आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचन्दनबागकेरमेदान । ५८७ ३ पारस पत्थरहै मोहबेमा लोहा छुवत सोन हैजाय ॥ राजपाट लै सब मोहबेकै तुमसुखभोगकरोअधिकाय ११ इतना सुनिकै बेला बोली मानो साँच बनाफरराय॥ जल्दी जावो तुम दिल्लीको चन्दनबाग कटावो जाय १२ बिना पियोरे इक प्रीतम के सबसुखनरकसरिस दिखराय ॥ नाशकरनको हम उपजीर्थी दूनों बंश डरे मरवाय १३ अब सुखसोवैं कस मोहबेमा दिल्ली जाउ बनाफरराय ॥ इतना सुनिकै ऊदन बोले बेला साँचदेयँ बतलाय१४ अब नहिं जावैं हम दिल्लीको कीन्हे कोप पिथौराराय ॥ जान आपनो सबको प्यारो जलथल जीवजन्तुजेमाय १५ पगिया अरझी नहिं बगिया में सोई चन्दनदेयँ मँगाय ॥ औरो चन्दन बहु दुनिया में सोकहुछकरनलवों लदाय १६ पै अब दिल्ली को जैहौं ना बेला साँच देउँ बतलाय ॥ इतना सुनिकै बेला बोली मानो कही बनाफरराय १७ शाप तड़ाका अब मैं देहौं ऊदन तुरत भस्म हैजाय ॥ बातें सुनिकै ये बेला की कम्पितभयो लखुरवाभाय १८ लाखनि बोले तब ऊदन ते चंदन चलो देयँ कटवाय ॥ आखिर देही यह रहिहै ना अब यश लेउ बनाफरराय १९ इतना सुनिकै ऊदन बोले साँची कहौ कनौजीराय ॥ जल्दी चलिये अब दिल्लीको चन्दनबाग लेयँ कटवाय २० सम्मत करिकै ऊदन लाखनि डंका तुरत दीन बजवाय ॥ बाजे डंका अहर्तका के हाहाकार शब्दगा छाय २१ भूरी सजिकै लखराना की तुरतै गई तड़ाका आय ॥ फूलमती पद वन्दन करिकै त्यहिपर बैठ कनौजीराय २२