अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)
Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj
गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ ८ ] कुछ विद्वानों ने अवधूत गीता, प्राणसंकली, योग तारावली या योग सारावली नामक ग्रन्थों को भी श्री गोरक्षनाथ की रचनाएँ माना है। वस्तुतः अवधूतगीता के रचयिता भगवान् श्री दत्तात्रेय हैं जिन्होंने उपदेश (स्वात्म- संवित उपदेश) रूप में उसे श्री कार्तिकस्वामी (सुब्रह्मण्यम् या षण्मुखम्) को सुनाया था। इसकी प्राचीन प्रतियों में प्रत्येक अध्याय के अन्त में एक पुष्पिका है जिसमें लिखा है, "श्री दत्तात्रेय विरचितायाम् अवधूतगीतायाम् संवित्युपदेशोनाम...अध्यायः"। इस ग्रन्थ की चालीस-पचास पूर्व छपी हुई कुछ प्रतियों को देखने पर पता चला है कि प्रारम्भ के कुछ श्लोकों में श्री गोरक्ष- नाथ जी का नाम दिया गया है। किन्तु इन श्लोकों की एवं अवधूतगीता के अन्य श्लोकों की भाषा, छन्द, रचना इत्यादि में भेद प्रतीत होता है जिससे स्पष्ट पता लग जाता है कि प्रारम्भ के कुछ श्लोक किसी विद्वान् द्वारा जोड़े गये हैं और इस ग्रन्थ को नाथ सम्प्रदाय का ग्रन्थ प्रमाणित करने का वृथा प्रयास किया गया है।१ प्राण संकली (प्राण श्रृंखला) नामक ग्रन्थ के रचयिता संतगुरु नानक हैं२ जब कि "योगतारावली" श्रीमद् आद्य शंकराचार्य जी की रचना मानी गयी है। मैं यहाँ पर सम्प्रति इन सबके विषय में आलो- चना करना अप्रासंगिक समझता हूं। उपर्युक्त संस्कृत भाषा के ग्रन्थों में "अमनस्क" का महत्वपूर्ण स्थान है। नाथ संप्रदाय के विषय में अनुसंधान करनेवाले सज्जन मि० ब्रिग्स, डा० मोहन सिंह, डा० पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल, डा० हजारी प्रसाद द्विवेदी, श्री अक्षय- कुमार बनर्जी, डा० श्रीमती कल्याणी मल्लिक से लेकर वर्तमान समय के प्रायः सभी अनुसंधानकर्ताओं ने अपने-अपने शोध प्रबन्धों में "अमनस्क" ग्रन्थ का उल्लेख तो किया है किन्तु अप्राप्य होने पर उसका उद्धरण-विवेचन प्रस्तुत नहीं कर पाये हैं। फलस्वरूप महायोगी श्री गोरक्षनाथ जी की योग विषयक विचारधारा का जितना स्पष्ट एवं विस्तीर्ण रूप से अपने ग्रन्थों में आलेखन करना चाहिए था उतना वे नहीं कर पाये हैं। अब इस अद्भुत ग्रन्थ के प्रकाशन से भावी अनुसंधानकर्ता उक्त अपूर्णता को पूर्ण करने में समर्थ होंगे, ऐसा मुझे विश्वास है। अमनस्क ग्रन्थ का नाम सर्वप्रथम जब मैंने श्रद्धेय महामहोपाध्याय डा० १. अवधूतगीता के कुछ परिवर्तित श्लोक नाथ संप्रदाय के कुछ ग्रन्थों में पाये जाते हैं। २. और भी कई सिद्धों और सन्तों की भी ऐसी रचनायें मिलती हैं।