आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंधोखे माड़ो की चरचा ना कीन्ह्यो उरई के नरपाल २१ फोरी गगरिया है माटी की ताँवे घड़ा देउँ बनवाय ॥ विषधर लड़का देशराज का जयहिकाकहीउदयसिंहराय २२ जैसे लरिका देशराज का तैसे पूत आपनो जान ॥ अनख न मानव यहि वातनका माहिल वचन हमारे मान २३ लिखिकै चिट्ठी को जल्दी सों धावन हाथ दीन पकराय ॥ माथ नायकै परिमालिक को धावन बैठ ऊंट पर जाय २४ जल्दी चलिकै फिरि मोहबे सों उरई तुरत पहुंचा आय ॥ किह्यो बन्दगी सो माहिल को पत्री दीन हाथ में जाय २५ पढ़िकै पत्री परिमालिक की माहिल ठाकुर उठा रिसाय ॥ नोचि फोंचिकै त्यहि चिट्ठीको माहिल तहँपर दीन चलाय२६ एक महीना के अरसा में ऊदन खेलन चल्यो शिकार ॥ जायकै पहुंच्यो फिरि उरई में माहिल बाग गयो सरदार २७ जोड़ी मास्यो करसायल की औ फुलबगिया डस्योनशाय॥ माली दौरे सब बगिया के औयहदिखयनितमाशाआय२८ जल्दी चलि भे ते उरई को अभई पास पहुंचे जाय ॥ कह्यो हकीकत सब माली ने अभई तुरतै चला रिसाय २६ जायकै पहुँच्यो फिरिबगियामें अभई गरु दीन ललकार ॥ अवगुन कीन्ह्यो भल उरई में ओ द्यावलि के राजकुमार३० जान न पैहो अब उरई ते ऊदन खबरदार द्वैजाय ॥ सुनिकै बातें ये अभई की घोड़ते कुदा बनाफरराय ३१ पकरिकै बाहू द्वउ अभई की औ वगिया माँ दीन चलाय॥ हाँकिकै घोड़ा ऊदन चलिभे पहुँचे नगरमोहोबा आय ३२ माली दौरे फिरि बगिया ते माहिल पास पहुंचे आय ॥