श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 420, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ें| ४०४ | आनन्दरामायणे | [ सर्गः ३ |
|---|
रामोपासक उवाच
मम रामेण साकेते सप्त मर्त्याः सुजीविताः ॥८१॥
कृष्णोपासक उवाच
मम कृष्णेन पौरुष्याद्विप्रस्य जीविताः सुताः ।
रामोपासक उवाच
मम रामेण सचिवः सुमंत्रो जीवितः पुनः ॥८२॥
कृष्णोपासक उवाच
मम कृष्णेन द्रौपद्याः संधितं हि फलं तरौ ।
रामोपासक उवाच
मम रामेण वैदेह्याः संधितं तुलसीदलम् ॥८३॥
कृष्णोपासक उवाच
मम कृष्णप्रतापश्च जनान्संदर्शितः पुरा दुर्वाससाऽन्नयाञ्चा सा गोपिकानां कृता वृजे ॥८४॥
रामोपासक उवाच
मम रामप्रतापश्च जनान् मन्दर्शितः पुरा । दुर्वाससाऽन्नयाञ्चा सा कृता रामस्य तत्पुरि ॥८५॥
कृष्णोपासक उवाच
मम कृष्णेन रूपाणि बहून्यद्य कृतानि हि ।
रामोपासक उवाच
बहूनि राघवेणापि स्वरूपाणि कृतानि हि ॥८६॥
कृष्णोपासक उवाच
मम कृष्णेन मित्राय दत्तं स्वर्णमयं पुरम् ।
रामोपासक उवाच
मम रामेण मित्राय दत्ता स्वर्णमयी पुरी ॥८७॥
कृष्णोपासक उवाच
सूर्यग्रहे कुरुक्षेत्रे स्नानं कृष्णेन मे कृतम् ।
रामचन्द्रजीने अयोध्यामे बैठे-बैठे स्वर्गसे कल्पवृक्ष तथा पारिजातको मंगा लिया था । कृष्णोपासक बोला—हमारे कृष्णाजी अपने गुरुजीके मरे हुए सात पुत्रोंको यमपुरीसे लाये और उन्हें जीवित करके अपने गुरुजीको दे दिया था। रामोपासकने कहा—हमारे रामचन्द्रजीने अयोध्यामें मरे हुए सात मनुष्योंको जीवित कर दिया था ॥ ८० ॥ ८१ ॥ कृष्णोपासकने कहा—हमारे कृष्णने द्रौपदीके कथनानुसार बिना फलवाले वृक्षमें भी फल लगा दिया था। रामोपासक बोला—हमारे रामने भी सीताके कहनेपर तुलसीदलके दो टुकड़ोंको जोड़ दिया था ॥ ८२ ॥ ८३ ॥ कृष्णोपासक कहने लगा—हमारे श्रीकृष्णजीने जंगलमे दुर्वासाके अन्न मांगनेपर उनकी मांग पूरी की थी ॥ ८४ ॥ रामोपासक बोला—हमारे रामने भी अयोध्यामें दुर्वासाके अन्न माँगनेपर उनकी इच्छा पूर्ण की थी। इससे हमारे रामका प्रताप सब संसार देख चुका है। ८५ ॥ कृष्णोपासक बोला—हमारे कृष्णने अनेक रूप धारण किये थे। रामोपासकने कहा—हमारे राम भी लंकासे लौटकर अयोध्या आनेपर अनेक रूप धारण करके सबसे एक साथ मिले थे। कृष्णोपासक बोला—श्रीकृष्णने अपने मित्र सुदामाको सुवर्णकी नगरी दे डाली थी। रामोपासकने कहा कि हमारे रामने भी अपने मित्र विभीषणको सोनेकी लंका दे दी थी ॥ ८६ ॥ ८७ ॥ कृष्णोपासक बोला—हमारे कृष्णने सूर्यग्रहणपर कुरुक्षेत्रम जाकर स्नान किया था। रामो-