आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
पृष्ठ 52, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ेंमहोबेका प्रथमयुद्ध । ४७ ११ छोटी दरखत बहु टूटत भे रौसैं पटरी दई गिराय १०२ यहगतिदीख्यो जब मालिनने बोल्यो उदयसिंहते आय ॥ कौने राजा के लरिकाहौ सबियाँ डार्यो बाग नशाय १०३ काह नाम है सो बतलाओ आपन देश देव बतलाय ॥ सुनिकै बातें त्यहि मालीकी बोल्यो तुरत बनाफरराय १०४ देश हमारो नगर महोबा हमरो उदयसिंह है नाम ॥ फिरिकै माली अब बोलेना नाहिं तो पठैदेवँ यमधाम १०५ सुनिकै बातें बघऊदन की माली चुप्प साधि तब लीन ॥ सुमिरि भवानी शिवशंकरको ह्याँते कलम बन्दकै दीन १०६ आशिर्वाद देवँ मुंशीसुत जीवहु प्रागनरायण भाय ॥ कीरति तुम्हरी जो सब गावैं तौफिरिकथाबहुतबढ़िजाय १०७ माथ नवावों पितु अपने को जिन म्वहिं बिद्यादीन पढ़ाय ॥ सो सुख पावैं देवलोक में गावैंललितचरितनितध्याय १०८ अब मैं ध्यावों रामचन्द्रको जो मम इष्टदेव महराज ॥ ईज्जति हमरी जग में राखैं पुरवैं सकल हमारे काज १०६ इति श्रीलखनऊनिव।सि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मजबायू प्रयागना- रायणजीकीआज्ञानुसारउन्नामप्रदेशान्तर्गतपँडरीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनु पं० ललिताप्रसादकृतमहोवायुद्धऊदनशिकार वर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥ महोबेकाप्रथमयुद्धसमाप्त ॥