आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[Header] नदीबेतवाकासमर । ५११ १६
अल्हा चढ़िकै हरनागर पर तुरतै भयो तहाँ तैयार १६६ मैने सजिगो परिमालिक का तब फिरि कूचदीन करवाय ॥ जहँ पर तम्बू लखराना का तहँपर गये चंदेलेराय २०० आवत दीख्यो परिमालिक को लाखनि उठे तड़ाका धाय ॥ पकरिकै बाहू लखराना की औछातीमा लीन लगाय २०१ बैठे तम्बू मा परिमालिक आये दुऊ बनाफरराय ॥ मिलाभेंट करि सब काहुन सों सबहिनकूच दीन करवाय २०२ चला कनौजी चढ़ि भूरी पर इन्दल पपिहा पर असवार ॥ घोड़ मनोहर पर देवा चढ़ि बेंदुल उदयसिंह सरदार २०३ हिरसिंह बिरसिंह बिरिया वाले येऊ साथ भये तय्यार ॥ सिंद्धा ठाकुर परहुल वाला गंगा कुड़हरिका सरदार २०४ मीरा सय्यद बनरस वाले औरौ नृपति चले त्यहिबार ॥ ठाढ़ो हाथी पञ्चशब्दा था आल्हा तापर भये सवार २०५ द्यावलि सुनवाँ फुलवा तीनों डोलन उपर भई असवार ॥ डोला चलिभा चितरेखा का मोहवालखनलागिसरदार २०६ जौनौ गलियन जायँ कनौजी तौनी देखें नई वहार ॥ चलैं पिचका क्यहुगलियन मा कहुँकहुँहोयँफुलनकीमार २०७ कहुँ कहुँ ढोलक सारंगी ध्वनि कहुँ कहुँ बाजैं खूब सितार ॥ तबलागमकैं क्यहुगलियनमा होवै नाच पतुरियनक्यार २०८ परे पाँवड़ैहैं द्वारे मा महलन मणी करें उजियार ॥ उड़ैं कबूतर क्यहु महलन ते होवै नाच मुरैलन क्यार २०६ पिंजरा टाँगे ललमुनियन के चकस गड़े बुलबुलन केर ॥ सुवा पहाड़ी कहुँ पिंजरन में कहुँ कहुँ तीतर और बटेर २१० को गति बरणै त्यहि समयाकै चकित लखैं चहुँदिशि हेर ॥