भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 589

४ आल्हाखण्ड । ५८८ ऊदन बैठे रस बेंदुलपर मन में ध्याय शारदामाय ॥ सजे सिपाही सब ठाढ़े थे तुरतै कूच दीन करवाय २३ बाजत डंका अहतंका के यमुना पास पहुँचे जाय ॥ पार उतरिकै श्री यमुना के दिल्लीशहर गये नगच्याय २४ चन्दन बगिया जहँ पिरथीकी तहँ पर गये बनाफरराय ॥ चन्दन बढ़ई को बुलवायो चन्दन सबै दीन गिरवाय २५ तब तो माली हल्ला करिकै चलिभे जहां पिथौराराय ॥ लगी कचहरी महराजा की शोभा कही बून ना जाय २६ ठाढ़े माली तहँ बिनवत हैं दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ॥ ऊदन आये हैं मोहवे ते चन्दनबाग डरी कटवाय २७ कहा न माना क्यहु मालीका ओ महराज पिथौराराय ॥ सुनिकै बातें ये माली की चौंड़ा धाँधू लीन बुलाय २८ कहि समुझावा तिन दूननते यहु महराज पिथौराराय ॥ जितने आये हैं बगिया में सबकी कटा देउ करवाय २६ इतना सुनिकै चौंड़ा धाँधू दूनों लीन फौज सजवाय ॥ चढ़ि इकवन्ता भौंरानँदपर दूनों कूच दीन करवाय ३० भारीलश्कर इत लाखनि का उत यहु गयो चौंड़ियाआय ॥ चन्दन छकड़ा चौंड़ा घेरे औ यह बोला भुजा उठाय ३१ कौन बहादुर है मोहवे मा चन्दनबाग लीन कटवाय ॥ हुकुम पिथौरा का नाहीं है लकड़ी एक यहाँ से जाय ३२ सुनिकै बातें ये चौंड़ा की सम्मुख गये बनाफरराय ॥ हमीं बहादुर हैं मोहवे के चन्दनबाग लीन कटवाय ३३ मोहिं ठकुरानी बेला रानी मोहवे वाली दीन पठाय ॥ सच्ची ह्वैहै लै ब्रह्मा को चौंड़ा साँच दीन बतलाय ३४