अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)
Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj
गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ १५ ] इस ग्रन्थ के सम्पादन में मुझे बहुत से विद्वानों की अप्रकाश्य सहायता मिली है। मैं ऐसे सभी महानुभावों को धन्यवाद देना अपना कर्त्तव्य समझता हूँ। इस ग्रन्थ की प्रस्तावना विश्व के लब्धप्रतिष्ठ और विख्यात विद्वान् महामहोपाध्याय डा० गोपीनाथ कविराज जी ने लिख कर अपना अनुग्रह मुझ पर पुनः व्यक्त करने की कृपा की है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्राध्यापक और नाथसन्त साहित्य के प्रतिष्ठित अध्येता डा० नागेन्द्र नाथ उपाध्याय ने योगिराज गोरक्षनाथ के जीवन, साधन और दर्शन पर एक विस्तृत लेख प्रकाशनार्थ देकर ग्रन्थ को अधिक उपयोगी बनाया है। उन्होंने ग्रन्थ के मुद्रण और प्रकाशन आदि की भी सारी व्यवस्था कर इसे इस रूप में प्रस्तुत किया है। ग्रन्थ के लिए आर्थिक व्यवस्था करने में श्री मंगतू राम जयपुरिया (कानपुर), श्री कमल ठक्कर (कलकत्ता), श्री दीपककुमार माथुर (देहरादून), श्री जमनादास नेगांधी, श्री राजेन्द्र कक्कड़ (वाराणसी) ने स्मरणीय योग प्रदान किया है। ये सभी लोग परम धन्यवाद के पात्र हैं। इस प्रकार इस ग्रन्थ को इस रूप में प्रस्तुत करने में मैंने कुछ नहीं किया। वस्तुतः सब कुछ का कर्ता-धर्ता तो मूलतः वह परम सत्ता नाथ ही है— कामतोऽकामतो वापि यत्करोमि शुभाशुभम्। तत्सर्वं त्वयिसन्न्यस्तं त्वत्प्रयुक्तः करोम्यहम्॥ नाहं कर्ता सर्वमेतद् नाथैव कुरुते यथा। —:०:—