भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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३४ आल्हखण्ड । ४७६ कीन बहाना फिरि ऊदन ते बोला कनउज का महिपाल ॥ कीन हँसौवा हम आल्हा ते लाला देशराज के लाल १४१ जितनी फौजैं हैं कनउज मा सो लैलेउ बनाफरराय ॥ रुपिया पैसा जो कछु चाहौ तुम्हरौ मालखजाना आय १४२ लाखनि रानाको तिलका सों माँगो जाय बनाफरराय ॥ हमरी ठकुरी नहीं लाखनि पर तुम ते साँचदीन बतलाय १४३ कैद करैया को आल्हा को नीके जाउ लहुरवाभाय ॥ सुनि जगनायक ऊदन आल्हा तीनों चले शीशकोनाय १४४ ऊदन पहुँचे ढिग लाखनि के औ सब हाल कहा समुझाय ॥ चढ़ा पिथौरा दिल्लीवाला गाँसानगर मोहोबा आय १४५ बिदा मांगिकै अब माता सों चलिये बेगि कनौजीराय ॥ इतना सुनिकै लाखनि चलिभे सँगमालिहेलहुरवाभाय १४६ रानी तिलका के महलन मा दोऊ अटे तड़ाका धाय ॥ सोने चौकी दोऊ बैठे माताचरणनशीशनवाय १४७ कही हकीकति सब तिलका ते यहु रणबाधु लहुरवाभाय ॥ आयसु पावैं लखराना जो देखैं नगर मोहोबा जाय १४८ सुनिकै बातें उदयसिंह की तिलका गई सनाकाखाय ॥ बारह रानिन मा इकलौता साँची सुनो बनाफरराय १४६ सो चलिजैहैं जो मोहवे का हमरी जियत मौत है जाय ॥ इतना कहिकै रानी तिलका तुरतै बाँदी लीन बुलाय १५० कहि समुझावा त्यहि बाँदीका पद्मै खबरि जनावो जाय ॥ करि श्रृङ्गार महल अपने मा राखै बहू तहाँ बिलमाय १५१ इतना सुनिकै बाँदी दौरी रानी खबरि जनाई जाय ॥ सुनिकै बातें त्यहि बाँदी की लीन्ह्यो गंगनीर मँगवाय १५२