भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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सर्गः २४ ] राज्यकाण्डम् ( उत्तरार्द्धम् ) ५४५


यमेन वेष्टितां दृष्ट्वा पुरीं रामो महामनाः । लवमाज्ञापयामास गच्छ योद्धुं यमेन हि ॥४८॥ लवस्तदा रथारूढो दुन्दुभीनां महास्वनैः । अयोध्याया बहिर्गत्वा चकार सङ्गरं महत् ॥ ४९ ॥ तदा लवशराघातच्छिन्नदेहा यमानुगाः । निपेतुः क्षणमात्रेण कोटिशो रणभूमिषु ॥५०॥ तान्सर्वान्निहतान् दृष्ट्वा यमो महिषसंस्थितः । चकार तुमुलं युद्धं लवेन क्रोधभासुरः ॥५१॥ स्वबाणौघैर्धनुः शीघ्रं रथं सूतं दृढं धनुः । कवचं मुकुटं चापि चिच्छेद स लवस्य च ॥५२॥ तदा लवश्चातिक्रुद्धः स्वसैन्येन स्थित पुनः । चकार सङ्गरं घोरं यमेनातिभयंकरम् ॥५३॥ तदामरा विमानस्था ददृशुर्युद्धकौतुकम् । ततो लवः स्वबाणौघैर्महिषं मूर्च्छितं भुवि ॥५४॥ कृत्वा तं ताडयामास शतबाणौघैर्म जवात् । ततो यमोऽप्यतिक्रुद्धो यमदण्डं मुमोच तम् ॥५५॥ तं दण्डं मोचितं दृष्ट्वा ब्रह्मास्त्रं सन्दधे लवः । ब्रह्मास्त्रमागतं दृष्ट्वा यमदण्डो न्यवर्तत ॥५६॥ तदा यमोऽपि विकलः पलायनपरोऽभवत् । ब्रह्मास्त्रं तस्य पृष्ठे तप्यौ कालानलप्रभम् ॥५७॥ तदा दृष्ट्वा रविः शीघ्रं स्त्रीयो भिन्नो प्रकल्प च । रथे मूर्त्ति ययौ वेगात् प्रार्थयामास तं लवम् ॥५८॥ रे रे बाल यमं त्राहि चोपसंहाराद्य हि । त्वयोग्मृष्ट ब्रह्मास्त्र त्वमेवास्त्रविदां वरः ॥५९॥ त्व मे वंशसमुद्भूतन्म्वयं मे तनयो यमः कथं स्वपूर्वजं त्वद्य न्व यमं हन्तुमिच्छसि । ६०॥ येदेको मूर्खतां यातः सर्वे मूर्खा भवन्ति न । शत्रुं रणात्पशीअंश्च वीरान्न रघ्यन्ति हि ॥६१॥


प्रकाश था। उसने नाना प्रकारके महल बने थे और वह पुरी बहुत-सी पताकाओं तथा ध्वजाओंसे अलंकृत थी ॥ ४७ ॥ यमराजसे घिरी अयोध्याको देखकर रामने लवसे कहा—तुम यमराजसे युद्ध करनेके लिए जाओ ॥ ४८ ॥ तब दुन्दुभीके विकराल निनादके साथ लव रथपर आरूढ़ होकर अयोध्याके बाहर आये और यमराजके साथ भयङ्कर युद्ध किया ॥ ४९ ॥ उस समय लवके बाणोंसे विद्ध होकर यमके करोड़ों अनुयायी क्षणमात्रमें धराशायी हो गये ॥ ५० ॥ उन सबोंको मरा देखकर रथमें नयनमग्न हुए यमराजने स्वयं लवके साथ तुमुल युद्ध प्रारम्भ कर दिया ॥ ५१ । यमराजने अपने विकराल बाणोंकी वर्षासे शीघ्र लवके रथ, सारथी, धनुष, कवच तथा मुकुटको काट डाला ॥ ५२ ॥ तब अत्यन्त कुपित लवने एक दूसरे रथपर आरूढ़ होकर यमराजके साथ महाभयंकर युद्ध प्रारम्भ कर दिया ॥ ५३ ॥ उस समय समस्त देवता अपने विमानोंपर आरूढ़ होकर समराङ्गणमें आये और वह युद्ध देखने लगे । इसके अनन्तर लवने अपने बाणोंकी वर्षासे यमराजके भैंसेको मूर्छित कर पृथ्वीपर लौटा दिया और बणके साथ बाण चलात हुए सौ बाणोंकी वर्षासे यमराजपर प्रहार किया तब यमराजने अतिशय क्रुद्ध होकर लवपर यमदण्ड छोड़ा ॥ ५४ ॥ ५५ ॥ यमदण्डको देखकर लवने ब्रह्मास्त्र चला दिया, जिससे यमदण्ड लौट पड़ा। तब यम विकल होकर भाग निकले और कालानलके समान ब्रह्मास्त्र उनके पीछे-पीछे चला ॥ ५६ ॥ ५७ ॥ उस ब्रह्मास्त्रको देखकर सूर्यने समझा कि इससे यम नहीं बच सकता। मेरा बेटा अवश्य मारा जायगा तब सूर्यदेव स्वयं रथपर आरूढ़ होकर लवके पास आये और प्रार्थना करने लगे ॥ ५८ ॥ सूर्यने कहा—अरे अरे हे बच्चे ! इस अस्त्रको लौटाकर यमको बचाओ। तुम्हींने इसे चलाया है और तुम्हीं इसका निवारण भी कर सकते हो। तुम अस्त्रविद्या जाननेवालोंमें सर्वश्रेष्ठ हो ॥ ५९ ॥ तुम हमारे वंशमें उत्पन्न हुए हो और यम भी मेरा ही पुत्र है। क्या अपने पूर्वज यमको ही तुम मार डालना चाहते हो ? ॥ ६० ॥ यदि एक लड़का मूर्ख हो गया तो क्या उसके साथ सब मूर्ख हों