आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८ आल्हखण्ड । ५०० हुकुम लगावो अब तोपन को गोलंदाज होयें तय्यार ॥ लखि अस मर्जी सरदारन की लाखनिहुकुमदीनत्यहिबार७० लै लै थैली बारूदन की सो तोपनमा दई डराय ॥ गोला छूटे दुहुँ तरफा के हाहाकार शब्द गा छाय ७१ लागै गोला ज्यहि हाथी के मानो चोर सेंधि कैजाय ॥ जउने ऊंट के गोला लागै तुरतै गिरै सार अललाय ७२ लागै गोला ज्यहि घोड़ा के मानो मगर कुल्याचै खाय ॥ गोला लागै ज्यहि क्षत्री के धुनकतरूईसरिसउड़िजाय ७३ जउने रथमा गोला लागै बिजली गिरै वृक्ष जस आय ॥ तैसे चूरण करि स्यन्दन को पहियाधुरी देय अलगाय ७४ फूटै गोला जब ठुकरे मा बिथरैं पाँच खेतलों भाय ॥ गोली निकरैं तिन गोलन ते ओलनसरिसजायँतहँछाय ७५ बोलि न पावैं कोउ ठाकुर तहँ चुप्पे भूमि देयँ पौढ़ाय ॥ बड़ी दुर्दशा भै तोपन मा तब फिरि मारु वन्दहैजाय ७६ दुनों गोल आगे को बढ़िगे रहिगा डेढ़ खेत मैदान ॥ भाला वलछी की मारुन मा व्याकुलभये सिपाहीज्वान७७ शुण्डा कटिगे हैं हाथिन के रुण्डन हैगा ऊंच पहार ॥ कङ्का कटि कटि गिरैं बछेड़ा घैहा होन लागि सरदार ७८ गंगा ठाकुर कुड़हरि वाला पूरन पटना का सरदार ॥ देवी मरहटा दक्षिण वाला अंगदनृपतिग्वालियरक्यार७९ हिरसिंह विरसिंह बिरिया वाले इनके साथ करें तलवार ॥ भुरा मुगलिया काबुल वाला सय्यद बनरस का सरदार ८० धौंधू धनुवाँ का मुर्त्ता है औ दतियाके बंशगुपाल ॥ चिंता ठाकुर रुसनी वाला गुरखा नृपति शहरबंगाल ८१