अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)
Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj
गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ १६ ] ऐसा प्रतीत होता है कि ब्रिग्स ने हठयोगप्रदीपिका में दिये गये नामों को ठीक से पढ़ा नहीं है। खण्ड और कापालिक वस्तुतः दो सिद्ध नहीं हैं और वास्तविक नाम है चण्डकापालिक। उसी प्रकार घोड़ाचौली भी एक ही सिद्ध का नाम प्रतीत होता है। ऐसे ही और कितने दोष बताये जा सकते हैं। वस्तुतः गोरखनाथ के शिष्यों की संख्या और नाम का संधान अभीतक ठीक से हुआ नहीं है। उड़ीसा के उनके शिष्य मल्लिकानाथ का पता अभी अभी लगा है जिनका जीवनवृत्त मल्लिकामकरंद नाम के ताड़पत्र के हस्तलेख के इतिहास- खण्ड में मिलता है।३० गोरक्षनाथ से सम्बद्ध जो कथाएं मिलती हैं, उनमें से अनेक गूगा चौहान, राजा रसालू, पूरण भगत आदि से संबंधित हैं जिनका उपयोग विद्वानों ने गोरखनाथ के कालनिर्णय में किया है ! गूगा का समय १२ वीं शताब्दी के पूर्व बताया गया है। राजा रसालू का समय आठवीं शती माना गया है। भर्तृहरि, गोपीचन्द्र, भोज, रानी पिंगला आदि की कथाओं के आधार पर ब्रिग्स ने गोरखनाथ का समय ११वीं ई० शती के पूर्व बताया है।३१ राजपूताने के मेवाड़ के बाप्पा से संबंधित गोरक्ष का समय ९वीं ई० शती से १२वीं ई० शती के बीच रहा होगा।३२ नेपाली वंशावली पर्वतिया के अनुसार मत्स्येन्द्रनाथ गोरक्षनाथ का मिलन नेपाल में नरदेव ( ९वीं ई० शती का मध्यकाल ) के समय में हुआ था।३३ इस प्रकार की बहुत सी सामग्रियों की परीक्षा कर ब्रिग्स ने यह निश्चय किया कि जब तक और नयी सामग्री उद्घाटित नहीं होती तब तक तो यही निष्कर्ष है कि गोरखनाथ का आविर्भाव १२वीं ई० शताब्दी के पूर्व हुआ था। अधिक संभावना तो यह है कि ११वीं ई० शताब्दी के प्रारम्भ में ही ३०. नाथ और सन्त साहित्य का तुलनात्मक अध्ययन—डा० नागेन्द्रनाथ उपाध्याय, परिशिष्ट २ । ३१. गोरखनाथ ऐंड कानफटा योगीज—ब्रिग्स—पृ० २३५-२३६, २३६, २४२, २४४, २५१ । ३२. वही पृ०-२४५-२४७ । ३३. वही, पृ० २४८ ।