श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 396, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ें३८० आनन्दरामायणे [सर्गः ९
धर्मार्थी प्राप्नुयाद्धर्मं धनार्थी धनमाप्नुयात् । कामनार्थी लभेत् कामान् मोक्षार्थी मोक्षमाप्नुयात् ॥ ३०॥ स्त्रीकामुकैरयं नित्यं पठनार्थं प्रयत्नतः । विवाहकाण्डं परमं प्राप्नुयुश्चात्र ते वधूः ॥ ३१॥ पतिकाम्या कुमारी चेच्छृणुयाद्भक्तिभाविता । विवाहकाण्डमेतद्वै मनोज्ञं पतिमाप्नुयात् ॥ ३२॥ ममार्थं यः पठेदेतच्छृणुयाद्वाऽथ भक्तितः । इह स्त्रिया सुखं भुक्त्वाऽप्सरोगोष्ठ्या दिवि मोदते ॥ ३३॥ सधवा शृणुयादेतद्या नारी कांतमुत्तमम् । विवाहकाण्डं कुत्रचित्तं वियोगं नाप्नुयात्तु सा ॥ ३४॥ सप्तदशदिनैरस्य कार्यं स्त्रीकामुकैर्मुहुः । अनुष्ठानं वर्षमेकं शृण्वन्नपि स्त्रियमाप्नुयात् ॥ ३५॥ प्रथमे दिवसे सर्गं पठेद्द्वाँ च परschemaऽहनि । त्रयमेव दिने सर्गान्क्रमेण संपठेन्नव ॥ ३६॥ दशमे दिवसेऽष्टैव ह्येकमेकेन वै क्रमात् । एवं सप्तदशाद्दिनैरनुष्ठानं स्मृतं बुधैः ॥ ३७॥ अथवा सकलं काण्डं प्रथमे दिवसे पठेत् । परेऽह्नि द्विगुणं हि नवमे दिवसे क्रमात् ॥ ३८॥ नववारं पठेतच्चेद् दशमे दिवसे ततः । अष्टवारं पठेत्तावद् ह्ययमेकेन क्रमान्नृपः ॥ ३९॥ एवं नरो वर्षमेकमुणुनानांस्त्रियं लभेत् । विमलबक्त्रां च सुनासां दिव्यरूपों मनोहराम् ॥ ४०॥ विवाहकाण्डं परमं पवित्रमानन्ददं मङ्गलकारकं च । स्त्रीदं मनोज्ञं श्रुतिसौख्यदं वै नरैः सदा सश्रवणीयंमेतत् ॥ ४१॥ आनन्दरामायणमध्यसंस्थं विवाहकांडं परमं हि रम्यम् । शृण्वंति भक्त्या भुवि मानवास्ते लभन्ति कामानखिलान्मनोऽज्ञान् ॥ ४२॥ इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्य श्रीमदानन्दरामायणे विवाहकाण्डे राज्यवर्णनो नाम नवमः सर्गः ॥ ९॥ विवाहकाण्डस्य सर्वानन्दरामायण सर्वज्ञ ज्ञायतय । पञ्चशताष्ट संख्या श्लोकाश्चाप्युत्थिनाः ॥ १ ॥
जो मनुष्य विवाहकाण्डका श्रवण करते हैं, वे अपना गया हुआ पुत्र, धन व कार्य में निपुण नेहा ज्ञान ॥ २९ ॥ इसका सुननेसे धर्मार्थी धर्मको, धनार्थी धनको, काम कामको और मोक्षार्थी मोक्षको प्राप्त करता है ॥ ३० ॥ जो लोग स्त्रीकी इच्छा रखते हों, उन्हें चाहिये कि निरन्तर इस विवाहकाण्डका पाठ किया करें। इससे उन्हें स्त्री अवश्य प्राप्त होगी ॥ ३१ ॥ अच्छे पतिकी कामना इच्छा रखनेवाली कुमारी यदि भक्तिपूर्वक इस काण्डको सुने तो सुन्दर पति पावेगी ॥ ३२ ॥ जो सम्यक् रूप मनुष्य इस काण्डको पढ़ता या सुनता है सो वह इस जन्ममें स्त्रीके साथ सुख भोगकर स्वर्गमें अप्सराओके साथ विहार करता है ॥ जो सधवा नारी इस काण्डको सुनती है वह कभी पतिवियोगका दुःख नहीं पाती । जो लोग स्त्री चाहते हों वे सत्रह दिनमें इस आवृत्तिके क्रमसे एक वर्ष पर्य्यन्त अनुष्ठान करें ऐसा करनेसे मूढ मानव भी स्त्री प्राप्त कर सकता है ॥ ३३-३५ ॥ उसका क्रम इस तरह है- पहिले दिन एक सर्ग, दूसरे दिन दो सर्ग तीसरे दिन तीन सर्ग इस क्रमसे नवें दिन नौ सर्गोंका पाठ करे। फिर दसवें दिन आठ सर्ग और ग्यारहवें दिन सात सर्ग इस एक-एक घटाता हुआ सत्रह दिनमें पूर्ण करे। विद्वा- नोंने यही अनुष्ठानकी विधि बतलाई है ॥ ३६ ॥ ३७ ॥ अथवा बन पड़े तो पहिले रोज विवाहकाण्डका एक बार पाठ कर जाय, दूसरे रोज दो बार, तीसरे रोज तीन बार, इस रीतिसे बढ़ाता हुआ नवमें दिन नौ बार इस काण्डका पाठ करे और ग्यारहवें रोज सात बार इस विधानसे घटाता हुआ सत्रहवें दिन केवल एक बार पाठ करे ॥ ३८ ॥ ३९ ॥ इस तरह एक वर्ष तक अनुष्ठान करनेसे वह चन्द्रमाके मुखी, अच्छी नासिका और दिव्य रूपवाली मनोहर स्त्री पाते हैं ॥ ४० ॥ लोगोंको चाहिए कि इस परम पवित्र, आनन्ददायक, द्युतिसुखदायी तथा आनन्द देनेवाल विवाहकाण्डको नित्य पढ़कर ॥ ४१ ॥ आनन्दरामायणके अन्तर्गत इस छरे विवाहकाण्डको जो मनुष्य भक्तिपूर्वक सुनते हैं वे अपनी सब कामनाओंको प्राप्त कर लेते हैं ॥ ४२ ॥ इति श्रीम- त्काशिनाथचरणकमलार्त्त श्रीमदानन्दरामायण वाङ्मयकार्यं... रामतेजपाण्डेयविरचित ज्योत्स्ना भाषाटीका- सहिते विवाहकाण्डे नवमः सर्गः ॥ ९ ॥ इस विवाहकाण्डमें कुल नौ सर्ग हैं और उनमें पाँच सौ दस मा श्लोक कह गये हैं ॥ १ ॥ इति श्रीमदानन्दरामायणे विवाहकाण्डं समाप्तम् ।