भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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सवापहर के फिरि अर्सामाँ ऊदन गयो मोहोबे आय ६ हाँ पनिहारी चलि पनिघटसों माहिल द्वार पहुंची आय ॥ कही हक़ीकत सब माहिल सों आँखिन आँसू रहीं बहाय १० ईजति हमरी वहि लैडारयो बेटा देशराज के लाल ॥ गगरी सबियाँ चूरण कैकै औचलिगयो जहाँपरिमाल ११ सुनिकै बातैं पनिहारिन की माहिलजला अग्निकीज्याल ॥ काग़ज लीन्ह्यो कलपीवाला लीन्ह्यो कलमदवाइत हाल १२ शिरीसरखऊ को पहिले लिखि पाछे लिखनलाग सब हाल ॥ चिट्ठी तुमका हम भेजित है सो पढ़िलेउ रजापरिमाल १३ तुम्हरे घरका जो चाकर है जाको उदयसिंह है नाम ॥ सो चलिआयो म्वरि उरई माँ सबियाँ बाग कीन बेकाम १४ उधुम मचायो सो पनिघट में सिगरी गगरी दीन नशाय ॥ कबसे ऊदन भे तरवरिहा सो तुम उन्हें देव समुझाय १५ टँगीं खुपरियाँ देशराज की राजा जम्बा क्यरे दुवार ॥ बड़ी वीरता जो आई हो माड़ो करें जाय तलवार १६ लिखिकै चिट्ठी सो माहिलने धावन हाथ दीन पकराय ॥ साजि साँड़िनी को जल्दी सों धावन चला मोहोबे जाय १७ तीन पहर का अरसा करके फाटक उपर पहुंचा जाय ॥ बैठि साँड़िनी गै फाटक पर धावन उतरपरा तहँ आय १८ चलिभो धावन फाटक भीतर जहँ पै बैठ रजा परिमाल ॥ कीन बन्दगी महराजा को पत्री देत भयो ततकाल १६ फारि लिफाफा को जल्दी सों पत्री पढ़त भयो परिमाल ॥ लिखी हकीकत जो माहिल है सोसबबाँचिलीनत्यहिकाल २० कलम दवाइत कागज लैंकै उत्तर लिखनलाग परिमाल ॥