आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
माड़ोका युद्ध । ५३ ५ सुनिकै बातें तिन मालिन की माहिल ठाकुर उठा रिसाय ३३ लिल्ली घोड़ी को मँगवायो तापर माहिल भयो सवार ॥ जायकै पहुँच्यो फुलबगिया में ठाकुर उरई को सरदार ३४ गोद उठायो फिरि अभई को तुरतै नलकी लीन मँगाय ॥ त्यहि पौढ़ायौ सो अभई को महलन तुरत दीनपहुँचाय ३५ अपना चलिभा फिरि मोहबेको लिल्लीघोड़ी पर असवार ॥ तिकृतिकृतिकृतिकूहांकतिआवै पहुँचा फेरि महोबेदार ३६ उतरिकै घोड़ी सों जल्दी सों चलिभो जहाँ रजापरिमाल ॥ राम जुहार कीन राजा को औफिरिकहनलागसबहाल ३७ तुमने ऊदन को पालो है राजा मोहबे के सरदार ॥ दाख छुहारेन की बगिया को ऊदन जाय कीन संहार ३८ भुजा उखारी तिन अभई की मारो हिरण बाग में जाय ॥ दूजी कीन्हीं म्वरे साथ में ओ महराजा बात बनाय ३६ ऐस बहादुर जो पैदा भे काहे न लेयँ बाप को दायँ ॥ जम्बै राजा माड़ोवाला दशहरि पुरवा लीन लुटाय ४० बाँधिकै मुश्कें देशराज की पत्थर कल्हू डरा पिरवाय ॥ लेखा पतुरिया देशराज की सो लैगयो करिंगाराय ४१ घोड़ पपीहा औ हाथी को लीन्ह्यो हार नौलखा आय ॥ सोवत मारयो बच्छराज को दशहरिपुरवा दीन फूँकाय ४२ इतना कहतै ऊदन आयों राजा गयो सनाका खाय ॥ कलहा लड़िका देशराज को जो मरिबे को नहीं डेराय ४३ सुनिकै बातें सो माहिल की ठाढ़ो भयो शीश को नाय ॥ को है राजा माड़ोवाला सांची हमें देउ बतलाय ४४ को है मारा म्वरे बाप को पुरवा कौन दीन फूँकवाय ॥
६ आल्हखण्ड । ५४ लखा पतुरिया को लैगा को घोड़ा कौन लीन छुड़वाय ४५ हार नौलखा को लैगा को मार्यो बच्छराज को आय ॥ हाल बतावो सब जल्दी सों हमरे धीर धरा ना जाय ४६ सुनिकै बातें बघऊदन की बोला तुरत रजापरिमाल ॥ तीस बरस की ई बातें हैं माहिलकहँ आजसो हाल ४७ कठिन लड़ाई भै सिलहट में तहँ पर जूझो बाप तुम्हार ॥ दशहरिपुरवा कहूँ अनते हैं फूंक्यो माड़ो के सरदार ४८ किह्यो बहाना परिमालिक ने मान्यो नहीं बनाफरराय ॥ माहिल तेरे फिर पूंछत भे साँचे हाल देव बतलाय ४६ को है राजा माड़ोवाला ज्यहिने मारा बाप हमार ॥ चरचा कीन्हीं है तुम्हीं ने ठाकुर उरई के सरदार ५० त्यहिते तुमते हम पूंछत हैं सो तुम हमें देउ बतलाय ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की माहिलकहावचनमुसुकाय ५१ जौन बतावा परिमालिक ने सोई सत्य बनाफरराय ॥ बाप तुम्हारो सिलहट जूझ्यो चरचाकीत सोईहम आय ५२ सुनिकै बातें ये माहिल की चलिभा तुरत बनाफरराय ॥ जायके पहुँच्यो त्यहि मन्दिरमें जहँ पै रहे दिवलदे माय ५३ हाथ जोरिकै तहँ पूँछत भा माता चरणन शीश नवाय ॥ किसने मार्यो म्वरे बाप को माता मोहिं देउ बतलाय ५४ लखा पतुरिया हाथी घोड़ा औ लैगयो नौलखाहार ॥ टँगी खुपरिया म्वरे बाप की माता क्यहिके अबों दुवार ५५ सत्य बतावै मोहिं माता तू नहिं मरिजाउँ पेटको मारि ॥ इतनी कहिकै बघऊदन ने औ छाती में धरी कटारि ५६ देखि तमाशा यहु ऊदन को द्यावलि मनमाँ कीन बिचार ॥
माड़ोका युद्ध । ५५ ७ माहिल आवाहै उरई ते त्यहि भुरकावा पूत हमार ५७ सोचन लागी मन अपने माँ अब मैं काह करों भगवान ॥ झूठ बतावों जो लरिका ते तो यहु छाँड़े अबै परान ५८ सत्य बतावों यहि लरिका ते तो यहु अबहीं करै पयान ॥ मोहिं पियारो बघऊदन है प्यारो नहीं आपनो प्रान ५६ साँच बतावों मैं ऊदन ते यह मन ठीक लीन ठहराय ॥ जौन विधाता की मर्जी है होवै स्वई भागवश आय ६० यहै सोचि कै मन अपने माँ द्यावलिकहन लागि सबगाय॥ जम्बै राजा माड़ोवाला त्यहिका पूत करिंगाराय ६१ सो चढ़िआयो अधीरात को मार्यो बाप तुम्हारो आय ॥ चचा तुम्हारे का सो मारा दशहरि पुरवा दीन फुँकाय ६२ लै पचशब्दा गा हाथी को पपिहाघोड़ लिहेसि छुड़वाय ॥ ल खाप तुरिया हार नौलखा सब लैगयो करिंगा आय ६३ मालखजाना परिमालिक का सोऊ सबै लीन लदवाय ॥ बिदति मचायो बड़ि पुरवामाँ बहु दहिजार करिंगाराय ६४ चुरी उतार्यों ना तबसों मैं मनमाँ यहै लीन ठहराय ॥ पूत सुपूते जो कोउ हैंहैं लेहैं दाउँ बाप को जाय ६५ चुरी उतारौं तब सागर में यह म्वरे मनै गई तब आय ॥ जन्म तुम्हारो तब भातोना पेट में रहो बनाफरराय ६६ बराबरस की नगरी भंवरी या त्यहिते मोर प्राण घबड़ायँ ॥ बाढ़ो बोड़ा फैले इल्म बीते बदला लिह्यो बापको जाय ६७ सवैया ॥ बात सुन्यो यह मातु मुखै तबहीं बघऊदन ने ललकारा। जाय हनउँ गढ़माड़व में मयँ जम्बै ठाकुर केर कुमारा ॥
नाहिं छुवउँ तलवारि न हाथ न मातु कहावों पूत तुम्हारा । ठाकुर सोइ कहैं ललिते जो मेरै रण खेतन में असिधारा ६८ इतनी कहिकै ऊदन बिगरे औ मातासों लगे बतान ॥ अब हम जइहैं गढ़ माड़ो को हमरो भलाकरैं भगवान ६६ कहा न मनिहैं हम काहू को हमरो सत्य वचन करु कान ॥ घर में माता अब तुम बैठो मनमें धरे रामको ध्यान ७० बराबरस का क्षत्रिक लरिका ज्यहिकै ऐंची अवै कमान ॥ त्यहि का बैरी सुखते स्वावै जिन्दा मुरदाके अनुमान ७१ बातैं सुनिकै ये ऊदन की द्यावलि हाथ पकरि तब लीन ॥ पकरिकै बाहू बघऊदन की आल्हानिकटगमनाफिरिकीन ७२ मलखे सुलखे देबा आल्हा ताहन बनरस का सरदार ॥ आवत दीख्यो जब माता को सबहिन कीन्ह्यो रामजुहार ७३ द्यावलि बोली तब ताहन ते छोटे देवर लगो हमार ॥ माहिल आये हैं उरई ते तिनते सुने सिछुट कवाम्बार ७४ करिया मार्यो म्वरे बाप को सो यहु बदल लेनको जाय ॥ जालिम राजा है माड़ो का ताते मोर प्राण घबड़ायँ ७५ तुमका सौंपति हौं ऊदन को इनका माड़ो लवो दिखाय ॥ इतनी सुनि कै आल्हा बोले घरमाँ बैठु लहुरवा भाय ७६ धुआँ न दीखे तू तोपन का ना रण नाँगि दीख तलवार ॥ अड़वड़ क्षत्री है माड़ो का मानि ल्यो कहा हमार ७७ इतनी सुनिकै ऊदन बोले कहाँ कहा शोभै गा त्वार ॥ टँगी खुपरिया म्वरे बाप की राजा जम्बै क्यरे दुवार ७८ नालति ऐसी रजपूती को दादा जीबे को धिक्कार ॥ क्षत्री हैकै समर सकाना ताको खायँ गिद्ध नहिंस्यार ७६
माड़ोका युद्ध । ५७ ६ की खपरी खपरिन मिलि जैहैं की पै मिली बाप का दाउँ ॥ जो नहिं जावों गढ़माड़ो को ऊदन नाहिं कहावों नाउँ ८० मलखे बोले तब देवा ते हमको शकुन देउ बतलाय ॥ हारि हमारी माड़ो हैहै की हम जितब करिंगाराय ८१ लैकेँ पोथी समरसार की देवा शकुन विचारन लाग ॥ यजुर्वेद ऋगवेद अथर्वण जानै सामवेद बड़भाग ८२ शकुन हमारो यों बोलत है माड़ो काम सिद्धि हैजाय ॥ मूड़ मुड़ावो योगी हैकै माड़ो चलो सबै जनभाय ८३ सुनिकै बातें ये देवा की मलखे थान लीन मँगवाय ॥ रंग रँगायो ते गेरू के गुदड़ीतुरतलीन सिलवाय ८४ वइसपर्त की सिली गुदड़ियाँ जिनमें छिपैं ढाल तलवार ॥ आल्हा ऊदन मलखे देवा सय्यद बनरस का सरदार ८५ पांचों मिलिकै सम्मत कैकै योगी भेष लिह्यनि फिरिधार ॥ कड़ा सूबरण के हाथे मा कानन कुंडल करैं बहार ८६ हाथ सुमिरनी तुलसी वाली तनमा लीन्ह्यो भस्म रमाय ॥ मलखे लीन्ह्यो इकतारा को आल्हा डमरू लियो उठाय ८७ लीन सरंगी मीराताल्हन देवा खँजड़ी रहा बजाय ॥ बजै बँसुरिया बघऊदन की शोभा कही बूत ना जाय ८८ राग छतीसो गावन लागे एक ते एक शूर सरदार ॥ सुरति बिहागर जयजयवन्ती ठुमरी टप्पा और मलार ८६ धुरपद गावैं औ तिल्लाना तोरैं ग़ज़ल पर्ज पर तान ॥ भूमि भूमिकै सारँग गावैं करिकै रामचन्द्र को ध्यान ६० मलखे बोले तब ऊदन ते तुम सुनि लेउ बनाफरराय ॥ पहिले माता द्वारे चलिये तहँपर अलख जगावँ जाय ६१
१० | आल्हाखण्ड । ५८ पाछे चलिये गढ़माड़ो को जामें काम सिद्ध है जाय ॥ सम्मत कैकै पाँचो योगी ड्योढ़ी उपर पहुंचे आय ६२ रानी द्यावलि के द्वारेपर योगिन अलख जगायोजाय॥ बाँदी दौरीं तब महलन ते द्वारे तुरत पहुंचीं आय ६३ देखि तमाशा यहु द्वारेपर महलन अटीं तड़ाका धाय ॥ हाल बतायो सब योगिन का सोऊ गई द्वारपर आय ६४ रूप देखिकै सब योगिन को द्यावलि खुशी भई अधिकाय ॥ पूँछन लागी फिरि योगिन ते योगी सत्य देव बतलाय ६५ कौन देश ते तुम आयो है जावो कौन देश महराज ॥ जो कछु माँगो म्वरे महलन में पुरवों तौन तुम्हारो काज ६६ इतनी सुनिकै ऊदन बोले माता बचन करो ममकान ॥ धोखे योगी के भूलो ना अपनोपुत्र मोहिं तू जान ६७ सुनिकै बातें ये ऊदन की द्यावलि बड़ी खुशी है जाय ॥ हृदय लगायो सब लरिकनको आशिर्वाद दीन हर्षाय ६८ ऊदन बोले फिरि माता ते हमरे बचन करो परमान ॥ ड्योढ़ी माँगिहौं रनिकुशलाकी नापहिचनी करिंगा ज्वान ६६ धरि दे पंजा म्वरि पीठि मा माड़ो लेउँ बापका दायँ ॥ सुनिकै बातें ये ऊदन की द्यावलि गोदलीन बैठाय १०० भुजबल पूज्यो सब लरिकनके द्यावलि बार बार बलिजाय ॥ जितिहौ राजा माड़ोवाला तुम्हरो वारु न बांका जाय १०१ सुनिकै बातें सब द्यावलि की चारों धरयो चरणपर माथ ॥ बड़ी अनन्दित द्यावलि द्वैकै फेरा सबन पीठि पर हाथ १०२ विदा मांगिकै सब माताओं मनिया देवन गे हर्षाय ॥ बड़ा प्रतापी जो मोहवेमाँ अस्तुति पढ़न लाग शिरनाय १०३
माड़ोका युद्ध । ५६ ११ सवैया ॥ जय जय देव मनावत तोहिं औ ध्यावतहउँ मैं गरीवनिवाजा । बदला पितुकोज्यहिभांति मिलै सोकरो बिभुदेवनहोय अकाजा ॥ भक्ततुम्हार उदयसिंह ठाढ़ सो आयसु काह मिलय महराजा । यहिभांति अनेकनबारकह्योशिरनायरह्यो ललितेनिजकाजा १०४ अस्तुति कीन्ह्यो मलखाने ने देबा ज्वरे खड़ा दोउहाथ ॥ पूजा कीन्ह्यो भल आल्हाने पाछे धरा चरणपर माथ १०५ मन्दिर बाहर सैयद ठाढ़ो सोऊ ध्यायरहा मनमांझ ॥ चरि चरि गौवें घरका डगरीं औ द्वैगई तहांपर सांझ १०६ उड़ि उड़ि पक्षी गये बसेरन नखतन कीन तहाँ उजियार ॥ पूजाकरिकै सब बिधिवतसों तहँते चलत भये सरदार १०७ जायकै पहुंचे निज महलन में नयनन गई नींद अतिछाय ॥ मलखे देबा आल्हा ऊदन सोये रामचन्द्र को ध्याय १०८ सैयद सुमिरयो बिसमिल्ला को नाहर बनरस का सरदार ॥ बिकट निशाकी ये बातें हैं ज्वानो मानो कही हमार १०६ योगी जागैं सब आनंद सों चोरन बड़ी खुशी भै आय ॥ माथ नवावों श्रीगणेश को औ रट राम राम मनलाय ११० दोउ पद बन्दौं पितु अपने के जिन मोहिं विद्या दीनपढ़ाय ॥ स्वर्ग में बैठे सो सुख भोगैं सेवक कहै नित्त यशगाय १११ सब अभिलाषा पूरी हैगै आशा रही राम के पाँय ॥ आगे फौजें मोहबे सजिहैं माड़ो जई बनाफरराय ११२ इतिश्री लखनऊनवासि (सी,आई,ई) मुंशी नवलकिशोरात्मज बाबू प्रयागनारायणजीकी आज्ञानुसारउन्नावप्रदेशान्तर्गत पँडरीकलां निवासि मिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशंकरसूनु पं०ललिताप्रसादकृत ऊदनमातासंवादेप्रथमस्तरङ्गः १ ॥
१२ आल्हखण्ड । ६० सवैया ॥ तव पद प्रेम बढ़ायों नितै अब जावों कहाँ मोहिं देहु बताई । सूझत और न ठौर कहूं तजिकै तव चरणन की सेवकाई ॥ भाई औ बन्धु सहाई कोऊ नहिं देखि परो तुमहीं रघुराई । ललिते अबआशनिराशकरै क्यों भूलिगयों प्रभुकी प्रभुताई १ सुमिरन ॥ रामको ध्यावों औलछिमनको बेटा अंजनि को हनुमान ॥ वालि के अंगद तुमका ध्यावों लंका किह्यो घोर घमसान १ मान न राख्योक्यहुंनिशचरको रोप्यो पैर सभा में जाय ॥ मेघनाद सम कोटिन योध तुमहरो पैर न सके हिलाय २ दानिन ध्यावों बलि हरिचन्दै कुंतीपुत्र करण सरदार ॥ इन्द्रहुआये ज्यहि द्वारे में औ यश सुनिकै परमउदार ३ अब मैं ध्यावों सुत गंगा को भीषम जौन शूर सरदार ॥ टारि प्रतिज्ञा दीन कृष्णकी करिकै बड़ी भयंकर मार ४ कहौं सपूती शिरीकृष्ण की जिन गोबर्द्धन लीन उठाय ॥ सात दिनोंलौं मेघा बरसे झम २ हहरि २ हहराय ५ बई कँगुलियांपर गिरिधारे ठाढ़े रहे कृष्ण महराज ॥ लाज रखैया सोइ स्वामी हैं हमपर कृपाकरैं ब्रजराज ६ छूटि सुमिरनी गय देवन कै शाकासुनो शूरमन क्यार ॥ ऊदन जैहैं गढ़माड़ो को हैहैं फौज सबै तय्यार ७ अथ कथाप्रसंग ॥ मुर्गा बोले सब गांवन में पक्षी जागिपरे त्यहि काल ॥ शब्द चहचहा बोलन लागे जागा मोहबे का नरपाल १ आल्हा ऊदन मलखे देवा जागा बनरस का सरदार ॥
मांडोका युद्ध । ६१ १३ सय्यद सुमिरखो बिसमिल्ला को मलखे सुमिरख्यो नन्दकुमार २ बिंध्यबासिनी आल्हासुमिरख्यो देबा रह्यो रामपद ध्याय ॥ देवी शारदा मइहरवाली सुमिरनलाग लहुरवाभाय ३ चरण शरण में हम तुम्हरी हैं दाया करो शारदामाय ॥ जीति कै अइहौं जो माड़ो ते सोने छत्र चढ़ैहौं आय ४ लज्जा राख्यो ओ महरानी मैं हौं सदा तुम्हारो दास ॥ नहीं भरोसा निज भुजबलका केवल एक तुम्हारी आस ५ ध्याय शारदा को ऊदन फिरि दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥ किह्यो दण्डवत महरानी की जो गाढ़े मा होयँ सहाय ६ ऊदन बोल्यो फिरि आल्हा सों दादा मानौ कही हमार ॥ क्षण क्षण बीतै जो मोहबे मा सो हम जानैं वर्ष हजार ७ जल्दी चलिये राजभवन में जहँ पै बैठि रजापरिमाल ॥ बिदा मांगिकै महाराजा सों दादा चलन चही ततकाल = सुनिकै बातें बघऊदन की आल्हा लीन ढाल तलवार ॥ उठिकै ठाढ़े भे जल्दी सों सँगमें बनरसका सरदार ६ सभामें पहुँचे परिमालिक की पाँचो ठाढ़ भये शिरनाय ॥ बोले आल्हा सों परिमालिक काहे खड़े बनाफरराय १० सुनिकै बातें परिमालिक की आल्हा कही हकीकत गाय ॥ भई लहुरवा यहु बिगराहै माड़ो लेई बापका दाँय ११ सुनिकै बातें ये आल्हा की राजा गयो सनाकाखाय ॥ बोलि न आवा परिमालिकसे मुँहका बिरा गयो कुम्हिलाय १२ बड़ी उदासी मुखपर छाई शिरसों गिरा छत्र भहराय ॥ सोचनलाग्योपरिमालिकफिरि मन ना कछू ठीक ठहराय १३ बहुतसोचिकैपरिमालिक फिरि बोल्यो सुनो उदयसिंहराय ॥
१४ आल्हाखण्ड । ६२ उमर तुम्हारी बहु थोरी है ताते धरा धीर ना जाय १४ जालिम राजा माड़ोवाला ऊदन मानो कही हमार ॥ धुआँ न दीख्यो तुम तोपनका नहिंरणनांगिदीख तलवार १५ पटा बनेठी बाना गदका सीखो रोज बनाफरराय ॥ जो जी चाहै सो तुम खावो कुश्ती लड़ो अखाड़े जाय १६ पै नहिं जावो तुम माड़ो को बेटा म्वरे उदयसिंहराय ॥ सुनिकै बातैं परिमालिक की बोला तुरत बनाफरराय १७ बरा बरस का क्षत्री लरिका रणमा गहै नहीं तलवार ॥ लालति त्यहिके फिरि जीवैका पैदा होवेका धिकार १८ बारह बरसके कृष्णचन्द्र रहें मथुरा कंस पछारयो जाय ॥ कालयमन औ जरासन्ध फिरि तिनपर कीन चढ़ाई आय १६ मोहरा मारा तिन दुष्टनका यह नित कहैं विप्र सब गाय ॥ मोहिं भरोसा शिरीकृष्ण का तिन बल लेउँ बापका दाँय २० सुनिकै बातैं ये ऊदन की तब मन जानिलीन परिमाल ॥ कहा हमारो यहु मानी ना नाहर देशराज का लाल २१ यहै सोचिकै परिमालिक ने घोड़ा पांच लीन मँगवाय ॥ लीन कबुतरी को मलखाने बेंदुल लीन उदयसिंहराय २२ घोड़ करिलिया आल्हा लीन्ह्यो सिरगा बनरस का सरदार ॥ लीन गनोहर फिर घोड़े को यहु भीषम का राजकुमार २३ जूझक कङ्कण सवालाख का ऊदने हाथ दीन पहिराय ॥ आशिप दीन्ह्यो परिमालिक ने माड़ो लेउ बाप का दाँय २४ जितनी फौजैं म्वरे मोहबे मा सबियाँ बेगि लेउ सजवाय ॥ जावो माड़ो में पांचों मिलि मारो जाय करिंगाराय २५ सुनिकै बातैं परिमालिक की पांचों चलत भये शिरनाय ॥
माड़ोका युद्ध । ६३ १५ मल्हना रानी के महलन में तुरतै गये बनाफरराय २६ हाथ जोरि औ बिनती कैकै बोला बचन उदयसिंहराय ॥ जावैं माता हम माड़ो को आयसु आपु देउ फरमाय २७ मोहिं आज्ञा महराजा की माया आपु देउ बिसराय ॥ दाया करिकै म्वरे बालक पर माता हुकुम देउ फरमाय २८ सुनिकै बातें ये ऊदन की रानी गई सनाकाखाय ॥ काह विधाता की मरजी है ऐसो कहै लहुरखा भाय २९ यहै सोचिकै मन अपने मा औ सूर्यनको शीश नवाय ॥ मल्हना बोली बघऊदन ते हमरे सुनो बनाफरराय ३० बिटिया बनियां की आहिन ना जो रण सुनिकै जायँ डेराय ॥ जौनि आज्ञा महराजा की आयसु स्वई बनाफरराय ३१ सवैया ॥ जावहु पूत लड़व गढ़ माड़व आवो जीति यही हम चाहैं। सिंहिनि मातु नहीं मन सोच सदा यह वेद पुराणहु काहैं ॥ धर्म कि मारग जेई चलैं सुख तेई सदा जग में निरबाहैं। बाप तुम्हार हन्यो करिया ललिते त्यहि मारो तबै सुखलाहैं ३२ बातें सुनिकै ये मल्हना की बोले तुरत बनाफरराय ॥ आठ महीना की मुहलत दे नवयें चरण पूजिहौं आय ३३ वादा सुनिकै बघऊदन का मल्हना बिदा कीन हर्षाय ॥ पाँचो चलिभे फिरि महलन ते औ लश्कर में पहुँचे आय ३४ तुरत नगड़ची को बुलवायो सय्यद बनरस का सरदार ॥ बजै नगाड़ा अब मोहबे मा सबियाँ फौज होय तय्यार ३५ हुकुम पायकै सो ताल्हन को दौड़त चला नगड़ची जाय ॥
१६ आल्हखण्ड । ६४ धर्यो नगाड़ा फिरि सँड़ियापर भादों मेघ अस हहराय ३६ बोलि दरोगा घोड़े वाला चांदी कड़ा दीन डरवाय ॥ हुकुम लगायो बघऊदन ने सबियाँ घोड़ सवाँरो जाय ३७ बूढ़ो दुर्बल रोगी घोड़ा एको नहीं किह्यो तय्यार ॥ कच्छी मच्छी ताजी तुरकी हरियलमुश्की घोड़अपार ३८ लक्खा गर्रा पँचकल्यानी सुर्खा सुरँगा रंग विरङ्ग ॥ देर लगावो अब तनको ना घोड़ेनजायकसो सब तङ्ग ३६ सुनिकै बातैं बघऊदन की दौरत चला दरोगा जाय ॥ जितने घोड़ा घोड़शारे माँ सबिसँवेगि लीन कसवाय ४० हथी महावत हाथी लैके तिनका करन लाग तैयार ॥ अंगद पंगद मकुना भौंरा छोटे पर्वत के अनुहार ४१ मैनकुंज मलिया धौरागिरि औ भौंरागिरि दीन विछाय ॥ धरिकै सीढ़ी सांखो वाली हाथी सजैं महावत धाय ४२ डारि बिछौना मखमल वाले ऊपर हौदा दीन धराय ॥ हिरा बिराजैं अम्बारेन में शोभा कही बूत ना जाय ४३ बारह कलशा सोने वाले हौदा ऊपर करैं बहार ॥ यक यक हाथी के हौदा पर दुइ दुइ शूर भये असवार ४४ बोलि दरोगा तोपन वाला रुपिया मुहरैं दई इनाम ॥ बड़ि बड़ि तोपैं जल्दी साजो जासों होय हमारो काम ४५ सुनिकै बातैं मलखाने की दौरत चला दरोगा जाय ॥ कुवाँ सुखावनि गर्भ गिरावनि चर्खी ऊपर दीन चढ़वाय ४६ सूर्य्य लपकानि चन्दझपकनि बिजुली तड़पनि लीन मँगाय ॥ मेघगरज्जनि अष्टधातु की गोला एक मना को खाय ४७ तोप संकटा औ लछिमिनियाँ भैरौं तोप लीन मँगवाय ॥
माड़ोका युद्ध । ६५ १७ पहिया दुरकैं तिन तोपन के धसकतिचलीं रसातल जायँ ४८ को गति बरणै तिन तोपनकै कायर देखि देखि सकुचायँ ॥ शूर सिपाही ईजति वाले मनमाँ बड़े खुशी द्वैजायँ ४९ ऊदन बोले तब लश्कर में हमरे सुनो सिपाही भाय ॥ जिन्हें पियारी हों घरतिरिया दोहरी तलब लेयँ घरजायँ ५० जिन्हें पियारा हो रणलोहा जूझै चलैं हमारे साथ ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की क्षत्रिन नाय रामको माथ ५१ हाथ जोरिकै सब बोलतभे मानो कही बनाफरराय ॥ पाँउँ पछारी को डारै ना बहुतनधजीधजीउड़िजाय ५२ सुनिकै बातें रजपूतन की बोला द्यावलि क्यार कुमार ॥ स्याबसि स्याबसि ओ रजपूतो कलियुग रखिहौ धर्महमार ५३ भीलमबखतरपहिरि सिपाहिन हाथ में लीन ढाल तलवार ॥ रणकी मौहरि बाजन लागी रणका होनलाग ब्यवहार ५४ ढाढ़ी करखा बोलन लागे बिप्रन कीन वेद उच्चार ॥ चढ़ा कबूतरी पर मलखाने ऊदन बेंबुलपर असवार ५५ घोड़ करिलिया आल्हा बैठे सिरगा बनरस का सरदार ॥ बैठ मनोहरा की पीठीपर देवा भीषम केर कुमार ५६ पहिल नगाड़ा में जिनबन्दी दुसरे फाँदि भये असवार ॥ तिसर नगाड़ाके बाजत खन लश्करचलिभासाठिहजार ५७ आगे आगे तोपैं चलिभैं पाछे चले मस्त गजराज ॥ घंटा बाजैं गर हाथिन के मानो कोपकीन सुरराज ५८ खर खर खर खर कै रथ दौरैं चह चह धुरी रहीं चिल्लाय ॥ चला रिसाला घोड़नवाला ताकी शोभा कही नाजाय ५६ सत्रह दिनकी मैजलि करिकै माड़ो धुरा दवायनि जाय ॥ ५
१८ . आल्हाखण्ड । ६६ जायकै पहुँचे बबुरीबनमाँ तहँ पर तम्बू दीन गड़ाय ६० तंग बछेड़न की छोरीगइँ हाथिन हौदा घरे उतार ॥ बैठक साजीगय आल्हाकै लागीं छोटी बड़ी बजार ६१ लै लै सीधा चले सिपाही भोजन करन हेतु तय्यार ॥ बनी रसोइयाँ राजपूतन की ज्वानन खूबकीन ज्यौनार ६२ दिन दश बीते बबुरीवनमाँ ग्यरहें बोले उदयसिंहराय ॥ किहिकीनिंदिया आल्हा सोये औ कब ल्यहैं बापका दायँ ६३ तुरत बुलायो फिरि यकवा का बोल्यो बचन बनाफरराय ॥ शकुन विचारो अब जल्दी सों माड़ो काम सिद्धि है जाय ६४ सुनिकै बातें बघऊदन की देवा पोथी लीन उठाय ॥ सोचि समुझिकै देवा बोल्यो हमरे सुनो बनाफरराय ६५ जल्दी चलिये अब माड़ो को साइति बहुत गई नगच्याय ॥ सुनिकै बातें ये देवा की बोला बचन बनाफरराय ६६ उठिये दादा सावधान हो नहिं सब जैहैं काम नशाय ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की आल्हा उठे रामको ध्याय ६७ पाँचो मिलिकै तम्बू चलिभे जहँ पै रहें द्यावलदे माय ॥ देखिबालकनको द्यावलि फिरि सबको छाती लीनलगाय ६८ बड़ी प्रीति करि मलखाने सों बोली जियो बनाफरराय ॥ मस्तक सूँघ्यो सब लरिकनको पीठिमैं दीन्ह्यो हाथ फिराय ६६ द्यावलि बोली फिरि सय्यदसौं राजा बनरस के सरदार ॥ जैसे लड़िका ई हमरे हैं तैसे लड़िका लगैं तुम्हार ७० रक्षा कीन्ह्यो सब लड़िकन कै द्यावर बड़ा भरोसा त्वार ॥ सुनिकै बातें ये द्यावलि की बोला बनरस का सरदार ७१ बार न बांका इनका जाई द्यावलि मानो कही हमार ॥
[Header] माड़ोका युद्ध । ६७ १६
रक्षा करिहैं बिसमिल्ला जी करिहैं खुदा खैर यहि बार ७२ पायं लागिकै महतारी के योगी बने उदयसिंहराय ॥ छोड़ि आसरा जिंदगानी को औ सब मयामोह बिसराय ७३ पहिरिकैगूदड़ीआपनिआपनि चारो भाय बनाफरराय ॥ पहिरिकै गुदड़ी बनरस वाला खँझड़ीआपनिलीनउठाय ७४ पाँचो चलिभे गढ़माड़ो को गावतपर्ज और ध्वनि ख्याल ॥ भाइ लहुरवा थिरकति जावै बेटा देशराज को लाल ७५ को गति बरणै तिन योगिनकै हमरे बूत कही ना जाय ॥ बबुरीबनके बाहर ह्वैकै माड़ो तरे पहुँचे आय ७६ बजै सरंगी भल देवाकै सय्यद खँझरी रहा बजाय ॥ कर इकतारा मलखाने के आल्हा डमरू रहे घुमाय ७७ ध्वनि सुनि डमरूकै खँझड़ीतहँ तामें मिलै तुरतही आय ॥ डमरू ध्वनि में इकतारा मिलि औ सारँगि को रहा बुलाय ७८ चारो मिलिकै इकमिल ह्वैकै पाँचो शब्द पहुँचै जाय ॥ शब्द मिलावै द्यावलि वालो यहु आल्हाकलहुरवाभाय ७९ को गति बरणै बघऊदन कै गावै गीत छतीसो राग ॥ बड़ी भक्तिभय कृष्णचंद्रमें पूरो भयो तहाँ अनुराग ८० बाहू दोऊ फरकन लागीं नैना अग्नि बरण होजायँ ॥ देबी शारदाको ध्यावतभो यहु आल्हाकलहुरवाभाय ८१ अईं शारदा उर ऊदन के औ सब हाल दीन बतलाय ॥ बड़ी खुशहाली भय ऊदन के जाना मिला बापका दाँय ८२ तब तो थिरकै भल गलियन में फाटक तरे पहुँचा जाय ॥ अलख जगावै शब्द सुनावै योगिन धूनी दीन रमाय ८३ तब दरवानी बोलन लागे बाबा मतलब देउ बताय ॥
२० आल्हाखण्ड । ६८ कहाँ ते आयो औ कहँ जइहौ आपन भेद देउ बतलाय ८४ सुनिकै बातें दरवानी की बोला तुरत बनाफरराय ॥ हमतो आवैं बङ्गालेते आगे हिंगलाज को जायँ ८५ करब याँचना हम महलन में फाटक हमैं देउ खुलवाय ॥ सुनिकै बातें ये योगिन की बोला द्वारपाल हर्षाय ८६ खबरि सुनावैं महाराजा को तुमसे कहैं फेरि हम आय ॥ कहि हरकारा यह दौरतभा ड्योढ़ी तरे पहुँचा जाय ८७ बेटा अनूपी का जम्मानृप ताको खबरि सुनाई जाय ॥ आये योगी हैं द्वारे पर शोभा कही बूत ना जाय ८८ सवैया ॥ देख म पाँच लखइमाँ सांच सुनो नृप यांचि यही हम चाहें। पाँच के साथ मिले हम सांच पवैं बर यांचि अबैं अवगाहें ॥ देश बिदेश लखे नहिं पांच जो रूप में सांच सचे सच आहें। सांच कभी ललिते नहिं यांच चहै दशपांच मनै अरसाहैं ८६ सुनिकै बातें हरकारा की बोला माड़ो का सरदार ॥ जल्दी लावो तुम योगिन को शोभा लखी तासु की द्वार ६० सुनिकै बातें महाराजा की धावन चला तड़ाका धाय ॥ खबरि सुनाई सब योगिन को लय दरबार पहुँचा जाय ६१ बइसपर्त की गुदड़ी लीन्हे ज्यहिमाँ परी ढाल तलवार ॥ कुंडल सोहैं भल कानन में शिरपर टोपी करै बहार ६२ सोहैं सुमिरनी कर दहिने में आल्हा डमरू रहे बजाय ॥ बजै सरंगी भल देवा कै सय्यद खँझरी रहा उड़ाय ६३ कर इकतारा मलखे लीन्हे ऊदन बंशी रहे बजाय ॥
माड़ोका युद्ध । ६६ २१ को गति वरणै तहँ योगिन कै शोभा कही बूत ना जाय ६४ लिहे बांसुड़ी सबसों आगे सनमुख गयो उदयसिंहराय ॥ बायें हाथ सों कीन वन्दगी मन में ध्याय शारदामाय ६५ देखिकै तुरतै राहूट द्वैगा जम्बै माड़ो का सरदार ॥ सनमुख ठाढ़े त्यहि योगी को गरुई हांक दीन ललकार ६६ कउने गँवारे के चेला हौ योगिउकियो शत्रु का काम ॥ जउने हाथ सों जपै सुमिरनी जउने लेयँ रामको नाम ६७ करै वन्दगी हम त्यहि सों ना यह फिरि कह्यो बनाफरराय ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की राजा मनै गयो शरमाय ६८ मता अनूपी नृप जम्बा की तहँ पर गई रहै तब आय ॥ शोभा लखिलखि सो योगिनकै मनमाँ बड़ी खुशी है जाय ६६ औ फिरि बोली यह योगिनसों तुम्हरी योग सिद्धि है जाय ॥ चलिकै नाचो म्वरे महलन में योगेश्वरै कृष्णको ध्याय १०० सुनिकै बातें ये रानी की महलन तुरत पहुँचे जाय ॥ मलखे लीन्हे इकत्तारा को सय्यद खँझरी रहे बजाय १०१ बजै सरंगी भल देवा कै आल्हा डमरू रहे घुमाय ॥ बजै बांसुरी बघऊदन कै थिरकन लाग लँहुरवा भाय १०२ टप्पा ठुमरी भजन रेखता धुरपद बिहंगड़ो कल्यान ॥ जयजयवन्ती औ तिल्लाना तोरै ग़ज़ल पर्ज पर तान १०३ भाव बतावै सब अँगुलिन सों यहु द्यावलि को राजकुमार ॥ ता ता थे ई ता ता थे ई कबहूं निकरै शब्द अपार १०४ रानी कुशला की बाँदी तहँ देखै सबै काम बिसराय ॥ एक पहरते दुइ लग बीते तीसरपहरू गयोनगच्याय १०५ बाँदी गमनी तब महलन को देखत रानी उठी रिसाय ॥
२२ आल्हखण्ड । ७० बड़ी देर भइ हत्यारी तोहिं कात्वरिअकिलगईहिराय १०६ क्यहिके महलन में यटकीरहि सांची सांचु देइ बतलाय ॥ सुनिकै बातें महरानी की बांदीहाथजोरिशिरनाय १०७ कही हकीकति सब योगिनकै शोभा बार बार गयगाय ॥ कीतो आये इन्द्रलोक ते की वै गये स्वर्ग ते आय १०८ शोभा बरणै को योगिनकै रानी कही बूत ना जाय ॥ सुनिकै बातें ये बांदी की तुरतैहुकुम दीन फरमाय १०६ जल्दी लावो तुम योगिनको दर्शन मोहिं देउ करवाय ॥ मोरि लालसा यह डोलति है योगीजायँ महलमेंआय ११० सुनिकै बातें ये रानी की बांदी चली हवा के साथ ॥ मता अनूपी के महलन में योगिनजायनवायोमाथ १११ कह्यो हकीकति सब रानी की बांदी बार बार शिरनाय ॥ मता अनूपी तब बोलत भै योगीचरणशीशनवाय ११२ घर घर मांगे कछु बनिहैना कुशलामहल चले तुम जाउ ॥ बहु धन पैहौ त्यहि महलन में बैठे चहौ जन्मभर खाउ ११३ जैसी औषधि रोगी चाहै बैदन तैसी दई बताय ॥ बड़ी खुशाली भै ऊदन के जनुमिलिगयोबापकादायँ ११४ चले पछोड़ी सब योगी फिरि बांदी चली अगाड़ी जाय ॥ को गति वरणै तिन योगिनकै जनु गे देवलोक ते आय ११५ सवैया ॥ देखत योगिन रूप अनूप चले नर नारि सबै पुर केरे । आये मनो मघवापुरते यह बात करैं वै सबै मिलिकेरे ॥ हेरे तेई नहिं फेरे फिरैं बड़भाग कही जे रहे कोउ नेरे । योगिन योगिन भेष लखैं ललिते ते कहैं बड़भागहैं मेरे ११६
माड़ोका युद्ध । ७१ २३ रय्यत मोही गढ़ माड़ो की काहू धरा धीर ना जाय ॥ पहिली ड्योढ़ी योगी पहुँचे बांदी बोली शीश नवाय ११७ तनुकबिलामिजाउतुमड्योढ़ीपर भीतर खबर सुनावों जाय ॥ सुनिकै बातें ये बांदी की योगी ठाढ़ भये हरियाय ११८ घोड़ पपीहा तहँ बांधो थो हाथी खड़ा महोबे क्यार ॥ देखिकै दोऊ रोवनलागे आल्हाछाँड़िदीनडिंडकार ११९ देखि तमाशा ऊदन बोले आल्है बार बार शिरनाय ॥ काहे रोये तुम ददुवां हौ सांचे हाल देउ बतलाय १२० सुनिकै आल्हा बोलन लागे हमरे सुनो लहुरवा भाय ॥ हाथी घोड़ा दोउ मोहबे के इनका देखि मोहगाआय १२१ सुनिकै बातें ऊदन बोले दादा हुकुम देउ फरमाय ॥ हाथी घोड़ा दोउ लैजावैं औ फौजनमें पहुँचैं जाय १२२ सुनिकै बातें मलखे बोले ऊदन अकिल गई हेराय ॥ चोरी चोराते लै जैहौ कलियुग चोर कहैहौ जाय १२३ दाग लागि जाय रजपूती माँ औ सब क्षत्रीधर्म नशाय ॥ वादिन लीन्ह्यो हाथी घोड़ा जादिनलिह्योबापका दायँ १२४ तबलों बांदी दौरत आई योगिन माथ नवायो आय ॥ आगे बांदी पाछे योगी दूसरे फटक पहुँचे जाय १२५ तहँना बिरवा रह बरगदका छाया घनी रही तहँ छाय ॥ योगी बैठे त्यहि छाया में मनमें श्रीगणेशको ध्याय १२६ देशराज औ बच्छराज ये दोऊ भाय बनाफरराय ॥ पत्थर कोल्हुन में पिरवायो जम्बै पूत करिंगाराय १२७ खुपड़ी टाँगी त्यहि बरगद में औरन बोलि बोलि रहिजायँ । लड़का हैगे बैरागी हैं कोधौं ल्यई हमारो दायँ १२८
२४ आल्हखण्ड । ७२ पूत सुपूते जो घर होते हमरी गया देत करवाय ॥ सुनि सुनि बातें ये रन केरी ऊदन गये सनाकाखाय १२६ आल्हा मलखे रोवन लागे सय्यद नैन नीरगा छाय ॥ बांदी बोली तब योगिन ते योगी कहा गयो बौराय १३० कौने राजा के लड़िका हौ सांचे हाल देउ बतलाय ॥ देखि खुपड़ियनको रोवत कस हमरे धरा धीर ना जाय १३१ सुनिकै बातें ये बांदी की मलखे बोले बचन बनाय ॥ छोटो योगी यहु बालक है जो रन सुनिकैगयो डेराय १३२ तासों रोवैं हम योगी सब बांदी काह गई - बौराय ॥ भूत चुरैलैं हैं कोल्हुन में आभाबोलिबोलिरहिजायँ १३३ छोटो योगी यहु लड़िका है हिंयना चौंकिपरो सो आय ॥ तासों रोवैं हम सब योगी बांदी सत्य दीन बतलाय १३४ सुनिकै बातें ये योगिन की बाँदी गई हृदय हर्षाय ॥ रानी कुशला की ड्योढ़ी पर योगी सबै पहुँचे जाय १३५ बांदी बोली फिरि योगिन ते भीतर चलो सबै जन भाय ॥ इतनी सुनिकै मलखे बोले बांदी काह गई बौराय १३६ हम ना जैहैं रङ्गमहल को जो सुनिलैय बघोलाराय ॥ गये जनाने में योगी हैं नाहक हमें डरी मरवाय १३७ सुनिकै बातें ये योगिन की बांदी गिरी चरण पर धाय ॥ तुम्हें बुलायो महरानी है तब हम फेरि जुहाराआय१३८ साधु सन्त को सब कोउ मानैं छत्री बाम्हन हैं अधिकाय ॥ यह नहिं लङ्का है रावण की ना हिंयवसैनिशाचरभाय १३६ निर्भय चलिये तुम भीतर को योगी भरम देउ बिसराय ॥ सुनिकै बातें ये बाँदी की योगी सबै चले हर्षाय १४०