श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 225, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्रीरामचन्द्रो विजयतेतराम्
श्रीवाल्मीकिमहामुनिकृतशतकोटिरामचरितान्तर्गतं
आनन्दरामायणम्
'ज्योत्स्ना'ऽऽह्वया भाषाटीकयाऽऽटीकितम्
यागकाण्डम्
प्रथमः सर्गः
(अश्वमेध यज्ञके लिए सामग्री एकत्र करनेका निर्देश)
श्रीरामदास उवाच
अथ रामः सभाध्ये एकदा गुरुमब्रवीत् । कुम्भोदरमुनेर्वाक्यात्तीर्थयात्रा मया कृता ॥ १ ॥
इदानीं तस्य वाक्येन वाजिमेधं करोम्यहम् । यज्ञोपकरणानि त्वं लक्ष्मणाय वदस्व हि ॥ २ ॥
सुमुहूर्ते शुभे लग्ने श्यामकर्णस्त्रिपुच्छकः । तुरङ्गो दिव्यवस्त्राद्यैर्भूषयित्वा विमुच्यताम् ॥ ३ ॥
पृथ्वीप्रदक्षिणार्थं हि तत्पृष्ठेऽयुतसंख्यया । सेनया सह शत्रुघ्नः सुमंत्रेण महाद्युतिः ॥ ४ ॥
तद्राघववचं श्रुत्वा वसिष्ठो मुनिसत्तमः । ज्योतिर्विद्भिःसहितो दृष्ट्वा सुमुहूर्तं शुभोदयम् ॥ ५ ॥
आज्ञापयत्स सौमित्रिं सभायां राजसन्निधौ । सौमित्रेऽद्यदिनात्सप्तमेऽह्नो मुहूर्त्तः सप्तमेऽहनि ॥ ६ ॥
दीक्षार्थं रामचन्द्रस्य वाजिमेधाख्यकर्मणि । रामतीर्थे यज्ञभूमिः शोधनीया हलादिभिः ॥ ७ ॥
सुवर्णनिर्मितैर्दिव्यैर्ब्राह्मणैः सह सत्वरम् । दशक्रोशमिताऽयोध्याबहिः सर्वत्र लक्ष्मण ॥ ८ ॥
समा कंकरहीना तु लिप्ता चन्दनजातिभिः । मण्डपश्च विधातव्यः सर्वदोषखण्डितः शुभः ॥ ९ ॥
श्रीरामदासने कहा इसके अनन्तर एक दिन सभामें रामचन्द्रजी गुरु वसिष्ठसे कहने लगे—हे गुरो ! कुम्भोदर ऋषिके कथनानुसार मैंने तीर्थयात्रा की । अब उन्हींकी बातसे मैं अश्वमेध यज्ञ भी करना चाहता हूँ । यज्ञकी जो-जो आवश्यक वस्तुएँ हों, कृपया आप लक्ष्मणको बतला दीजिए ॥ १ ॥ २ ॥ किसी अच्छे मुहूर्त और शुभ लग्नमें श्याम रङ्गवाले जिसके कान, पैर और पूँछ हों, ऐसे घोड़ेको सुन्दर वस्त्रों और आभूषणोंसे सुसज्जित करके पृथ्वीप्रदक्षिणाके लिए छोड़ा जाय ॥ ३ ॥ तदनन्तर उस यज्ञीय घोड़ेकी रक्षा करनेके लिए दस हजार सेनाके साथ सुमन्त्र और शत्रुघ्न प्रस्थान करें ॥ ४ ॥ रामचन्द्रजी की इन बातोंको सुनकर वसिष्ठजीने ज्योतिषियोंके साथ अच्छे लग्न तथा अच्छे नक्षत्रसे संयुक्त एक बढ़िया मुहूर्त देखा और सभामें ही रामचन्द्रजीके सामने लक्ष्मणजीसे बोले—हे लक्ष्मण ! रामचन्द्रके यज्ञकी दीक्षा लेनेका शुभ मुहूर्त आजसे ठीक सातवें दिन है ॥ ५ ॥ ६ ॥ सबसे पहला काम यह है कि इस अश्वमेध यज्ञके लिए रामतीर्थकी भूमि सुवर्णके बने हुए हलों द्वारा ब्राह्मणोंके साथ जोतकर शुद्ध की जाय । अयोध्याके चारों ओर दस कोस तककी जमीन पटवाकर बराबर कर दी जाय और ऐसी साफ की जाय कि उसमे कहीं कुछ भी कङ्कड़-पत्थर न रहने