आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंबेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५४१ १३ आल्हा ऊदन इन्दल तीनों लागे बैठि तहाँ पछिताय ॥ धावलि सुनवाँ फुलवा तीनों सुनतै गिरीं पछाराखाय १३० बड़ी दुर्दशा त्यहि समया कै हमरे बूत कही ना जाय ॥ रानी मल्हना के महलन मा सब दुखउतरा गायबजाय १३१ फिरि फिरि रानी रोदन ठानैं सखियाँ रहीं तहाँ समुझाय ॥ माहिल भूपति द्वउ मरिजावैं उरई गिरै गाज अरराय १३२ जिनकीचुगुलिनते महलनमा यहदुखपरा आजदिन आय ॥ मरै पिथौरा दिल्लीवाला जो यहु पूत डरा मरवायें १३३ होय निपूती रानी अगमा सोऊ महल बैठि पछिताय ॥ इतना कहिकै रानी मल्हना फिरिफिरिबारबारपछिताय १३४ ताहर नाहर गा दिल्ली मा राजै खबरि जनाई जाय ॥ बात फैलिगै सब दिल्ली मा औरनिवासपहूंची आय १३५ खबरि पायकै रानी अगमा महलन गिरी पछारा खाय ॥ कन्त जूझिगे रण खेतन मा बेला सुना तहाँपर आय १३६ यहु पछितानी मन अपने मा भूषण बसन दीन छिरकाय ॥ कहा न मानै तहँ काहू का बेला गिरै परै बिलखाय १३७ औ गरियावै बेला रानी चौंड़ा बंश नाशि हैजाय ॥ बने जनाना तू दिल्ली मा ओदहिजार भवानी खाय १३८ नाहक जन्मी धाँधू मैया दैया गती कही ना जाय ॥ नहिं रजपूती कछु ताहर मा धोखे हना तीरका घाय १३६ इतना कहिकै बेला रानी तुरतै उठी तड़ाका धाय ॥ महल छोड़ि कै महतारीका पहुँची और महलमें जाय १४० प्रथम युद्ध मा जो गौने मा सो हम सबै गये अवगाय ॥ आशिर्वाद देउँ मुन्शी सुत जीवो प्रागनरायणभाय १४१.