भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 592, कुल 618 में से

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चन्दनबागकेरमैदान। ५६१ ७ करि खलभल्ला औ हल्लाअति लल्ला देशराजका लाल॥ लड़ै इकल्ला रजपूतन ते कल्ला काटि गिरावै हाल ५६ जैसे होरी बल्ला जावै तैसे चलै खूब तलवार॥ करै दुपल्ला तहँ छातिन के नाहर उदयसिंह सरदार ६० जैसे भेड़िन भेड़हा पैठै जैसे अहिर बिडारै गाय॥ तैसे रणमा चौंड़ा मारै क्षत्रीजायँ युद्ध अलगाय ६१ चौंड़ा ऊदनकी मारुनमा द्वउदल भिन्न भिन्न हैजायाँ॥ यहु रण नाहर चौंड़ा बाँभनु बहु रणबाछु बनाफरराय ६२ कोऊ काहूते कमती ना द्वउरण परा बरोबरि आय॥ लाखनि धाँधूका मुर्च्चाभा शोभा कही बूत ना जाय ६३ लड़ै सिपाही दुहुँ तरफा ते आमाझोर चलै तलवार॥ ना मुहँ फेरैं दिल्लीवाले ना ई मोहबे के सरदार ६४ बड़ी लड़ाई भै बगियां में चौंड़ा ऊदन के मैदान॥ कायर भागे दुहुँ तरफा ते अपने अपने लिये परान ६५ लश्कर भाग्यो पृथीराज का जीत्यो कनउजका सरदार॥ लादिकै छकरनमें चन्दन को चलिभाउदयसिंहतहिव्हार ६६ बाजत डंका अहर्तंका के लाखनि कूचदीन करवाय॥ पार उतरि कै श्री यमुना के तम्बुन फेरि पहुँचे आय ६७ लाखनि ऊदन दोऊ ठाकुर बेलै खबरि जनाई जाय॥ यह अलबेला बेला रानी अनमन उठी तहाँ ते धाय ६८ दीख्यो छकरा फिरि चन्दनका बोली सुनो बनाफरराय॥ गीले चन्दन ते सरि है ना सूखो चन्दन देउ मँगाय ६६ बारह खम्भा हैं दिल्ली मा जहाँ दरबार पिथौरा क्यार॥ ते लै आवो तुम जल्दी अब ठाकुर उदयसिंह सरदार ७०

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