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अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj

गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

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[ २१ ] संग्रह में बहुत से वचन उद्धृत हैं। ३८ लेकिन इसकी प्रति भी ढूंढ़े नहीं मिलती। अमनस्क ग्रन्थ तो अब प्रकाशित ही हो रहा है। द्विवेदी जी ने बताया है कि पं० प्रसन्नकुमार कविरत्न ने गोरक्ष- संहिता को १८६७ में छपाया था ! हमने एक दूसरा संस्करण काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के गायकवाड़ ग्रन्थालय में देखा, जिसकी टंकित प्रति मेरे पास सुरक्षित है। यह संस्करण श्री इन्द्र जी शर्मा द्वारा संवत् १६५० में प्रकाशित कराया गया था। इसका प्रकाशन स्थान काठियावाड़ का प्रभासपाटण स्थान है और मुद्रण स्थान अहमदाबाद है। यह संस्करण भी बहुत जीर्ण अवस्था में मुझे मिला। द्विवेदी जी ने आगे और बताया है कि इसकी एक प्रति नेपाल दर- बार लाइब्रेरी में भी है जिसका कुछ अंश डा० बागची ने कौलवलि- निर्णय की भूमिका में उद्धृत किया है। इसके बहुत से अंश मत्स्येन्द्र- नाथ के अकुलवीरतन्त्र में भी अविकल रूप में मिलते हैं। ३९ गोरक्ष संहिता भी बहुत महत्वपूर्ण ग्रंथ है और अब अप्राप्य है। अतः अमनस्क के बाद, उपर्युक्त सामग्री के आधार पर, इसका भी संपादन- प्रकाशन होना चाहिए। गोरक्षनाथ की हिन्दी रचनाएं भी अब पर्याप्त मात्रा में प्रका- शित हो चुकी हैं। सबसे पहले डा० पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल ने हस्त- लिखित पोथियों के आधार पर 'गोरखबानी' का प्रकाशन कराया जिसमें प्रमुख तेरह रचनाओं में सबदी अंश को सबसे अधिक प्रामा- णिक माना गया है। इनके अतिरिक्त १४ रचनाएं और संपादित हैं। डा० बड़थ्वाल द्वारा संग्रहीत नाथसिद्धों की बानियों का दूसरा भाग बहुत बाद में पर्याप्त नयी सामग्री के साथ डा० हजारीप्रसाद द्विवेदी ने प्रकाशित कराया। इसके पूर्व ही डा० कल्याणी मलिक ने सिद्धसिद्धान्तपद्धति और अन्य नाथयोगियों की रचनाओं के साथ गोरक्षनाथ के नाम से प्रसिद्ध 'गोरख उपनिषद्' नाम की रचना प्रकाशित की। कुछ लोग गोरक्षनाथ को हिन्दी का प्रथम गद्यलेखक मानते हैं। भाषा की दृष्टि से भी गोरक्षनाथ की रचनाएं बहुत ३८. नाथ संप्रदाय — डा० हजारीप्रसाद द्विवेदी, पृ० ६८ । ३६. वही पृ० ६६-१००