भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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माड़ोका युद्ध । ५३ ५ सुनिकै बातें तिन मालिन की माहिल ठाकुर उठा रिसाय ३३ लिल्ली घोड़ी को मँगवायो तापर माहिल भयो सवार ॥ जायकै पहुँच्यो फुलबगिया में ठाकुर उरई को सरदार ३४ गोद उठायो फिरि अभई को तुरतै नलकी लीन मँगाय ॥ त्यहि पौढ़ायौ सो अभई को महलन तुरत दीनपहुँचाय ३५ अपना चलिभा फिरि मोहबेको लिल्लीघोड़ी पर असवार ॥ तिकृतिकृतिकृतिकूहांकतिआवै पहुँचा फेरि महोबेदार ३६ उतरिकै घोड़ी सों जल्दी सों चलिभो जहाँ रजापरिमाल ॥ राम जुहार कीन राजा को औफिरिकहनलागसबहाल ३७ तुमने ऊदन को पालो है राजा मोहबे के सरदार ॥ दाख छुहारेन की बगिया को ऊदन जाय कीन संहार ३८ भुजा उखारी तिन अभई की मारो हिरण बाग में जाय ॥ दूजी कीन्हीं म्वरे साथ में ओ महराजा बात बनाय ३६ ऐस बहादुर जो पैदा भे काहे न लेयँ बाप को दायँ ॥ जम्बै राजा माड़ोवाला दशहरि पुरवा लीन लुटाय ४० बाँधिकै मुश्कें देशराज की पत्थर कल्हू डरा पिरवाय ॥ लेखा पतुरिया देशराज की सो लैगयो करिंगाराय ४१ घोड़ पपीहा औ हाथी को लीन्ह्यो हार नौलखा आय ॥ सोवत मारयो बच्छराज को दशहरिपुरवा दीन फूँकाय ४२ इतना कहतै ऊदन आयों राजा गयो सनाका खाय ॥ कलहा लड़िका देशराज को जो मरिबे को नहीं डेराय ४३ सुनिकै बातें सो माहिल की ठाढ़ो भयो शीश को नाय ॥ को है राजा माड़ोवाला सांची हमें देउ बतलाय ४४ को है मारा म्वरे बाप को पुरवा कौन दीन फूँकवाय ॥