आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
पृष्ठ 92, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ेंमाड़ोका युद्ध । ८७ ३६ बेटा अनूपी आगे ह्वैकै आयो जहाँ उदयसिंहराय ॥ कहाँ से आयो औ कहँ जैहौ आपनहाल देउ बतलाय १४२ कौन बहादुर अस दुनियाँ माँ जो बबुरीबन रहा कटाय ॥ बेटा अनूपी की बातें सुनि तुरतै ब्वला बनाफरराय १४३ फौज हमारी माड़ो जैहै यहु बनबड़ा घना है भाय ॥ हैं परिमालिक जो मोहबे के जिनकाकही चंदेलाराय १४४ हमतो नौकर तिन घर केरे हमरो नाम उदयसिंहराय ॥ बेटा अनूपी तब समुझायो ऊदन लौटि मोहोबे जाय १४५ इतनी सुनिकै ऊदन बोले क्षत्री मानो कही हमार ॥ घोड़ा पपीहा लाखा पातुरि औ मँगवाउ नौलखा हार १४६ दै पचशब्दा हाथी देवो बिजमा ब्याह देउ करवाय ॥ मूड़ काटिकै नृपजम्बा का हमरी नजरि गुजारो आय१४७ बेटा अनूपी सुनि रिसहा भा औ क्षत्रिन ते कहा सुनाय ॥ जान न पावैं मोहबे वाले टेंटुवाटायर लेउ छिनाय १४८ बेटा अनूपी की बातें सुनि रिसहा भयो बनाफरराय ॥ तुरत दरोगा को ललकार्यो चरखिन तोपैं देउ चढ़ाय १४६ बत्ती दैद्यो मोरि तोपनमाँ इन पाजिन को देउ उड़ाय ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की गोलंदाज पहुंचे आय १५० गोला डारे तिन तोपनमाँ सुम्मा मारैं फेरि चलाय ॥ धरिकै रंजक फिरि प्यालन में ऊपर बत्तीदई लगाय १५१ सवैया ॥ गोलाचले तब ओलासमान मनो घनसावनको चढ़िआयो। भूमि अकाश न सूझिपरै धुँवना दोउफौजनमें अतिछायो॥ घावपरै बहुहाथिन वाजिन ऊंटन के दलको विचलायो।