श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 332, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ें३१६ आनन्दरामायणे [ सर्गः ६
सम्यास्तेजोबलेनैव जघान तारकासुरम् । षडाननः शृणादेव कृतकृत्योऽभवत्पुरा ॥४७॥ सैषेयं रामरक्षा ते मयाऽऽख्याताऽतिपुण्यदा । यस्याः श्रवणमात्रेण कस्यापि न भयं भवेत् ॥४८॥ वाल्मीकिनाऽनया पूर्वं कुशाय ह्यभिषेचनम् । कृतं बालग्रहाणां च शांत्यर्थे मा मयोदिता ॥४९॥ बालानां ग्रहशांत्यर्थे जपनीया निरन्तरम् । रामरक्षा महाश्रेष्ठा महौघौघविदारिणी ॥५०॥ नास्याः परतरं स्तोत्रं नास्याः परंतरो जपः । नास्याः परतरं किंचिन्मन्त्यं मन्य वदाम्यहम् ॥५१॥ इति श्रीमत्कोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये जन्मकाण्डे रामरक्षाकथनं नाम पंचमः सर्गः ॥ ५ ॥
षष्ठः सर्गः
( लवका अयोध्यासे कमलपुष्प लाकर माता सीताको देना )
श्रीरामदास उवाच एकदा जानकी प्राह वाल्मीकिं मुनिपुंगवम् । कथयस्व व्रत येन रामयोगो भवेन्मम ॥ १ ॥ तत्सीतावचनं श्रुत्वा वाल्मीकिस्तां वचोऽब्रवीत् । प्रतिपद्दिनमारभ्य यावन्मा नवमी सिता ॥ २ ॥ तावन्नवदिने मांते व्रत कुरु मयोच्यते । प्रतिपदि रामचन्द्रपादुके धातुनिर्मिते ॥ ३ ॥ कृत्वाऽर्च्य नवकमलैर्देहि मंत्रांजलिं शुभाम् । ततः पुत्राननाभ्यां त्वं जन्मकाण्डं शुभं शृणु ॥ ४ ॥ अष्टादशकमलैश्च द्वितीयायां शुभांजलिम् । मंत्रैर्देहि पूजनान्ते पतिपादुकयोर्मुदा ॥ ५ ॥ पतिं विना स्त्रिया नान्यत्पूजनीयं हि दैवतम् । जन्मकांडं द्विवारं तु शृणु भक्त्या शुचिव्रते ॥ ६ ॥ एवं वृद्धिनवार्ब्जैश्च कार्या मांते दिने दिने । नवषण्णमेकाशीत्यब्जैः पूजयस्व भर्तृपादुके ॥ ७ ॥ नववारं जन्मकांडं पुत्रास्याभ्यां सुखं शृणु । ततो दशम्यां सुस्नातैर्कार्याति द्विजदंपतीन् ॥ ८ ॥ संपूज्य वस्त्राभरणैर्भोजयित्वाथ मैथिलि । दत्त्वा तेभ्यो दक्षिणांस्त्वं विसर्ज्य प्रणम्य तान् ॥ ९ ॥
मंत्रोंसे अभिमन्त्रण किया ॥ ४५-४६ ॥ उसी मन्त्रके तेज और बलसे षडाननने तारकासुर जैसे महान् शत्रुको मारकर अपना काम पूरा कर लिया था ॥ ४७ ॥ वही रामरक्षामंत्र मैने तुम्हे बतलाया है। जिसके एक बार श्रवण कर लेनेसे संसारमें किसीका भय नहीं रह जाता ॥ ४८ । इसी रामरक्षा मंत्रसे वाल्मीकिने कुशका अभिषेक किया था बालकोंका दुःख दूर करनेके लिए इसे मैने तुम्हें बतलाया है । ४९ ॥ बालकोंका ग्रह शान्त करनेके लिए सदा इसका जप करना चाहिये । यह महान् मंत्र है । यह बड़े बड़े पापोंके समूहको नष्ट कर देता है । इससे बढ़कर कोई स्तोत्र है ही नहीं । मैं तुमसे सच सच कहता हूँ कि इससे श्रेष्ठ और कोई मंत्र नहीं है ॥ ५० ॥ ५१ ॥ इति श्रीमत्कोटिरामचरितांतर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये पं० रामजन्मकाण्डेय-विरचित'ज्योत्स्ना'भाषाटीकाससन्विते जन्मकाण्डे पञ्चमः सर्गः ॥ ५ '
श्रीरामदासने कहा -एक दिन सीताजी मुनियों में श्रेष्ठ वाल्मीकिसे कहने लगीं कि हमें कोई ऐसा व्रत बतलाइए, जिससे मैं फिर अपने पतिदेव ( राम ) को प्राप्त कर लूँ । १ । सीताकी उस प्रार्थनाको सुनकर वाल्मीकिने कहा कि प्रतिपदा तिथिसे लेकर नवमी पर्यन्त अर्थात् नौ दिनका मै जो व्रत बतला रहा हूँ, उसे करो । प्रतिपदाको धातुसे बनी रामकी चरणपादुकाका पूजन करके नौ कमलके फूलोंसे मंत्राञ्जलि दो । इसके अनन्तर अपने पुत्रोंके मुखसे आनन्दरामायणके जन्मकाण्डकी कथा सुनो । २-४ ॥ फिर द्वितीयाको पादुकाकी पूजा करके अठारह कमलोंकी पुष्पाञ्जलि दो । स्त्रीके लिए पतिके अतिरिक्त दूसरा कोई पूज्य देवता नहीं है । साध्वी द्वितीयाको दो बार जन्मकांडकी कथा सुनो ॥ ५ । ६ । इस तरह प्रतिदिन कमलके फूलोंकी संख्या बढ़ाती हुई नवमीको ८१ फूलोंसे पतिकी चरणपादुकाको मंत्राञ्जलि दो और कथाकी भी सख्या बढाती हुई नवमीको अपने पुत्रोंके मुखसे नौ बार जन्मकांडकी कथा सुनो । दशमीको स्नानादि नित्यकर्म करनेके