अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)
Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj
गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ ६ ] १५-ग्रियर्सन का अनुमान है कि गोरखनाथ सम्भवतः पश्चिमी हिमालय के रहने वाले थे। १६-गोरक्षनाथ ने उड़ीसा की भी यात्रा की थी और मल्लिकानाथ को शिष्य बनाया था।१२ उपर्युक्त विभिन्न मतों की परीक्षा कर गोरखनाथ के जीवनवृत्त के सम्बन्ध में निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं— १—गोरक्षनाथ के जन्मस्थान के सम्बन्ध में अधिकांश मत और कथाएँ भारत के पश्चिमोत्तर भाग की ओर संकेत करती हैं। २—उन्होंने अपने जीवन-काल में नेपाल, बंगाल, कच्छ, काठिया- वाड़, नासिक, उड़ीसा आदि की यात्राएं की थीं। ३—यात्राओं के सम्बन्ध में प्रचलित विश्वासों और कथाओं से ऐसा अनुमान होता है कि गोरखनाथ पंजाब से गोरखपुर गये। वहाँ से वे नेपाल गये। नेपाल से वे पुनः पंजाब लौटे और फिर नासिक के लिए प्रस्थान किया। ४--बंगाल की अपेक्षा पंजाब या भारत के पश्चिमोत्तर भाग से उनका अधिक संबन्ध रहा। ५—उनके गुरु मत्स्येन्द्रनाथ थे। ६—जन्म किस वंश में हुआ, यह विवादास्पद है, तथापि प्रवाद उनके ब्राह्मण होने की ओर संकेत करते हैं। ७--माता-पिता के संबन्ध में कोई विवरण उपलब्ध नहीं। केवल प्रवादों, किंवदन्तियों और विश्वासों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के कई कारण हैं। उपर्युक्त विवरणों से यह प्रकट है कि गोरक्षनाथ ने अकालसंन्यास लिया था अथवा वे बहुत बाल्या- वस्था में ही संन्यस्त हो गये थे। अकालसंन्यास लेनेवाले बहुत से आचार्यों, संन्यासियों की चर्चा बहुत पुरानी हो चुकी है। दूसरी बात यह है कि संन्यासी होना वस्तुतः जन्मान्तर माना जाता है। प्रायः संन्यासी होने के बाद नामादि का भी परिवर्तन होता है। दीक्षाओं के अनुसार भी नामों में परिवर्तन होते हैं और फिर नाथ- १२. नाथ और संत साहित्य—डा० नागेन्द्रनाथ उपाध्याय, परिशिष्ट २।