आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
पृष्ठ 484, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ेंआल्हाकामनावन । ४८३ २१ इतना कहिकै आल्हा ऊदन लाखनि साथ चले शिरनाय ॥ बाजे डंका अहलंका के हाहाकार शब्द गे छाय २२३ चारों राजा गाँजर वाले बारहु कुँवर बनौधा केर ॥ लला तमोली धनुवाँ तेली इनते कहा चँदेले टेर २२४ लाखनि तुमका हम सौंपत हैं रक्षा किह्यो सबै सरदार ॥ बंश लकड़िया यह इकली है इतना लीन्ह्यो खूब विचार २२५ इतना कहिकै जयचँद राजा पंडित लीन्ह्यो तुरत बुलाय ॥ प्रथम पुजायो श्रीगणेश को पाछे तिलक दिह्यो करवाय २२६ गजाननहिं अरु लम्बोदर को तीसर गणाध्यक्ष को ध्याय ॥ सुमिरि भवानीसुत गणेशको लेशकलेश दीनबिसराय २२७ रानी तिलका पूजन कीन्ह्यो भूरी हथिनी तुरत मँगाय ॥ थाती सौंप्यो लखराना को हथिनीसम्मुख बैन सुनाय २२८ फिरि कर पकरयो लखरानाका ऊदन हाथ दीन पकराय ॥ मोहिं अभागिनि के बालककी रक्षा किह्यो बनाफरराय २२९ सुनिकै बातें महरानी की दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥ जहाँ पसीना लखराना का तहँ हम मूड़ देयँ कटवाय २३० घाटि न जानैं हम भाई ते माता साँच देयँ बतलाय ॥ फिकिरि न राख्यो लखरानाकी इनको बार न बाँको जाय २३१ इतना कहिकै महरानी ते ऊदन फेरि कहा ललकार ॥ करो तयारी अब मोहबे की सबियाँ शूरवीर सरदार २३२ हुकुम पायकै बघऊदन का सबहिन बाँधिलीन हथियार ॥ हथी चदैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार २३३ पायँ लागिकै दोउ तिलका के भूरी चढ़ा कनौजियाराय ॥ बजे नगारा त्यहि समया मा हाहाकार शब्द गा छाय २३४