भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 590, कुल 618 में से

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चन्दनबागकेरमैदान। ५८६ ५ दुनिया जानति है ऊदन को जिनके लड़न क्यार बयपार ॥ दूसर धंधा कछु कीन्हे ना चौड़ा मानु कही यहि बार ३५ अटक पारलौं झंडा गड़िगा बाजी सेतबन्धलौं टाप ॥ दतिया बूंदी जालंधर औ हमरी भई कमायूँ थाप ३६ चन्दन जैहैं सब मोहबे को चाहे फौज देउ कटवाय ॥ रुकिहै चन्दन अब चौड़ाना तुमते साँच दीन बतलाय ३७ इतना सुनिकै जरा चौंड़िया तुरतै लीन्ह्यो गुर्ज उठाय ॥ ऐंचि कै मारा सो ऊदन के लैगा बेंदुल वार बचाय ३८ बचा डुलरूवा द्यावलिवाला हौदा ऊपर पहुँचाजाय ॥ कलश सूवरण हौदावाले सो धरती मा दीन गिराय ३६ झुके सिपाही दुहुँतरफा के लागी चलन तहाँ तलवार ॥ पैग पैग पै पैदल गिरिगे दुइ दुइ पैग गिरे असवार ४० मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार ॥ मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ४१ बिजयसिंह है बिकानेर को बिरसिंह गाँजर को सरदार ॥ दोऊ मारैं दोउ ललकारैं दोऊ समरधनी तलवार ४२ कोऊ हारै नहिं काहू सों दोउ रण परा बरोबरि आय ॥ दोऊ ठाकुर हैं हाथी पर दोऊ देयँ सेलके घाय ४३ वार चूकिगे बिरसिंह ठाकुर मारा विजयसिंह सरदार ॥ जूझिगे बिरसिंह समरभूमि में हिरसिंह आयगयोत्यहिबार ४४ सँभरो ठाकुर अब हौदापर कीन्ह्यो विजयसिंह ललकार ॥ सुनिकै बातें विजयसिंह की हिरसिंह खैंचिली नितलवार ४५ ऐंचिकै मारा विजयसिंह को सो तिन लीन ढालपर वार ॥ रिसहा ठाकुर बिकानेर को सोत्यहि मारा फेरि कटार ४६

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