भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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६ आल्हखण्ड । ५४ लखा पतुरिया को लैगा को घोड़ा कौन लीन छुड़वाय ४५ हार नौलखा को लैगा को मार्यो बच्छराज को आय ॥ हाल बतावो सब जल्दी सों हमरे धीर धरा ना जाय ४६ सुनिकै बातें बघऊदन की बोला तुरत रजापरिमाल ॥ तीस बरस की ई बातें हैं माहिलकहँ आजसो हाल ४७ कठिन लड़ाई भै सिलहट में तहँ पर जूझो बाप तुम्हार ॥ दशहरिपुरवा कहूँ अनते हैं फूंक्यो माड़ो के सरदार ४८ किह्यो बहाना परिमालिक ने मान्यो नहीं बनाफरराय ॥ माहिल तेरे फिर पूंछत भे साँचे हाल देव बतलाय ४६ को है राजा माड़ोवाला ज्यहिने मारा बाप हमार ॥ चरचा कीन्हीं है तुम्हीं ने ठाकुर उरई के सरदार ५० त्यहिते तुमते हम पूंछत हैं सो तुम हमें देउ बतलाय ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की माहिलकहावचनमुसुकाय ५१ जौन बतावा परिमालिक ने सोई सत्य बनाफरराय ॥ बाप तुम्हारो सिलहट जूझ्यो चरचाकीत सोईहम आय ५२ सुनिकै बातें ये माहिल की चलिभा तुरत बनाफरराय ॥ जायके पहुँच्यो त्यहि मन्दिरमें जहँ पै रहे दिवलदे माय ५३ हाथ जोरिकै तहँ पूँछत भा माता चरणन शीश नवाय ॥ किसने मार्यो म्वरे बाप को माता मोहिं देउ बतलाय ५४ लखा पतुरिया हाथी घोड़ा औ लैगयो नौलखाहार ॥ टँगी खुपरिया म्वरे बाप की माता क्यहिके अबों दुवार ५५ सत्य बतावै मोहिं माता तू नहिं मरिजाउँ पेटको मारि ॥ इतनी कहिकै बघऊदन ने औ छाती में धरी कटारि ५६ देखि तमाशा यहु ऊदन को द्यावलि मनमाँ कीन बिचार ॥