भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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माड़ोका युद्ध । ५५ ७ माहिल आवाहै उरई ते त्यहि भुरकावा पूत हमार ५७ सोचन लागी मन अपने माँ अब मैं काह करों भगवान ॥ झूठ बतावों जो लरिका ते तो यहु छाँड़े अबै परान ५८ सत्य बतावों यहि लरिका ते तो यहु अबहीं करै पयान ॥ मोहिं पियारो बघऊदन है प्यारो नहीं आपनो प्रान ५६ साँच बतावों मैं ऊदन ते यह मन ठीक लीन ठहराय ॥ जौन विधाता की मर्जी है होवै स्वई भागवश आय ६० यहै सोचि कै मन अपने माँ द्यावलिकहन लागि सबगाय॥ जम्बै राजा माड़ोवाला त्यहिका पूत करिंगाराय ६१ सो चढ़िआयो अधीरात को मार्यो बाप तुम्हारो आय ॥ चचा तुम्हारे का सो मारा दशहरि पुरवा दीन फुँकाय ६२ लै पचशब्दा गा हाथी को पपिहाघोड़ लिहेसि छुड़वाय ॥ ल खाप तुरिया हार नौलखा सब लैगयो करिंगा आय ६३ मालखजाना परिमालिक का सोऊ सबै लीन लदवाय ॥ बिदति मचायो बड़ि पुरवामाँ बहु दहिजार करिंगाराय ६४ चुरी उतार्यों ना तबसों मैं मनमाँ यहै लीन ठहराय ॥ पूत सुपूते जो कोउ हैंहैं लेहैं दाउँ बाप को जाय ६५ चुरी उतारौं तब सागर में यह म्वरे मनै गई तब आय ॥ जन्म तुम्हारो तब भातोना पेट में रहो बनाफरराय ६६ बराबरस की नगरी भंवरी या त्यहिते मोर प्राण घबड़ायँ ॥ बाढ़ो बोड़ा फैले इल्म बीते बदला लिह्यो बापको जाय ६७ सवैया ॥ बात सुन्यो यह मातु मुखै तबहीं बघऊदन ने ललकारा। जाय हनउँ गढ़माड़व में मयँ जम्बै ठाकुर केर कुमारा ॥

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