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अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj

गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा

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[ १७ ] उनका आविर्भाव हुआ और वे वंगाल के पूर्वी भाग से आये थे । इसी प्रकार एक दूसरे विद्वान् डा० मोहनसिंह ने संभावना व्यक्त की है कि वे ईसा की ६वीं शताब्दी में विद्यमान थे और पंजाब के निवासी थे । नेपाल के राजनीतिक और धार्मिक इतिहास से उपलब्ध तथ्यों, शैव धर्म और नाथयोगी सम्प्रदाय के विकास के इतिहास से उपलब्ध तथ्यों तथा विभिन्न सम्प्रदायों की परम्पराओं के आधार पर प्रो० सिल्वा लेवी, डा० शहीदउल्ला जैसे विद्वानोंने निष्कर्ष निकाला है कि नाथयोगी सम्प्रदाय के संस्थापक सातवीं शताब्दी में अवश्य विद्य- मान थे । वाक्यपदीयकार भर्तृहरि के आधार पर लोग गोरक्षनाथ को छठीं शताब्दी का मानते हैं । एक साम्प्रदायिक परम्परा यह भी मानती है कि जेसस क्राइस्ट ने हिमालय के एक नाथयोगी ( गोरख- नाथ ? ) से योगशिक्षा ग्रहण की थी ।३४ डा०हजारीप्रसाद द्विवेदी ने विभिन्न दंतकथाओं और ऐतिहासिक सामग्री के आधार पर जो निष्कर्ष निकाले हैं, उनसे कई महत्वपूर्ण बातों का पता चलता है । ( १ ) मत्स्येन्द्रनाथ और जालंधरनाथ समसामयिक थे तथा इन दोनों के शिष्य थे क्रमशः गोरक्षनाथ और कानुपा या कृष्णपाद । अतः इनमें से किसी एक का समय निश्चित हो जाने पर शेष का समय निश्चित हो सकता है । ( २ ) कौलज्ञान- निर्णय के लेखक मत्स्येन्द्रनाथ ११वीं शताब्दी के पूर्व हुए थे । ( ३ ) अभिनवगुप्त द्वारा संस्तुत ‘मच्छन्दविभु’ मत्स्येन्द्रनाथ ही हैं । अभि- नवगुप्त ने ‘ईश्वरप्रत्यभिज्ञा’ की बृहती वृत्ति सन् १०१५ में लिखी थी और क्रमस्तोत्र की रचना सन् ६६१ में की थी । इस प्रकार मत्स्ये- न्द्रनाथ इसके पूर्व आविर्भूत हुए होंगे । ( ४ ) मत्स्येन्द्रनाथ (मीनपा) राजा देवपाल के राज्यकाल ( सन् ८०६-८४६ ई० ) में हुए थे । अतः मत्स्येन्द्रनाथ नवीं शताब्दी के मध्यभाग और अधिकसे अधिक अन्त्य भाग तक वर्तमान थे । ( ५ ) गोविंदचन्द्र या गोपीचन्द्र जालंधर के शिष्य कानुपा के शिष्य थे । दक्षिण के राजा राजेन्द्र चोल ने माणिकचन्द्र के पुत्र गोविंदचन्द्र को पराजित किया था । ३४. नाथयोग ( अंग्रेजी ) — प्रो० अक्षयकुमार बनर्जी, पृ० ५ ।