अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)
Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj
गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ १४ ]
लक्ष्य ( मत्स्य ) तो स्तंभ के ऊपर के ( ऊर्ध्व ) मार्ग में है जब कि अर्जुन का शिर नीचे की ओर, कुण्ड में दिखाई पड़ने वाले मत्स्य के प्रतिबिंब की ओर है। इस प्रकार "ऊर्ध्व लक्ष्य अधोदृष्टि" अर्थात् "बहिर्लक्ष्य बहिर्दृष्टि" की धरायन्त्र की विधि से ( शांभवी मुद्रा की क्रिया द्वारा ) साधक जीवन्मुक्त होगा।
द्वितीय खण्ड के श्लोक १० में शांभवी मुद्रा की विधि स्पष्ट रूप में बतायी गयी है। यहाँ पर कठिन त्राटक साधना के विषय में संकेत मात्र है और कहा है कि यह मुद्रा सर्व शास्त्रों में गोपित है। किन्तु श्लोक १५ में इस मुद्रा की रहस्यपूर्ण विधि आसानी से रखी गयी है और वह बोधगम्य हो जाय इसीलिए मत्स्यवेध के दृष्टांत रूप में, विचित्र शब्दजाल में ग्रथित कर दिया गया है और उसका फल जीवन्मुक्ति बताया है। १ यह श्लोक अमनस्क योग ग्रन्थ का हृदय है, यह बात निर्विवाद सत्य है। भगवत्कृपा से ध्यान की प्रक्रिया द्वारा इस श्लोक का जो रहस्य मुझे ज्ञात हुआ है उस सम्पूर्ण रहस्य को बिना कुछ