भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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८ आल्हखण्ड । ५५० बिरा धरावा गा गौने का रहिगा चार घरी लौं पान ६९ कोऊ खावा जब बीरा ना तब मैं उठा शारदा ध्याय ॥ कर्सों हमरे बीरा लीन्ह्यो तुम्हरे कन्त चँदेलेराय ७० माहिल भूपति तहँ मुसकाने हमरो मरण समय गो आय ॥ कछु नहिं बोले परिमालिकजी दादा हमरे उठे रिसाय ७१ कहा हमारो तुम मान्यो ना ऊदन गयो मोहोवे आय ॥ सवन चिरैया ना घर छोड़ै नावनिउरा बनिजकोजाय ७२ तबै निकार्यो परिमालिकजी दीन्ही बहुत तलाक माय ॥ गे जगनायक जब लेने को तब नहिं अवै बनाफरराय ७३ बहु समुझाये ते आये ते लाखनिराना संग लिवाय ॥ भरी कचहरी परिमालिक की ब्रह्मा लीन्ह्यो पान छिनाय ७४ वासरि करिकै द्वासरी कीन्ही दूनों भाय गयन अलगाय ॥ दादा रोंका मोहिं अवतीखन तुमनहिंजाउलहुरवाभाय ७५ वादा तुमते हम कीन्हा था तुम्हरी बिदा लेब करवाय ॥ गड़बड़िचिट्ठीतुमअतिलिखिकै धावन हाथ दीन पठवाय ७६ सो दिखलावा नहिं दादा को कण्ठै हाल दीन बतलाय ॥ दूध पियावा मल्हना रानी स्यावामोहिं बहुत डुलराय ७७ व्याह हमारे मल्हना रानी कुँवना पाँव दीन लटकाय ॥ प्राण नेग दै मैं मल्हना को टार्यों पैर तहाँ ते माय ७८ प्राण निछावरि तुमपर करिकै बिछुरे कन्त देव मिलवाय ॥ इतना सुनिकै बेला बोली यहनहिंआशपूरिदिखलाय ७९ कुटुंब हमारो सब बैरी है हमको राँड़ दीन करवाय ॥ जियत पिथौरा औ ताहर के कैसे मिलब पियाको जाय ८० प्रभुता ऐसी क्यहि क्षत्री मा प्रीतम मिलन देय करवाय ॥