भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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माड़ोका युद्ध । ७५ २७ छूटि सुमिरनी गै देवनकै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥ रानी कुशला के महलन में योगी बने बैठि सरदार ५ अथ कथाप्रसंग ॥ रानी बोली तब योगिनते हमको भजन सुनावो गाय ॥ सुनिकै बातें ये रानी की सय्यद खँझड़ी लीन उठाय १ लइ इकतारा मलखे ठाढ़े आल्हा डमरू रहे घुमाय ॥ बजै सरंगी भल देवाकै झुकिकुकिनचैउदयसिंहराय २ ता ता थे ई ता ता थे ई मलखे हाथन रहे बताय ॥ भाव बतावै कमर झुकावै थिरकति फिरै लहुरवाभाय ३ कबौं बँसुरिया धरि ओठनमाँ ऊदन बहुत निकारै राग ॥ देखि तमाशा सब योगिन का रानी बड़ा कीन अनुराग ४ मोती मँगायो फिरि थाराभरि औ योगिनका दीन दिवाय ॥ भरिकै मूठी तिन मोतिन का सूंघन लाग लहुरवा भाय ५ कौन रूख माँ ई उपजंत हैं रानी हमैं देउ बतलाय ॥ सुनिकै बातें ये ऊदन की रानी मनै रही पछिताय ६ कौन तपस्या खंडित ह्वैगै बारे डार्यो मूड़ मुड़ाय ॥ मोती समुंदर में पैदा हैं केहू रूख न लागैं भाय ७ सुनिकै बातें ये रानी की ऊदन मोती दीन फैलाय ॥ हीरा मोती जो हम बाँधैं मारग लेवैं चोर छिनाय ८ रानी मल्हना मोहबे वाली त्यहि दै डरयो नौलखाहार ॥ तैसि निशानी जो ह्याँ पावैं योगी खुशी होयँ तब द्वार ६ सुनिकै बातें ये योगिन की रानी कहा वचन हर्षाय ॥ करो तमाशा तुम महलन में तुमको हार देउँ मँगवाय १० बेटी बिजैसिनि है अंटापर रूपा बाँदी लाउ बुलाय ॥