥ आल्हा ऊदन मलखे सुलखे इनते हारि गई तलवार ७० यहै मनावैं जगदम्बा ते अंजलि जोरिज़ोरि शिरनाय॥ मलखे सुलखे आल्हा ऊदन नीके रहें बनाफरराय ७१ सुनि सुनि बातें ये माहिलकी नारी बुद्धिहीन जगजान ॥ २७