भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 494

अथ आल्हखण्ड ॥ नदीबेतवापरलाखनिपृथ्वीराज काप्रथमयुद्धवर्णन ॥ सवैया ॥ रामसिया पद दोउ मनाय सो ध्याय शिवा शिव चर्ण यथारथ । कीरति कृष्ण बखान करों जिनके बलसों बलवान भे पारथ ॥ भीषम कर्ण सुयोधन ज्वान महान सबै मरिगे रणभारथ । चाहत कृष्ण नहीं ललिते बलते थलते जगते सो अकारथ १ सुमिरन ॥ दशरथ नन्दन को बन्दन करि सीता चरण कमलको ध्याय ॥ सुमिरि भवानी शिवशंकर को औ यदुनन्दन चरण मनाय १ बड़े प्रतापी कुंती नन्दन बन्दन करों युधिष्ठिरराय ॥ गदा प्रहारी भीमसेन को ध्यावों बार बार शिरनाय २ शूर धनुर्धर नर अर्जुन की कीरति सकै कौन नर गाय ॥