भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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नदीबेतवाकासमर । ४६६ ७ सुर्खा जावैं शशाचालपर तुर्की तीतर के अनुहार ॥ भाला बलछी छुरी कटारी लीन्हे चढ़े ढाल तलवार ५८ अंगद पंगद मकुना भौंरा सजिगे श्वेतवरण गजराज ॥ धरी अँबारी तिन हाथिन के बहुतन हौदा रहे बिराज ५६ आदि भयंकर हाथी ऊपर पिरथीराज भये असवार ॥ तीरकमानै अनगिन्ती लै लीन्ही फेरि ढाल तलवार ६० छुरी कटारी भाला वरछी लीन्हे सबै नृपति हथियार ॥ घोड़नाम दलगंजन ऊपर ताहर आगे राजकुमार ६१ ढढ़ी करखा बोलन लागे विप्रन कीन वेद उच्चार ॥ औरि बयरिया डोलन लागीं औरै होनलाग ब्यवहार ६२ मारु मारु कै मौहरि बाजी बाजी हाव हाव करनाल ॥ खर खर खर खर कै रथ दौरे रब्वा चले पवनकी चाल ६३ घोड़ा हींसैं हाथी चिघेरैं बैगा अन्धधुन्ध त्यहिबार ॥ डेढ़ लाख दल पैदल लीन्हे राजा दिल्ली का सरदार ६४ डगमग डगमग धरती डोली देवता झाँकि गये असमान ॥ देवी देवता पृथ्त्री वाले चक्रित भये देखि चौहान ६५ को गति बरणै त्यहि समया कै जा क्षण चला पिथौराजवान ॥ लाली लाली आँखी कीन्हे गजभरि छातीका चौहान ६६ जहाँ हैं फौजैं लखराना की प्यारो पूत कन्नौजी क्यार ॥ मीराताल्हन बनरस वाला सिर्गा घोड़े पर असवार ६७ धनुवाँ तेली है घोड़े पर बारह कुँवर बनौधा केर ॥ चारौराजा गाँजर वाले तिनते कहा कन्नौजी टेर ६८ आई फौजैं पृथीराज की यारो वेगिहोउ हुशियार ॥ इतना सुनिकै कनउन वाले बोले सबै शूरसरदार ६६