आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमाड़ोका युद्ध । ६३ ४५ वार हमारी ते बचिजाये घरमाँ छठी धराये जाय २४ यह कहि मारा तलवारी को शिरपर परी सूर्य के जाय ॥ फटिकै खुपरी दुइ . टूका भै सूरज गिरा भरहराखाय २५ सूरज गिरतै परलय हैगै लशकर तितिरबितिरहैजाय ॥ भागि सिपाही गढ़ माड़ो को जम्बै शरण पहुँचे आय २६ सुनी सिपाहिन की बातें जब राजा जम्बै उठा रिसाय ॥ हुक्म लगायो फिरि करियाको बबुरीबनै पहुँचे जाय २७ करिया बोल्यो त्यहि समया में हमरे सुनो शूर सरदार ॥ तुरत नगड़ची को बुलवावो सबियाँ फौज होय तय्यार २८ बजो नगाड़ा तब माड़ो में भादों मेघ सरिस हहराय ॥ हथी महावत हाथी लैकै तुरतै भूमि दीन बैठाय २९ चुम्बक पत्थर के हौदा धरि जिनमाँ सेल बरौंचा खाय ॥ धरी अँबारी तिन हाथिन पर हौदन कलशदीन धरवाय ३० घंटा बांधे गलहाथिन के भारी देत चलत झनकार ॥ यक यक हाथी के हौदापर दुइ दुइ बीर भये असवार ३१ तुरत दरोगा घोड़न वाला ताजी तुरकी कीन तयार ॥ नकुला सब्जा पँचकल्यानी सुर्खा सुरँगा रङ्ग अपार ३२ गंगा यमुनी डरी रकाबैं मुहँमाँ दीन लगाम लगाय ॥ डरी हयकल्लैं तिन घोड़नके रेशम तंग दीन कसबाय ३३ पुट्ठन बुट्टा रचि मेहँदी के सुम्मन नालैं दीन बँधाय ॥ पूंजी पट्ठा कसि घोड़न के तिनपर काठी दीन धराय ३४ नवल बछेड़ा घोड़शारे में ते सब बेगि भये तय्यार ॥ यक यक भाला दुइ दुइ बलछी कम्मर कसी तीन तलवार ३५ अगल बगल में दुइ पिस्तौलैं दहिने हाथे लीन कटार ॥