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अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj

गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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[ २ ] सम्पादकीय सिद्ध साहित्य प्रकाशन द्वारा नाथ संप्रदाय का अभी तक अप्रकाशित "अमनस्क योग" नामक यह द्वितीय पुष्प¹ प्रकाशित हो रहा है। इससे मुझे एवं योगसाधन में अभिरुचि रखनेवाले लोगों को हर्ष होना स्वाभाविक है। नाथ संप्रदाय के प्रवर्तक महायोगी श्री गोरक्षनाथ जी ने संस्कृत भाषा में कतिपय प्रसिद्ध ग्रन्थों की रचना की है जिनमें से निम्नलिखित ग्रन्थ उल्लेख- नीय हैं— अमनस्क, अमरौघशासनम्, सिद्ध-सिद्धान्त-पद्धति, गोरक्ष-सिद्धांत-संग्रह, सिद्ध-सिद्धांत-संग्रह, महार्थमंजरी, विवेक मार्तण्ड, योगमार्तण्ड, गोरक्ष पद्धति, गोरक्ष संहिता, योगबीज इत्यादि। इनके अतिरिक्त बृहद् एवं लघु ग्रन्थ भी हैं, जैसे—योगचिन्तामणि, हठयोग संहिता, श्री नाथसूत्र, योगशास्त्र, चतुश्शीत्यासन, गोरक्ष चिकित्सा, गोरक्षपंचय, गोरक्ष गीता, गोरक्ष कौमुदी, गोरक्ष कल्प इत्यादि। १. "ज्ञानदीपबोध" ( गुरुदत्तात्रेय-गोरक्षनाथ संवाद ) नामक प्रथम पुष्प दो वर्ष पूर्व ही वाराणसी से प्रकाशित हुआ था। उसका प्राप्ति स्थान है-- श्री मधुकर विखल (एडवोकेट), ६५ महात्मा गान्धी रोड, पूना-१।