भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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[Header] कीरतिसागरकामैदान । ४२७ ३

धीरज राखो अपने मनमा करिहै काह पिथौरा आय ॥ मनियादेवन की शरणागत जावो हाथ जोरि शिरनाय ११ त्यई सहायी सुखदायी अब फाटक तुरत देयँ खुलवाय ॥ घर घर सुमिरैं नरनारी सब साँचे देव परैं दिखराय १२ घट घट ब्यापी अरि परितापी जापी चले जायँ तिनधाम ॥ आला देवन में देवता हैं मनियादेव मोहोबे ग्राम १३ भा खलभल्ला औ हल्लाअति घर घर गई उदासीछाय ॥ टोला टोला में हल्लाभा लल्ला नहीं बनाफरराय १४ बिना इकेले बघऊदन के फाटक कौन खुलावै आय ॥ ऐसे घर घर पुरवासी सब दरदर कहैं नारिनर धाय १५ भा खलभल्ला रनिवासे माँ मोहबा गँसा पिथौराआय ॥ द्यवी शारदा त्यहि सगया मा मल्हना ध्यायरही शिरनाय १६ तुम्हरे बूते बघऊदन ने जीता देश देश सब जाय ॥ तुम लैआवो उदयसिंह को ईजति राखु शारदामाय १७ सदा सहायी तुम मायी हौ गायी तीनि लोक गुणगाथ ॥ मोहिं अनाथिनिकी मातातुम तुम्हरे चरण हमारो माथ १८ दैकेँ सुपना बघऊदन को माता लावो यहाँ बुलाय ॥ नितप्रति पूजा हम मोहबे मा चन्दन अक्षत फूल चढ़ाय १६ चढ़ा पिथौरा है सँभरा भर हमरे प्राण रहे घबड़ाय ॥ कऊ सहायी ना दुनिया माँ ईजति राखु शारदा माय २० बैठि कुशासन रानी मल्हना सारी दीन्ही रैनि गँवाय ॥ स्वपना देखा ताही निशिमाँ औ जगि परा बनाफरराय २१ हाल बतावा सब देवा का ठाकुर उदयसिंह समझाय ॥ इतना सुनिकैं देवा बोला साँची सुनो बनाफरराय २२