श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 471, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ेंसर्गः ११ ] राज्यकाण्डम् ( पूर्वार्द्धम् ) ४६५
ददर्श गण्डकीतीरे वृक्षषण्डे रघूद्वहः। निमीलिताक्षः शुष्काङ्गतपसा ह्यर्धयौवनाः ॥ ७३॥
इति श्रीशतकोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये राज्यकाण्डे पूर्वार्धे
द्विजकन्याचतुष्टयवरदानं नामैकादशः सर्गः ॥ ११ ॥
द्वादशः सर्गः
( सोलह हजार ललनाओं तथा कालिन्दी आदि चार स्त्रियोंको रामका वरदान )
श्रीरामदास उवाच
अथ रामः शनैः सर्वाः स्पृष्ट्वा निजकरेण ताः । कृत्वा तारुण्यपूर्णाश्चपूरिताः प्राह सादरम् ॥ १ ॥
पूर्ववत्सकलं वृत्तं सर्वाः सथाऽथ विस्तरात् । वरं वरयतां शीघ्रमित्युक्त्वा च रघूत्तमः ॥ २ ॥
हतं तं दुन्दुभिं श्रुत्वा दर्पोत्फुल्लानना स्त्रियः। पूर्ववद्विष्णुरूपाणि सहस्राणि हि षोडश ॥ ३ ॥
सन्दर्शितानि रामेण तावंति च स्थितानि हि । रामरूपाणि ता दृष्ट्वा ज्ञात्वा विष्णुं परात्परम् ॥ ४ ॥
तं वरान्द्वरयामासुस्त्वन्नो भर्ता भव प्रभो । ततो राममुवाचाऽऽत्मन्येकपत्नीव्रतस्थितम् ॥ ५ ॥
परस्परं ताः सम्मन्त्र्य प्रोचुः भर्ता मृगीदृशः । मया वृतस्त्वया चायं त्वया वृतस्तथा मया ॥ ६ ॥
एवं तासु च सर्वासु वदन्तीषु रघूत्तमः । श्रुत्वा तद्वचनं शिष्य तदा चित्तेऽव्यचारयत् ॥ ७ ॥
इमा वदंति किं सर्वा मां ज्ञात्वाऽपि व्रतस्थितम् । बलात्कारेण मां भोक्तुं मन्त्रयन्ति परस्परम् ॥ ८ ॥
ब्रह्मरुद्रमघवादयः सुरा ये च सिद्धमुनयः पुरातनाः ।
तेऽपि योगबलिनो विमोहिताः लीलया तदबलाभिरद्भुतम् ॥ ९ ॥
योषितां नयनतीक्ष्णसायकैर्धनुर्लतासमुद्धृतापनिर्गतैः ।
धन्विना मकरकेतुना हतः कस्य नो पतितो मनोमृगः ॥ १० ॥
तावदेव दृढचित्तता नृणां तावदेव गणना कुलस्य च ।
तावदेव तपसः प्रगल्भता तावदेव नियमव्रतादयः ॥ ११ ॥
उस सोलह हजार स्त्रियोंको देखा। वे सब आंखें मूंदे थीं, तपस्यासे उनका शरीर सूख गया था और यौवन नष्ट हो चला था ॥ ६८-७३ ॥ इति श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीय सं० रामतेजपाण्डेयविरचित'ज्योत्स्ना' भाषाटीकासहिते राज्यकाण्डे पूर्वार्द्धे एकादश सर्गः ॥ ११ ॥
श्रीरामदास बोले—इसके अनन्तर रामने ज्ञान हाथके स्पर्शसे उन सबको यौवनसम्पूर्ण कर दिया तो वे भी पहलेवाली चारों स्त्रियोंके समान अपना वृत्तान्त बता गयीं । रामने उनसे कहा कि तुम्हारो जो इच्छा हो, वह वरदान मुझसे मांग लो । उन्होंने भी जब दुन्दुभीके मरनेका समाचार सुना तो बहुत प्रसन्न हुईं। इसके अनन्तर रामने उन्हें भी अपना विष्णुरूप दिखा तथा सोलह हजार रामरूप धरकर प्रत्येक स्त्रीको अलग-अलग दर्शन दिया । स्त्रियोंने इस प्रकार रामरूपको देखकर उन्हें सर्वश्रेष्ठ विष्णुभगवान् जाना । १-४ ॥ उन्होंने भी पहलेवालियोंकी तरह रामसे प्रार्थना की कि आप मेरे पति बनें। जब उनको रामने अपनेको एकपत्नीव्रती बतलाया तो वे आपसमें सलाह करके कहने लगीं कि जैसे मैने इनको पसन्द किया है, उसी तरह तुमने भी तो किया है। सब आओ, हम सब मिलकर कोई ऐसा प्रयत्न करें कि जिसमे हमारी कामना पूर्ण हो जाय । इस प्रकार जब रामने उनकी सलाह सुनी तो अपने हृदयमे विचार करने लगे कि एकपत्नीव्रतमें स्थित देखकर भी ये स्त्रियां बरबस मेरे साथ संभोग करना चाहती हैं ॥ ५-८ ॥ ब्रह्मा रुद्र, इन्द्रादिक देवता एवं जितने पुरातन सिद्ध-मुनि हो गये हैं, वे सब योगी होकर भी कामिनियोंकी बदभुत लीलासे मुग्ध हो गये थे ॥ ९ ॥ स्त्रियोंके नेत्ररूपी सायकको धनुर्धारी कामदेव जिसके ऊपर छोड़ता है तो किसका मनरूपी