भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 544

॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ अथ आल्हखण्ड ॥ बेलाकेगौने की दूसरीलड़ाई में रानालाखनिसिंह तथा उदयसिंहजी की चढ़ाई का वर्णन ॥ सवैया ॥ हे बिधि दे वरदान यही पद पंकज ईश सदा हम ध्यावैं । होवैं जहाँ जलहू थल में रघुनन्दन को तहँ शीशनवावैं ॥ और न काम कछू हमको इक रामको नाम नितै हमगावैं। याँच यही लहिते कर साँच मिलैं रघुनाथ तबै सुखपावैं १ सुमिरन ॥ तुम्हें विधाता हम ध्यावतहैं धाता कृपा करौ अब हाल ॥ परम पियारे रघुनन्दनजी जाते दरशदेयँ यहिकाल १ युक्तिबतावो स्वइ धाता तुम जाते मिटै सकल भ्रमजाल ॥ दशरथ नन्दन रघुनन्दन को बन्दन करों सदासबकाल २ चन्दन अक्षत औ पुष्पन सों पूजों शम्भु भवानी लाल ॥ कण्ठ हलाहल भल सोहत है सोहै बाल चन्द्रमा भाल ३