अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)
Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj
गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ १८ ] 'गोविंदचन्द्रेर गान' के अनुसार गोविंदचन्द्र का किसी दाक्षिणात्य राजा से युद्ध १०६३-१११२ ई० में हुआ था । इस पर यह अनुमान किया जा सकता है कि जालंधर का समय इससे सौ वर्ष पूर्व (लगभग ६६३ई०) रहा होगा । मत्स्येन्द्रनाथ का समय इससे भी पूर्व होना चाहिए । ( ६ ) वज्रयानी सिद्ध कह्नपा, जिन्होंने अपने गानों में जालंधरनाथ का नाम लिया है, तिब्बती परंपरा के अनुसार राजा देवपाल ( ८०६-८४६ ई० ) के समकालीन थे । अतः जालंधरपाद का समय इससे कुछ पूर्व ठहरता है । ( ७ ) चालुक्यराज मूलराज ( ६६३ ई० ) ने अणहिल्लपुर के शिवमंदिर का प्रबंधक कन्थड़ी नामक सिद्ध को बड़े छल-बल-कौशल से बनाया था । इस सिद्ध के सारे लक्षण नाथपंथी योगी के हैं, ऐसा प्रबंधचिंतामणि से पता चलता है । ऊपर के प्रमाणों के आधार पर नाथमार्ग के आद्य प्रवर्तकों का समय नवीं शताब्दी का मध्यभाग ही उचित जान पड़ता है ।३५ ऊपर के विवरण और विवेचन से यह निश्चत हो गया है कि मत्स्येन्द्रनाथ और गोरक्षनाथ का समय ६ वीं ई० शती के मध्य अथवा अन्त्य भाग में होना चाहिए । अभी तक जितने भी प्रमाणों का विचार लोगों ने किया है, उनमें उपर्युक्त विचार अपेक्षाकृत अधिक संगत और प्रामाणिक मालूम पड़ता है। डा० कल्याणी मल्लिक ने शताब्दी के अनुसार सामग्री का विभाजन कर यह निश्चय करने का प्रयत्न किया है कि गोरक्षनाथ का समय १२ वीं ई० श० के पूर्व किसी समय माना जा सकता है। उन्होंने कुछ प्रमाण ऐसे भी दिये हैं, जिनसे डा० द्विवेदी के मत की पुष्टि होती है । मालवराजकन्या मयनामती के पति माणिकचन्द्र के गीत रंगपुर के पाशुपत शैव गाते थे । वे लोग गोरक्षनाथ की गुरुरूप में पूजा करते थे । पैग-साम-जान-ज्वैन के अनुसार शंकरदिग्विजय के परवर्ती काल में मगध के, श्रीहर्ष के ज्येष्ठ पुत्र के राजत्वकाल में, बंगदेश में माणिकचन्द्र के पिता राज्य करते थे । शंकर का जन्मकाल ७८८ ई० है। गोरक्षनाथ ने नाथ संप्रदाय के दर्शन के साथ उपनिषद्दर्शन का सामंजस्य किया है। अतएव वे शंकर के बहुत परवर्ती नहीं हो ३५. नाथसिद्धों की वानियाँ—डा० हजारीप्रसाद द्विवेदी, भूमिका, पृ०-५-६ ।