आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
DevanagariHindipublished618 पृष्ठ
पृष्ठ 584, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 584
बेलाताहरकामैदान । ५८३ १६ विपति निवारण जगतारण के दूनों धरों चरणपर माथ २०१ करों तरंग यहाँसों पूरण तवपद सुमिरि भवानीकन्त ॥ रामरमामिलि दर्शन देवो इच्छा यहीमोरि भगवन्त २०२ इति श्रीलखनऊनवासि ( सी, आई, ई ) मुंशीनवलकिशोरात्मजबाबू प्रयागनारायणजीकीआज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गतपँडरीकलां निवासिमिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनुपण्डितललिताप्रसाद कृत ताहरबधवर्णनोनामप्रथमस्तरङ्गः ॥ १ ॥ बेलाताहरकामैदानसमाप्त ॥ इति ॥