भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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मांडोका युद्ध । ८१ ३३ कायर सोचैं इन बातन का दादा तुम्हरी ख्वचै बलाय ७१ राजा जम्बै की ड्योढ़ी माँ योगी सबै पहुंचे जाय ॥ मलखे बोले दरवानी सों हमरी खबरि जनावो जाय ७२ योगी आये बंगाले ते आगे हरद्वार को जायँ ॥ सुनिकै बातें ये योगिन की बोला द्वारपाल मुसुकाय ७३ जैसे पहिले द्वै आयेते तैसे फेरि पहूंचोजाय ॥ राजा जम्बै की ड्योढ़ीमाँ योगिनअलखजगायोआय ७४ लागि कचहरी है जम्बैकी भारी लाग राजदरबार ॥ बैठक बैठे सबक्षत्री हैं एकते एक शूरसरदार ७५ करिया बैठो तहँ दाहिने है टिहुनन धरे नांगितलवार ॥ बाँयें हाथे किह्यो बन्दगी यहद्यावलिका राजकुमार ७६ देखिकै करिया राहुट हैगा नैना अग्नि बरण द्वैजायँ ॥ करिया देख्यो दिशियोगिनके कारेनाग ऐस मन्नाय ७७ बँयें हाथते किह्यो बन्दगी योगी काहगयो बौराय ॥ सम्मुख हमरे अब आवोना नाहीं सबैदेउँ पिटवाय ७८ सुनिकै बातें ये करियाकी बोला उदयसिंह ज्यहिनाम ॥ दहिने करसों जपें सुमिरनी दहिने लेयँ रामकानाम ७६ तौने करसों करें बन्दगी हमरो योगभंग द्वैजाय ॥ सुनिकै बातें ये योगीकी बोला तुरत करिंगाराय ८० सच्चे गुरुके तुम चेलाहौ योगी सच्चा ज्ञान तुम्हार ॥ तान सुनावो म्वरेमहलन्में योगी मानो कही हमार ८१ लीन सरंगी को देवा तब सय्यद खँझरी लीनउठाय ॥ लै इकतारा मलखे ठाढ़े आल्हा डमरू रहे घुमाय ८२ जैसे जङ्गल नचैमुरैला तैसे नचै लङ्गरवाभाय ॥