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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

माड़ोका युद्ध । ७५ २७ छूटि सुमिरनी गै देवनकै शाका सुनो शूरमन क्यार ॥ रानी कुशला के महलन में योगी बने बैठि सरदार ५ अथ कथाप्रसंग ॥ रानी बोली तब योगिनते हमको भजन सुनावो गाय ॥ सुनिकै बातें ये रानी की सय्यद खँझड़ी लीन उठाय १ लइ इकतारा मलखे ठाढ़े आल्हा डमरू रहे घुमाय ॥ बजै सरंगी भल देवाकै झुकिकुकिनचैउदयसिंहराय २ ता ता थे ई ता ता थे ई मलखे हाथन रहे बताय ॥ भाव बतावै कमर झुकावै थिरकति फिरै लहुरवाभाय ३ कबौं बँसुरिया धरि ओठनमाँ ऊदन बहुत निकारै राग ॥ देखि तमाशा सब योगिन का रानी बड़ा कीन अनुराग ४ मोती मँगायो फिरि थाराभरि औ योगिनका दीन दिवाय ॥ भरिकै मूठी तिन मोतिन का सूंघन लाग लहुरवा भाय ५ कौन रूख माँ ई उपजंत हैं रानी हमैं देउ बतलाय ॥ सुनिकै बातें ये ऊदन की रानी मनै रही पछिताय ६ कौन तपस्या खंडित ह्वैगै बारे डार्यो मूड़ मुड़ाय ॥ मोती समुंदर में पैदा हैं केहू रूख न लागैं भाय ७ सुनिकै बातें ये रानी की ऊदन मोती दीन फैलाय ॥ हीरा मोती जो हम बाँधैं मारग लेवैं चोर छिनाय ८ रानी मल्हना मोहबे वाली त्यहि दै डरयो नौलखाहार ॥ तैसि निशानी जो ह्याँ पावैं योगी खुशी होयँ तब द्वार ६ सुनिकै बातें ये योगिन की रानी कहा वचन हर्षाय ॥ करो तमाशा तुम महलन में तुमको हार देउँ मँगवाय १० बेटी बिजैसिनि है अंटापर रूपा बाँदी लाउ बुलाय ॥

२८ आल्हखण्ड । ७६ देखि तमाशा ले योगिन का जामें जन्म सुफल है जाय ११ सुनिकै बातें महरानी की बाँदी चढ़ी अटापर धाय ॥ स्ववत जगायो सतखंडापर बाँदी बार बार शिरनाय १२ तुमहिं बुलायो कुशला रानी जल्दी चलो हमारे साथ ॥ सुनिकै बातें ये बाँदी की नायो रामचन्द्र को माथ १३ लैके डिब्बा पानन वाला कई इक वीरा लीन लगाय ॥ दुइ इक खाये मुख अपने माँ दुइ इक लीन्हे हाथ चपाय १४ चलिभै बेटी फिर अंटा ते सीढ़िन उतरि तरे गै आय ॥ रानी कुशला के महलन में बेटी तुरत पहुँची जाय १५ बीरा दीन्ह्यो बैरागिन को सो ऊदन ने डरा चबाय ॥ रूप देखिकै बघऊदन का मूर्च्छितगिरी धरणिभहराय १६ नैन बाण ऊदन के लागे सोऊ गिरे मूर्च्छा खाय ॥ देखि तमाशा रानी कुशला तुरतै गई सनाका खाय १७ योगी नाहीं तुम भोगी हौ औ छल किह्यो यहाँपर आय ॥ जल्दी बाँदी जा ड्योढ़ी पर औ करियाका लाउ बुलाय १८ बाँधिकै मुशकें सब योगिन की औ कोल्हू माँ दरों पिराय ॥ देखिविजयसिनियोगीगिरिगा यहिका पेट दरों चिरवाय १६ भुसा भरावों यहि पेटेमाँ अपने महल देउँ टँगवाय ॥ इतना सुनिकै मलखाने फिरि बोले तुरतै बचन बनाय २० छोटो योगी जो मरिहैं है महलन आगि देउँ लगवाय ॥ डारि तमाखू वीरा लाई सो योगीका दिह्यो खवाय २१ पीक लीलिगा बारो योगी मुूर्च्छा खाय गिरा भहराय ॥ लै जल छिनकन मलखे लागे तबजगि परा लहुरखाभाय २२ बेटी विजैसिनि उठि ठाढ़ी भै रानी गोद बैठिगै जाय ॥

माड़ोका युद्ध । ७७ २६ पूँछन लागी तब बेटी ते काहे बदन गयो कुँभिलाय २३ रूप देखिकै इन योगिन का उरमें गई दया फिरि आय ॥ मात पिता बारे ते मरिगे तब इन डारे मूड़ मुड़ाय २४ ठाढ़े सोचों मैं मनमें यह तबलों पाँव रपटिगा माय ॥ डारि तमाखू बीरा लायूं ताते योगी गिरा भहराय २५ पाप न लावो कछु मन अपने माता सत्य दीन बतलाय ॥ सुनिकै बातें ये बिटिया की मनमाूसत्य समझिगैमाय २६ रानी बोली फिरि योगिन ते अब तुम करो तमाशा भाय ॥ सुनिकै बातें ये रानी की नाचन लाग लखुरवाभाय २७ गावन लागे मलखाने तब धुरपद सरंगीत औ ख्याल ॥ धनि धनि माता इनकी कहिये ऐसा कहन लगीं सबबाल २८ एकते दूसरी बोलन लागी हमरी सुनो सखी तुम बात ॥ बालम हमरे जो ये होवैं ऐसो बिधी बनावै नात २९ बैठि बिजनिया इनके ढोरैं मुख में सखी खवावैं पान ॥ सुफल जन्म आपन हम मानैं मानो सखी बचन परमान ३० तीसरि बोली फिरि आली सों आली करो बचन ममकान ॥ रूप उजागर सब गुणआगर योगीसकलगुणनिकेखान ३१ हमहूँ मोहिन इन योगिन पर मानो सखी बचन तुम साँच ॥ धड़कै आली म्वरि छाती अब औजरिहिनबिरहकीआँच३२ चौथी बोली का तुम बोलो हमरे लगे करेजे बान ॥ तीखे नैना हैं योगिन के मानो अबै उतारे शान ३३ पँचयीं बोली का तुम बोलो सखियो सबै गइउ बौराय ॥ कबहुँक पावैं हम पलँगा पर तौ बैकुण्ठ धामको जायँ ३४ छठयीं बोली फिरि सखियन सों हमनिज जियकी देयँबताय ॥

३० आल्हखण्ड । ७८ हम सुखपावैं इन योगिन सँग चाहौ भीख मागिकै खायँ ३५ सतयीं बोली का तुम बोलो जो यह लिखा होत कर्त्तार ॥ हमहूं होइत क्यहु योगी घर तब ये होते मोरि भतार ३६ अठयीं बोली का तुम बोलो याही लिखा रहै कर्त्तार ॥ नैनन देखै मन सों मोहै ताको जानो पूर भतार ३७ नवयीं बोली का तुम बोलो तुम्हरे खाउँ पूत औ भाय ॥ तुम्हरे सबके ई पति होवैं हमका कौन दई लैजाय ३८ दशयीं बोली तब रिस करिकै राँड़ो अबना करो चवाउ ॥ देखो तमाशा तुम योगिन का बातन काह घरे लैजाउ ३६ सुनिकै बातैं त्यहि दशयीं की सखियां सबै गईं शरमाय ॥ जितनी नारी गढ़माड़ो की सो योगिन पर गईं लुभाय ४० दिह्यो रुपैया केहु योगिन का केहू दीन मोतिन का हार ॥ रानी कुशला वैरागिन को तुरतै दीन नौलखाहार ४१ चलिभे योगी तब महलन ते फाटक ऊपर पहुँचे जाय ॥ बेटी बिजैसिनि तहँ जल्दी सों ऊदन पास पहुँची आय ४२ पकरिकै बाहू दोउ ऊदन की औ यह बोली बचन सुनाय ॥ मैं पहिचानति त्वाहिं ऊदन है नाहक डारयो मूड़ मुड़ाय ४३ योगीके बालक तुम आहिवना आहिव देशराज के लाल ॥ जल्दी चलिदे अन्वरे महलन में नाहीं तोर पहुँचा काल ४४ सुनी बिजैसिनि की ई बातें बोला तुरत लहुरखा भाय ॥ कहँना दीख्यो तुम ऊदन का साँचे हाल देउ बतलाय ४५ सुनिकै बातें बघऊदन की बोली तुरत बिजैसिनि बैन ॥ अभई लड़का जो माहिल का देखा तासु ब्याह में नैन ४६ हमहूं न्याते गईं सिरउँज माँ तहँ तुम गये बराती भाय ॥

माड़ोका युद्ध । ७६ ११ पाग बैंजनी शिरपर बाँधे ठाढ़े रहौ बनाफरराय ४७ धक्का मार्यो म्वारि छाती मा चोली मसकि गई त्यहितॉय ॥ तब हम चितई दिशितुम्हरीका औ यह मनै लीन ठहराय ४८ ब्याही जैवै की ऊदन सँग की मरिजाव जहरको खाय ॥ इतना सुनिकै ऊदन चलिभे अंटा उपर पहुँचे जाय ४६ सेज बिछायो सो जल्दी सों तब यह कह्यो बनाफरराय ॥ क्वारी कन्या की सेजिया पर ऊदन कबों धरै ना पाँय ५० मूड़ मुड़ावा तुम्हरे कारण घर घर अलख जगावा आय ॥ पहिले अरुझे को सुरझावो पाछे सेज बिछायो जाय ५१ हाल बताओ सब माड़व का जासों लेयँ बापका दायँ ॥ चोरी चोरा लैजैबै ना साँचेहाल दीन बतलाय ५२ तेहाराखी रजपूती का गुदड़ी अबों परी तलवार ॥ हमको चाहो हाल बताओ नहीं तजो प्रीति का तार ५३ सुनिकै बातैं बघऊदन की बोली तुरत बिजैसिनि नारि ॥ किरिया करिल्यो श्रीगंगा की याही लगे मोरि है आरि ५४ सुनिकै बातें ये कन्या की तुरतै खैंचिलीन तलवार ॥ बिना बियाहे तुमका छाँड़ों तो मोहिं लागै पाप अपार ५५ सुनिकै बातें उदयसिंह की कन्या कह्यो बचन शिरनाय ॥ किला कठिन है लोहागढ़का तहँ नाजयो बनाफरराय ५६ पनिहासोते लों खंदक हैं जम्बा करै तहाँ को राज ॥ गर्भ गिराविनि - तहँ तोपै हैं वहँ नहिं सरै तुम्हारोकाज ५७ किला कठिन है फिरिझांसीका जहँ पर रहै करिंगाभाय ॥ किला तीसरे सूरज भैया तहौं न जयो बनाफरराय ५८ तोप लगावो बबुरी बनमा तौ मिलिजाय बापका दायँ ॥

३२ आल्हखण्ड । ८० बात हमारी पै भूल्यो ना साँचिकिह्यो उदयसिंहराय ५६ बिना बियाहे तुमका जावैं हमका लौटि भगौती खायँ ॥ आल्हा देखें ह्याँ गलियनमा कहूं न दीख लघुरवा भाय ६० ठाढ़े सोचन आल्हा लागे मनमा बारबार पछिताय ॥ मुख दिखलैहौं कस मल्हनाको राजै काह सुनैहौं जाय ६१ द्यावलि माता जो सुनि पैहैं तौ मरिभायँ पुत्र के घाय ॥ सिढ़ियन सिढ़ियन ते नीचे है ऊदन तुरत पहुँचे आय ६२ देखिकै ऊदन को आल्हा ने तुरतै छाती लीन लगाय ॥ देर लगाई कहँ भाई तुम सो मोहिं हाल देबबतलाय ६३ सुनिकै बातें ये आल्हा की बोले उदयसिंह बलवान ॥ ब्यटीबिजैसिनि रनिकुशलाकी सो वह हमें गई पहिंचान ६४ ब्याह हमारे सँगमा कीन्ह्यो हमते कसम लीन करवाय ॥ हाल बतायो सब माड़ो का दादा सत्य दीन बतलाय ६५ सुनिकै बातें ये ऊदन की आल्हा बोले वचन रिसाय ॥ ब्याह न करिहैं हम वैरी घर मानो कही उदयसिंहराय ६६ जब सुधिकरिहैं निजघर केरी स्वावत हनै त्वरे तलवारि ॥ मरे केकई सों दशरथ हैं अजहूं करें दुर्दशा नारि ६७ इतनी सुनिकै मलखे बोले दादा मानो कही हमार ॥ पहिले बदला लेउ बाप को पाछे फेरि किह्यो तकरार ६८ इतनी सुनिकै पांचो चलिभे लोहागढ़ पहुँचे आय ॥ देखिकै फाटक लोहागढ़ को आल्हासोचिसोचिरहिजायँ ६६ कठिन मवासी गढ़माड़ो है कैसे मिलै बाप का दायँ ॥ बातें सुनिकै ये आल्हा की बोले तुरत बनाफरराय ७० कृपा जो होई नारायण की तौ मिलि जई बापका दायँ ॥

मांडोका युद्ध । ८१ ३३ कायर सोचैं इन बातन का दादा तुम्हरी ख्वचै बलाय ७१ राजा जम्बै की ड्योढ़ी माँ योगी सबै पहुंचे जाय ॥ मलखे बोले दरवानी सों हमरी खबरि जनावो जाय ७२ योगी आये बंगाले ते आगे हरद्वार को जायँ ॥ सुनिकै बातें ये योगिन की बोला द्वारपाल मुसुकाय ७३ जैसे पहिले द्वै आयेते तैसे फेरि पहूंचोजाय ॥ राजा जम्बै की ड्योढ़ीमाँ योगिनअलखजगायोआय ७४ लागि कचहरी है जम्बैकी भारी लाग राजदरबार ॥ बैठक बैठे सबक्षत्री हैं एकते एक शूरसरदार ७५ करिया बैठो तहँ दाहिने है टिहुनन धरे नांगितलवार ॥ बाँयें हाथे किह्यो बन्दगी यहद्यावलिका राजकुमार ७६ देखिकै करिया राहुट हैगा नैना अग्नि बरण द्वैजायँ ॥ करिया देख्यो दिशियोगिनके कारेनाग ऐस मन्नाय ७७ बँयें हाथते किह्यो बन्दगी योगी काहगयो बौराय ॥ सम्मुख हमरे अब आवोना नाहीं सबैदेउँ पिटवाय ७८ सुनिकै बातें ये करियाकी बोला उदयसिंह ज्यहिनाम ॥ दहिने करसों जपें सुमिरनी दहिने लेयँ रामकानाम ७६ तौने करसों करें बन्दगी हमरो योगभंग द्वैजाय ॥ सुनिकै बातें ये योगीकी बोला तुरत करिंगाराय ८० सच्चे गुरुके तुम चेलाहौ योगी सच्चा ज्ञान तुम्हार ॥ तान सुनावो म्वरेमहलन्में योगी मानो कही हमार ८१ लीन सरंगी को देवा तब सय्यद खँझरी लीनउठाय ॥ लै इकतारा मलखे ठाढ़े आल्हा डमरू रहे घुमाय ८२ जैसे जङ्गल नचैमुरैला तैसे नचै लङ्गरवाभाय ॥

३४ आल्हाखण्ड । ८२ जैसी रागिनी मलखेगावैं देवा तैसे देय बजाय ८३ बजै बँसुरिया भल ऊदनकी थेई थेई रहे मचाय ॥ ताताथेई ताताथेई मुखसों बोलैं अँगुरिन भावबतावतजायँ ८४ सवैया ॥ मोहिगयो माड़व शिरताज सो राजके काज सबै विसराये । तानके वान नथा करिया अरिऊपर चित्तको सोउ लुभाये ॥ होनी चहै सो होन भलीविधि ज्ञान औ बुद्धि न होत सहाये । तानके वानलगै मलखानके ज्वानगिरैं ललिते मुरझाये ८५ रय्यति मोही सब माड़ो की मोहे बाल वृद्ध औ ज्वान ॥ राजा बोला तब माड़व का योगिउ वचनकरो परमान८६ लाखापातुरि म्वरे महलन में ताकी तानसुनी हम भाय ॥ की हम मोहे त्वरि तानन में योगी सत्य दीन बतलाय८७ सुनिकै बातें महाराजा की तुरतै ब्वला लहुरवा भाय ॥ तुम बुलवावो त्यहि पातुरिको हमको तान सुनावैआय ८८ हुकुम लगायो महाराजा ने लाखा तुरत पहुंची आय ॥ तबला गमके ब्रजवासिनि के औध्वनिगई मंजीरनछाय ८६ लिह्यो सरंगी को भँडुवा तब लाखानचनलागि त्यहिठायाँ ॥ को गति वरणै तब लाखाकै हमरे बूत कही ना जाय ६० जब दिशिआई वह योगिन के तब फिरि ब्वलालहुरवाभाया। हुकुम जो पावै हमे दादा को याको हार देयँ पहिराय ६१ आल्हा बोले तब ऊदनते भैया मानो कही हमार॥ पहिरे देखी जम्बैराजा लाखा गले नौलखाहार ६२ मूड कटाई सब योगिन के भैया काहगयो बौराय ॥ कही न मानी सो आल्हाकी ताको हार दीन पहिराय ६३

माड़ौका युद्ध । ८३ ३५ हरवा देखत लाखापातुरि तुरतै हाल गई सब जानि ॥ ईतो लड़का हैं द्यावलि के अपनो वदन छिपायो आनि ६४ किह्यो इशारा अस योगिनको ज्यहिमाँ चले बेगिही जायँ ॥ जो कहुँ जानी जम्बै राजा तुरतै डारी इन्हें मराय ६५ जानि इशारा को योगी गे तुरतै ब्वला लहुरवा भाय ॥ बारह बरसैं तुमका हइगें अब हम मोहबा देव दिखाय ६६ बिदा मांगिकै महराजा सों योगी चले तुरतही धाय ॥ योगी पहुँचे पचपेड़न तर लाखा लीन्ह्यो हार छिपाय ६७ उड़ा दुपट्टा जब बायू सों चमकन लाग नौलखा हार ॥ चमकत दीख्यो त्यहि हरवाको राजा माड़ो का सरदार ६८ जम्बै बोलै तब लाखा ते सांचे हाल देव बतलाय ॥ हरवा दीन्ह्यो को तुम को है हमरे धीर धरा ना जाय ६६ हाथ जोरिकै लाखा बोली यह तकसीर माफ़ ह्वैजाय ॥ राह चलन्ते योगी आये हम को हार गये पहिराय १०० इतना सुनिकै राजा जम्बा तुरतै गयो सनाकाखाय ॥ करिया बेटा ते बोलत भा अब तुम रंगमहलको जाय १०१ हार नौलखा मोहबे वाला सो मोहिं बेगि दिखावै आय ॥ इतना सुनिकै करिया चलिभा पहुँचा रंगमहल में जाय १०२ आवत दीख्यो जब करिया को कुशला मिली तुरतही आय ॥ कौन काम को तुम आये हौ करिया हमैं देउ बतलाय १०३ हार मँगाय देउ मोहबे का राजै तुरत दिखावैं जाय ॥ लरी टूटिगय त्यहि हरवा कै सो पटवा घर दीन पठाय १०४ टूट्यो टाटो जस कछु होवै तस तुम हमें देव मँगवाय ॥ थर थर कांपी महरानी तब बोली कछू कही ना जाय १०५

३६ आल्हखण्ड । ८४ योगी आये म्वरे महलन में तिनका हारदीन पहिराय ॥ सुनिकै बातें ये माता की राजै खबरि जनायो आय १०६ धोखे योगिनके भूल्यो ना वै राजन के राजकुमार ॥ घरघर लूटा तिन माड़ो भल वै लैगये नौलखाहार १०७ सुनिकै बातें ये करिया की जम्बै हुकुमदीन फरमाय ॥ पकरिलय आवोतुम योगिनको हमरी नजर गुजारोआय १०८ उनहीं पाँयन करिया चलिभो अपनी लिहे ढाल तलवार ॥ जायकै पहुँचा पचपेड़ा तर गरई हांकदीन ललकार १०६ तुम्हें बुलावत महराजा हैं योगिउ चलो हमारे साथ ॥ लौटैकेरी म्वहिं आज्ञा ना हमरे सत्य सुमिरनी हाथ ११० सुनिकै बातें ये योगिनकी करिया खैंचिलई तलवारी ॥ पाँव अगाड़ी को डारयो जो खण्डाकरों तुरतही चारि १११ बातें सुनिकै ये करिया की ऊदन खैंचिलीन तलवारी ॥ धोखे योगी के भूले ना नहिंशिरकाटिदेउँभुइँडारि ११२ आल्हा मलखे देवा सय्यद इनहुन खैंचिलई तलवार ॥ दौरे करियाके ऊपर सब गरई हांकदेत ललकार ११३ करिया सोच्यो अपने मनमाँ ये नहिं योगिनकेर कुमार ॥ ये हैं लड़िका मोहवे वाले एक ते एक शूरसरदार ११४ जो हम बोलैं इन योगिनते तौ फिरिजाय प्राणपर आय ॥ यहै सोचिकै करिया लौटौ जम्बाढिगै पहुँचा जाय ११५ हाथ जोरिकै करिया बोलो दादा मानो कही हमार ॥ धोखे भूल्यो ना योगिनके वै द्यौवलिके राजकुमार ११६ सुनिकै बातें ये करिया की बोला माड़ोका सरदार ॥ तुरत नगड़ची को बुलवावो फौजैं सबै होयँ तय्यार ११७

माड़ोका युद्ध । ८५ ३७ योंगी पहुँचे त्यहि तम्बू में जहाँ पर रहें देवलदे माय ॥ जितनी गाथा रहै माड़ो की ऊदन सबै गये तहँ गाय ११८ सुनिकै बातें बघऊदन की माता बड़ी खुशी हैजाय ॥ नदी नर्मदा के ऊपर माँ तम्बू बैठि बनाफरराय ११६ ऊदन बोले तहँ आल्हा ते दादा मानो कही हमार ॥ बरह कोस को है बबूरीबन ह्याँपर रहै सदा अँधियार १२० गम्य सिपाहिन कै नाहीं है ह्याँपर काह करें असवार ॥ हुकुम जो पावैं हम दादा को तौ कटवाय करें उजियार १२१ सुनिकै बातें ये ऊदन की आल्हा हुकुम दीन फर्माय ॥ चला कुल्हाड़ा तब बबुरीबन लागे गिरन वृक्ष अरराय १२२ गा हरकारा तब टोंडरपुर टोंडरमलैं जुहारो जाय ॥ राजा आये हैं मोहबे के ते बबुरी बन रहे कटाय १२३ सुनिकै बातें ब्यटा अनूपी धावन तुरत लीन बुलवाय ॥ जाय नगड़ची ते बोलौ तुम पुरमें डौंडी देय बजाय १२४ खबर नगड़ची सो पावत खन तुरतै डौंडी दीन बजाय ॥ चला दरोगा हाथिनवाला तिनकी साँकरिदीनछुराय१२५ हथी महावत हाथी लैके तिनका जमीं दीन बैठाय ॥ डरी अँबारी तिन हाथिन पर ऊपर हौदा दीन धराय १२६ चांदी हौदा क्यहु हाथी पर सोने कलश धरे सजवाय ॥ डारिकै रस्सा रेशमवाले तिनकोतुरतदीनकसाय१२७ सजिगे हाथी जब टोंडरपुर घोड़ा होन लागि तय्यार ॥ हरियल मुश्की ताजी तुरकी नकुलासब्जाघोंड़अपार१२८ घोड़ा सजिगे सब जल्दी सों तिनपर होन लाग असवार ॥ लाँग चढ़ाये सब धोतिनकी हाथम लिहे ढाल तलवार१२६

३८ आल्हाखण्ड । ८६ कउ कउ घोड़ा हिरन चालपर कउ कउ मोर चालपर जायँ ॥ कावा घूमैं कउ कउ घोड़ा कउ कउ सर्पटरहा चलाय १३० सजा रिसाला घोड़नवाला पैदर होन लागि तय्यार ॥ झीलम वख्तर पहिरि सिपाही हाथम लीन ढाल तलवार १३१ मेघागर्ज्जनि बिजुली तड़पनि तोपैं सबै भईं तय्यार ॥ मारू डंका बाजन लागे बिप्रन कीन वेद उच्चार १३२ रणकी मौहरि बाजन लागी घूमन लागे लाल निशान ॥ गर्द उड़ानी है पृथ्वी में छाई रई तुरत असमान १३३ और बयरिया डोलन लागी औरै होन लाग व्यवहार ॥ सजा डलरुवा यहु अनुपी का ज्यहिकानेकुनलागी बार १३४ लोग चढ़ाई त्यहि रेशम की कम्मर दुइ बांधी तलवार ॥ अगल बगल पर दुइ पिस्तौलैं दहिने हाथे लीन कटार १३५ बाँयें भाला नागदवनिका दहिने परी गैंडकी ढाल ॥ सुरखा घोड़ाको मँगवायो मनमेंसुमिरयोअवधसुवाल १३६ माथ नवायो श्रीगणेश को औ सुर्यनको कीन प्रणाम ॥ सुमिरि भवानी शिवशंकर को लीन्ह्योकृष्णचन्द्रकोनाम १३७ टोंडरमल दहिने पर आये सब्जा घोड़े पर असवार ॥ कूच के डंका बाजन लागे सबदलतुरतभयोहुशियार १३८ कूच करायो टोंडरपुर ते बबुरी बनै पहुंचे आय ॥ सुनि सुनि डंकाके शब्दन को चौंका तुरत लहुरवाभाय १३६ हुकुम लगायो निज फौजन में क्षत्री तुरत भये हुशियार ॥ झीलमबख्तर पहिरिसिपाहिन हाथम लई ढाल तलवार १४० घोड़ा मनोहरा की पीढ़ीपर देवा तुरत भयो असवार ॥ चढ़ा बेंदुला की पीढ़ीपर यहुद्यावलिकोराजकुमार १४१

माड़ोका युद्ध । ८७ ३६ बेटा अनूपी आगे ह्वैकै आयो जहाँ उदयसिंहराय ॥ कहाँ से आयो औ कहँ जैहौ आपनहाल देउ बतलाय १४२ कौन बहादुर अस दुनियाँ माँ जो बबुरीबन रहा कटाय ॥ बेटा अनूपी की बातें सुनि तुरतै ब्वला बनाफरराय १४३ फौज हमारी माड़ो जैहै यहु बनबड़ा घना है भाय ॥ हैं परिमालिक जो मोहबे के जिनकाकही चंदेलाराय १४४ हमतो नौकर तिन घर केरे हमरो नाम उदयसिंहराय ॥ बेटा अनूपी तब समुझायो ऊदन लौटि मोहोबे जाय १४५ इतनी सुनिकै ऊदन बोले क्षत्री मानो कही हमार ॥ घोड़ा पपीहा लाखा पातुरि औ मँगवाउ नौलखा हार १४६ दै पचशब्दा हाथी देवो बिजमा ब्याह देउ करवाय ॥ मूड़ काटिकै नृपजम्बा का हमरी नजरि गुजारो आय१४७ बेटा अनूपी सुनि रिसहा भा औ क्षत्रिन ते कहा सुनाय ॥ जान न पावैं मोहबे वाले टेंटुवाटायर लेउ छिनाय १४८ बेटा अनूपी की बातें सुनि रिसहा भयो बनाफरराय ॥ तुरत दरोगा को ललकार्यो चरखिन तोपैं देउ चढ़ाय १४६ बत्ती दैद्यो मोरि तोपनमाँ इन पाजिन को देउ उड़ाय ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की गोलंदाज पहुंचे आय १५० गोला डारे तिन तोपनमाँ सुम्मा मारैं फेरि चलाय ॥ धरिकै रंजक फिरि प्यालन में ऊपर बत्तीदई लगाय १५१ सवैया ॥ गोलाचले तब ओलासमान मनो घनसावनको चढ़िआयो। भूमि अकाश न सूझिपरै धुँवना दोउफौजनमें अतिछायो॥ घावपरै बहुहाथिन वाजिन ऊंटन के दलको विचलायो।

४० आल्हाखण्ड । ८८ कौन कहैग तिक्षत्रिनकी ललितपर जात कछूनहिंगायो १५२ पहिले मारुइ भइँ तोपन की पाछे चलनलागि तलवार ॥ पैदरि पैदरि का झुरमुटभा औ असवारसाथ असवार १५३ चारिघरीभरि चली सिरोही बीरन रहे बीर ललकार ॥ भाला बरछिन की मारुइ भइँ कोताखानी चलीं कटार १५४ बड़ी मारुभइ बबुरीवनमाँ जूझनलागि सुघरूवा ज्वान ॥ कटि कटि शिरधरतीपर गिरिगे सबकाछूटिगयोअभिमान१५५ खट खट खट खट तेगा बोलै रणमाँ छपक छपक तलवार ॥ सन सन सन सन गोलीबरसैं खन खन कड़ाबीनकी मार१५६ मर मर मर मर ढालैं बोलैं ठन ठन भालन को झनकार ॥ झल्झल्झल्झल्छूरीझलकैं बोलैं मारु मारु सब मार १५७ मूड़न केरे मुड़चौरा भे औ रुंडन के लाग पहार ॥ कटि भुजदंडैं गईँ क्षत्रिन की कल्लाकटे बलेरन क्यार १५८ रकतकिनदियातहँबहिनिकरीं जूझे बड़े बड़े सरदार ॥ बहे बार तहँ जायँ क्षत्रिन के जैसे नदिया बहै सिवार १५६ गोहैं ऐसी भुजदण्डैं तहँ ढालैं कछुवा सम उतरायँ ॥ छुरी कटारी मछली मानो औ धड़ नैयासमबहिजायँ १६० काककंक तिन ऊपर बैठे मानो नदिया ख्यलें नेवार ॥ बेटा अनूपी आगे आयो सुरखा घोड़े पर असवार १६१ औ ललकार्यो बघऊदन को ओ द्यावलि के राजकुमार ॥ मेरे सिपाहिन के का पड़हौ ऊदन तोरिमोरि तलवार१६२ बेटा अनूपी की बातें सुनि भा मन खुशी लहुरवा भाय ॥ ऊदन बोले त्यहि क्षत्री ते तुम्हरी अवधिपहुँची आय १६३ पहिले कैले समरभूमि में नाहर टोंडर के सरदार ॥

माड़ौका युद्ध । ८६ ४१. पहिलै लोहै तुम्हरी राखैं फिरिकचलोहियादेखुहमार १६४ सुनिकै बातें ये ऊदन की अनुपी भाला लीन उठाय ॥ दूनों अँगुरिन भाला तौलै कालीनाग ऐस मन्नाय १६५ छुटिगा भाला जो हाथेते कम्मर मचा ठनाका जाय ॥ घोड़ा बेंदुला बायें दैगा औबचिगयो लहुरवाभाय १६६ हँसिकै बोल्यो तब अनुपीते यहु रणबाघु उदयसिंहराय ॥ दूधु लरिकई माँ पायो ना तुम्हरे मरे चढ़ै ना घाय १६७ अब तुम सुमिरौ यहिसमयामाँ जो गाढ़े माँ होयसहाय ॥ वार हमारी ते बचिजायो घरमाँ छठी धरायौ जाय १६८ अब ना बचिहौ रणखेतनमें अनुपी सम्हरि होउ हुशियार ॥ इतना कहिकै बघऊदन ने नंगी खैंचिलीन तलवार १६६ मरी सिरोही तब अनुपी के धरती गिरयो भरहराखाय ॥ मरिगा अनुपी रणखेतन माँ टोंडरमलौ पहुँचा आय १७० औ ललकारा बघऊदन का अब तुम खबरदार ह्वैजाय ॥ धोखे अनुपी के भूल्यो ना अबहीं सरगदेउँपहुँचाय १७१ खैंचि सिरोही लइ कम्मर से औ ऊदन पर दई चलाय ॥ वार ढालपर ऊदन लीन्ह्यो टोंडर हाथ मूठि रहिजाय १७२ टूटि सिरोही गै टोंडर कै तब मनसोचभयो अधिकाय ॥ ऐँड़ लगायो फिरि बेंदुलके टोंडरपास पहुँच्यो आय १७३ ढाल कि औझड़हनिकै मारयो औ घोड़ाते दियो गिरायं ॥ बाँधिकै मुशकें फिरि टोंडर की लशकरतुरतदीनपहुँचाय १७४ मारु बन्दभै तब हुँवना पर सायंकाल पहुँचा आय ॥ तारागण सब चमकन लागे संतन धुनी दीन परचाय १७५ परे आलसी निज निज शय्या घों घों कण्ठ रहा घरांय ॥

४२ आल्हखण्ड । ६० माथ नवावों पितु अपने का जिनमोहिंविद्यादीनपढ़ाय १७६ करों तरंग यहाँसों पूरण तव पद सुमिरि भवानी कन्त ॥ राम रमा मिलि दर्शन देवो इच्छायही मोरि भगवन्त १७७ इति श्रीलखनऊनवासि (सी,आई,ई) मुंशी नवलकिशोरआत्मज बाबू प्रयागनारायणजीकीआज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गत पँड़रीकलां निवासि मिश्रवंशोद्भवबुधकृपाशङ्करसूनु पं० ललिताप्रसादकृत अनूपीवधोनामत्त्रतीयस्तरंगः ३ ॥ कवित्त ॥ चन्द्रभालमुण्डमाललोचनविशाललाल ओढ़ेतनवाघखाल पोढ़ेभक्तपाल है । मोहमार दामजार बैलके सवार यार मोर रखवारहोहु नाम जक्तपाल है ॥ सोहैं शीशगंगा फिरै भंगके उमंगा नंगा संग अर्द्धांगा गौरि दीननको घालहै । ध्यावैं औमनावै गावैं ललितहमेश शेष पावैं नहिं पार शिवकालहूको काल है १ सुमिरन ॥ दुर्गामाता तुमका ध्यावों नितप्रति दुर्गापाठ सुनाय ॥ तुम असिमाता को त्रिभुवनमाँ ड्योढ़ी जासु जुहारों जाय १ भयू यशोदाके पेटे सों त्रिभुवन जान तुम्हारी गाथ ॥ तुम्हरे भाई कृष्णचन्द्र भे त्रिभुवनपती चराचरनाथ २ जिनकी कीरति महभारत में पर्वै रची अठारह ब्यास ॥ मथा समुन्दर गा सतयुग में पूरी तबै सबैकी आश ३ भारत मथिकै मच्छोदर सुत गीता ताते कीन प्रकाश ॥ गीता धीता जो कोउ कीन्ह्यो लीन्ह्योजिति जगतकी फाँस ४ छूटि सुमिरनी गै देवनकै शाका सुनो बनाफर क्यार ॥ जम्बै राजा जो माड़ो का सूरज लड़िहै तासु कुमार ५

माड़ोका युद्ध । ६१ ४३ अथ कथाप्रसंग ॥ गा हरकारा फिरि माड़ो को बारहदरी पहुँचा जाय ॥ बेटा जम्बै को सूरजमल तहँपर रहा रामको ध्याय १ खबरि सुनाई हरकाराने अनूपी मरण गयो सबगाय ॥ सुनिकै बातें हरकारा की मनजरिमरयो बघेलाराय २ तुरत नगड़ची को बुलवायो डंका तुरत दीन बजवाय ॥ हाथी घोड़ा औ तोपन को बबुरीबन का दीन हँकाय ३ हरियल घोड़ाकी पीठी पर आपो फांदिभयो असवार ॥ माथ नायके श्रीगणेश को औ मन सुमिरयो नन्दकुमार ४ सुमिरि भवानी जगदम्बाको औ शिव रामचन्द्रको ध्याय ॥ सूरज चलिभा बबुरीबनको औ रणखेत पहुँचा आय ५ आगे लश्कर के सूरजमल गरुई हांक दीन ललकार ॥ काकी माता नाहर जायो काके जमे करेजे बार ६ को कटवावत है बबुरीबन औ को मोहबेका सरदार ॥ कौन कहावत उदयसिंह है किसने डरा अनूपी मार ७ घोड़ा बेंदुला पर टहलत रहै यहु रणबाघु लंहुरवा भाय ॥ सुनिकै बातें सूरजमल की तुरतै बोला बनाफरराय ८ हमरी माता नाहर जायो हमरे जमे करेजे बार ॥ हम कटवावत हैं बबुरीबन हमहीं डरा अनूपी मार ६ कही सुना भा जब दूनों माँ दूनों कुँवर गये अलगाय ॥ सूँड़ि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतनभाय १० बम्ब के गोला छूटन लागे धुँवना रहा सरग में छाय ॥ गोली ओलासम बरसत भइँ भन भन भन्न भन्न भन्नाय ११ छाय अँधरिया गै दिनही में औ तिलडरा भुईं ना जाय ॥

४४ आल्हखण्ड । ६२ कौंधालपकनिविजुलीचमकनि रणमाँचमकिचमकिरहिजाय१२ ऐसि सिरोही मलखाने कै ठाकुर समरधनी मलखान ॥ काटि गिरायो राजपूतन को हाथिनमारि कीन खरिहान १३ जैसे भेड़िन भेड़हा पैठे जैसे अहिर विडारै गाय ॥ जैसे भाई आसमान में चन्दै राहु गरासै जाय १४ जैसे अर्ज्जुन के देखत में कौरव फौज जाय थराय ॥ जैसे पूजे शिवशंकर के दारिद तुरतै जाय नशाय १५ तैसे मलखे ज्यहिदिशि जावैं सो गलियार परै दिखलाय ॥ मलखे केरे भइ मुर्चा में कउ राजपूत न रोकै पायँ १६ सूरजमल औ ऊदन बाँकुड़ा दोऊ करें बराबर मार ॥ बैस बराबर है दोऊ कै दोऊ समरधनी सरदार १७ गदा बनेठी दोऊ खेलें कसरत करें नटन के साथ ॥ भाला बलछी दोनों बाँधे लीन्हे कड़ाबीन दोउहाथ १८ करें पैतड़ा रण खेतन में दोऊ रहे दुहुँन ललकार ॥ हनि हनि मारैं एक एक को दोऊ लेयँ ढालपर वार १६ बड़ी लड़ाई दोऊ कीन्ह्यो मानो छुटे जँगल के बाघ ॥ हारि न मानैं कोउ कोऊ ते दोऊ बड़े लड़ैया घाघ २० खेंचि सिरोही सूरज लीन्ह्यो करिकै रामचन्द्रको ध्यान ॥ ऐंचि कै मारा बघऊदन के दोऊ हाथ सँभरिकै ज्वान २१ टूटि सिरोही गै सूरज कै खाली मूठि हाथ रहिजाय ॥ सूरज सोच्यो अपने मनमाँ हमरी मृत्यु गई नगच्याय २२ ऊदन बोल्यो तब सूरज सों मानो कही बघेलोराय ॥ कोदो देकें बाढ़ी धरायो तुम्हरे मरे चढ़ै ना घाय २३ सँभरिके बैठो अब घोड़ापर क्षत्री खबरदार है जाय ॥

माड़ोका युद्ध । ६३ ४५ वार हमारी ते बचिजाये घरमाँ छठी धराये जाय २४ यह कहि मारा तलवारी को शिरपर परी सूर्य के जाय ॥ फटिकै खुपरी दुइ . टूका भै सूरज गिरा भरहराखाय २५ सूरज गिरतै परलय हैगै लशकर तितिरबितिरहैजाय ॥ भागि सिपाही गढ़ माड़ो को जम्बै शरण पहुँचे आय २६ सुनी सिपाहिन की बातें जब राजा जम्बै उठा रिसाय ॥ हुक्म लगायो फिरि करियाको बबुरीबनै पहुँचे जाय २७ करिया बोल्यो त्यहि समया में हमरे सुनो शूर सरदार ॥ तुरत नगड़ची को बुलवावो सबियाँ फौज होय तय्यार २८ बजो नगाड़ा तब माड़ो में भादों मेघ सरिस हहराय ॥ हथी महावत हाथी लैकै तुरतै भूमि दीन बैठाय २९ चुम्बक पत्थर के हौदा धरि जिनमाँ सेल बरौंचा खाय ॥ धरी अँबारी तिन हाथिन पर हौदन कलशदीन धरवाय ३० घंटा बांधे गलहाथिन के भारी देत चलत झनकार ॥ यक यक हाथी के हौदापर दुइ दुइ बीर भये असवार ३१ तुरत दरोगा घोड़न वाला ताजी तुरकी कीन तयार ॥ नकुला सब्जा पँचकल्यानी सुर्खा सुरँगा रङ्ग अपार ३२ गंगा यमुनी डरी रकाबैं मुहँमाँ दीन लगाम लगाय ॥ डरी हयकल्लैं तिन घोड़नके रेशम तंग दीन कसबाय ३३ पुट्ठन बुट्टा रचि मेहँदी के सुम्मन नालैं दीन बँधाय ॥ पूंजी पट्ठा कसि घोड़न के तिनपर काठी दीन धराय ३४ नवल बछेड़ा घोड़शारे में ते सब बेगि भये तय्यार ॥ यक यक भाला दुइ दुइ बलछी कम्मर कसी तीन तलवार ३५ अगल बगल में दुइ पिस्तौलैं दहिने हाथे लीन कटार ॥

[Page Header] ४६ आल्हाखण्ड । ६४


बड़े सजीला जे क्षत्री थे घोड़न उपर भये असवार ३६ धरे नगाड़ा गे ऊंटन पर तोपैं होन लगीं तय्यार ॥ गर्भ गिराविनि कुँवासुखाविनि लछिमिन तोप बड़ी हहकार ३७ ते सब तोपैं रणखेतन को करिया तुरत दीन हँकवाय ॥ बजे नगाड़ा फिरि ऊंटन पर हाहाकारी शब्द सुनाय ३८ औरि बयरिया डोलन लागीं औरै होन लगे व्यवहार ॥ ढाढ़ी करखा बोलन लागे बिप्रन कीन वेद उच्चार ३६ घोड़ पपीहा पचशब्दागज कोतल कीन गये तय्यार ॥ बैठिंग हाथी करिया वाला तापर होन लाग असवार ४० छींक तड़ाका भै सनमुखमाँ पंडित बोला शकुन विचार ॥ तुम ना जावो रणखेतन को करिया माड़ो के सरदार ४१ राहु वारहें अठयें बेप्फै तुम्हरे दृष्टि शनीचर भाय ॥ घात चन्द्रमा दशयें आयो तुम ना धरो अगाड़ी पाँयँ ४२ सुनिकै बातें ये पण्डित की तुरतै बोला करिंगाराय ॥ शकुन विचारै रयत रेजा जो धरि मौर बियाहन जाय ४३ शकुन विचारैं कछु क्षत्री ना जो रण चढ़िकै लोह चबायँ ॥ कूचके डंका बाजन लागे मारू शब्द रहे हहराय ४४ रंगा बंगा शहाबाद के दोऊ घोड़न चढ़े पठान ॥ रण की मौहरि बाजन लागी घूमनलागे लाल निशान ४५ करिया चलिभो समरभूमि को मनमें श्रीगणेश को ध्याय ॥ सुमिरि भवानी शिवशङ्कर को औ सूर्यन को माथ नवाय ४६ किह्यो कीर्त्तन कृष्णचन्द्र को जिन अर्जुनकी करी सहाय ॥ दोउ पद बन्द्यो रामचन्द्र के लङ्का फते करी जिन जाय ४७ पूत अंजनी को हनुमत जो ताको बार बार शिरनाय ॥