भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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बेलाकेगौनेकाद्वितीययुद्ध । ५५१ शब्द कान सुनि तीर चलावैं हमरे पिता पिथौराराय ८१ लाखनि ऊदन कै गन्ती का हमरी बिदा लेयँ करवाय ॥ डोला लाये संयोगिनि का तब कहँ हते कनौजीराय ८२ सोई लाखनि की दूसर हैं हमरी बिदा लेयँ करवाय ॥ रहे आसरा तुम्हेरो ऊदन सोऊ नहीं पूर दिखलाय ८३ भारी फौजैं महराजा की डोला कौन भांति सों जाय ॥ यहै अंदेशा है जियरे मा लाखनिराना लेउ बुलाय ८४ हुकुम पायकै यह बेला को बाँदी चली तड़ाका धाय ॥ है मर्दाना ज्यहिका बाना सुन्दर सुघर कनौजीराय ८५ सो चलिआवा सँग बाँदी के पहुँचा रंग महल में आय ॥ आवत दीख्यो लखराना को खातिर कीन लहुरखा माय ८६ बैठि कनौजी गे महलन मा बेला बोली बैन सुनाय ॥ बिदाकरावन तुम कस आये दिल्ली शहर कनौजीराय ८७ तुम्हरे घरते संयोगिनि का लाये दिल्ली के सरदार ॥ त्यही वंश के तुम लाखनि हौ की कहुँअन्तलीनअवतार ८८ सुनिकै बातैं ये बेला की यहु अलबेला कनौजीराय ॥ लाली लाली आँखी करिकै दाढ़ी बार दीन बिखराय ८९ एक हाथ धरि तहँ मुच्छन मा नंगी एक हाथ तलवारि ॥ लाखनि बोले तहँ बेलाते कैसी बातें बकै गँवारि ९० काह हक़ीकत थी पिरथी की बिटिया लेत चँदेले केरि ॥ बिटिया लाये घर चेरी की रानी कहा गँवारिनि टेरि ९१ त्यहिके बदले कहु अगमा का डोला लेउँ आज निकराय ॥ तौ तो लरिका रतीभान का नहिं ई मुच्छ डरों मुड़वाय ९२ ऊदन बोले फिरि बेलाते भौजी काह गयी बौराय ॥