आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४ आल्हखण्ड । ७२ पूत सुपूते जो घर होते हमरी गया देत करवाय ॥ सुनि सुनि बातें ये रन केरी ऊदन गये सनाकाखाय १२६ आल्हा मलखे रोवन लागे सय्यद नैन नीरगा छाय ॥ बांदी बोली तब योगिन ते योगी कहा गयो बौराय १३० कौने राजा के लड़िका हौ सांचे हाल देउ बतलाय ॥ देखि खुपड़ियनको रोवत कस हमरे धरा धीर ना जाय १३१ सुनिकै बातें ये बांदी की मलखे बोले बचन बनाय ॥ छोटो योगी यहु बालक है जो रन सुनिकैगयो डेराय १३२ तासों रोवैं हम योगी सब बांदी काह गई - बौराय ॥ भूत चुरैलैं हैं कोल्हुन में आभाबोलिबोलिरहिजायँ १३३ छोटो योगी यहु लड़िका है हिंयना चौंकिपरो सो आय ॥ तासों रोवैं हम सब योगी बांदी सत्य दीन बतलाय १३४ सुनिकै बातें ये योगिन की बाँदी गई हृदय हर्षाय ॥ रानी कुशला की ड्योढ़ी पर योगी सबै पहुँचे जाय १३५ बांदी बोली फिरि योगिन ते भीतर चलो सबै जन भाय ॥ इतनी सुनिकै मलखे बोले बांदी काह गई बौराय १३६ हम ना जैहैं रङ्गमहल को जो सुनिलैय बघोलाराय ॥ गये जनाने में योगी हैं नाहक हमें डरी मरवाय १३७ सुनिकै बातें ये योगिन की बांदी गिरी चरण पर धाय ॥ तुम्हें बुलायो महरानी है तब हम फेरि जुहाराआय१३८ साधु सन्त को सब कोउ मानैं छत्री बाम्हन हैं अधिकाय ॥ यह नहिं लङ्का है रावण की ना हिंयवसैनिशाचरभाय १३६ निर्भय चलिये तुम भीतर को योगी भरम देउ बिसराय ॥ सुनिकै बातें ये बाँदी की योगी सबै चले हर्षाय १४०