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अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj

गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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[ ७ ] संप्रदाय में तो नादपरंपरा ही स्वीकार की जाती है, बिंदुपरंपरा का यहाँ कोई महत्व नहीं। ऐसी स्थिति में यदि गोरक्षनाथ का जीवनवृत्त उपलब्ध नहीं तो आश्चर्य नहीं करना चाहिए। संन्यासी होने के बाद लोग अपने पूर्ववृत्त, जन्मस्थान, वंश, कुल, माता-पिता आदि की चर्चा नहीं करते। अतः ऐसी स्थिति में केवल विश्वास, किंवदन्तियाँ, प्रवाद आदि ही आधार रह जाते हैं। सांप्रदायिकों द्वारा गोरक्ष नाम की विभिन्न प्रकार की व्याख्याएँ प्रस्तुत की जाती हैं। इन व्याख्याओं का कई दृष्टियों से विचार किया जा सकता है। इन व्याख्याओं का कुछ कथाओं से भी संबन्ध स्थापित किया जा सकता है। ये साधनापद्धति और दर्शन से भी संबन्ध रखती हैं और किसी क्रिया अथवा पक्ष की ओर संकेत करती हैं। उदाहरण के लिए गोरक्षनाथस्तोत्र में कहा गया है—“ ‘ग’-कार गुणसंयुक्त, ‘र’-कार रूपलक्षण, ‘क्ष’-कारेण अक्षय ब्रह्म श्री गोरक्ष नमोऽस्तु ते।” इसके द्वारा गोरक्षशब्द का माहात्म्यवर्णन किया गया है।१३ गोरख उपनिषद् में दो स्थलों पर दो भिन्न-भिन्न व्याख्याएँ मिलती हैं। प्रथम के अनुसार गोरक्षनाथ अन्तर्यामी होकर संसार के जीवों की इन्द्रियों (गो) की रक्षा करते हैं। दूसरे स्थल के अनुसार गो शब्द का अर्थ वाक् ब्रह्म है। ‘र’ का अर्थ है रक्षा करते हैं। ‘क्ष’ का अर्थ क्षयरहित अर्थात् अक्षय वाक् ब्रह्म की रक्षा करनेवाले हैं श्री गोरक्षनाथ।१४ गोरक्षउपनिषद् की यह दूसरी व्याख्या गोरक्षस्तोत्र से मिलती-जुलती है। एक आधुनिक सांप्र- दायिक रचना ‘गोरक्षशब्द निरुक्ति:’ में कहा गया है—‘गां रक्षतीति गोरक्षः, रक्षतीति रक्षः, गवां रक्षः गोरक्ष—यावद्गोपदवाच्य की जो रक्षा करता हो, उसे गोरक्ष कहते हैं अर्थात् जितने भी गो शब्द के अर्थ हैं उन अर्थों की रक्षा करने वाले का नाम गोरक्ष है।१५ १३. नाथ संप्रदायेर इतिहास, दर्शन ओ साधना प्रणाली–पृ० २६; गोरक्ष- सिद्धांत-संग्रह–पृ० ४२। १४. सिद्धसिद्धांतपद्धति ऐंड अदर वर्क्स आव नाथयोगीज–डा० कल्याणी मल्लिक पृ० ७२-७३। १५. गोरक्ष ग्रंथमाला का ८२ वां पुष्प, पृ० ६, पांच पुस्तिकाओं का संग्रह, प्रकाशक—योगप्रचारिणी महासभा, गोरक्षटीला, काशी।