भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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पृष्ठ 568
५५२आनन्दरामायणे[ सर्गः २४

राज्यस्थित्यर्था व्यवसायतत्परैः सदैत चैतच्छ्रवणींयमादरात् ।
उत्साहकाले प्रनयेन्थमङ्गले विवाहकाले पठनीयमुत्तमम् ॥१५०॥
श्रीराज्यकाण्डं भुवि सौख्यदायकं पुण्येषु कालेषु पठन्ति ये नराः ।
लभन्ति सौख्यान्यभिमङ्गलानि त गच्छन्ति विष्णोर्परमान्त्याः पदम् । १५१॥
पुण्यं पवित्रं परमं विचित्र श्रीरामचन्द्रस्य कथानकं सदा ।
भक्त्या मुनीनामपि मङ्गलप्रदं श्रोतव्यमेतत्पठनीयमादरात् ।१५२।

इति श्रीमत्कौशिके रामायणे आनन्दरामायणे राज्यकाण्डे उत्तरार्धे उमामहेश्वरसंवादे तथा रामदशाकथनंनाम तीर्थवर्णनं नाम चतुर्विंश सर्ग ॥२४॥

है, इसलिए इस काम में उत्साह पाने के लिए जो लोग उद्योग में लगे हों, उन्हें यह काण्ड सुनना चाहिए। तथा जब कोई विवाह अथवा कोई उत्साहका समय हो, तब इसे अवश्य सुनें ॥ १५० ॥ जो मनुष्य इस काण्ड को किसी पवित्र समयमें पढ़ते या सुनते हैं, वे अंत समयमें विमानपर चढ़कर विष्णुलोकको जाते हैं। १५१ ॥ परम पवित्र और अति विचित्र श्रीरामचन्द्रका यह कथानक मुनि तथा भक्तगण सादर इसका पठन और श्रवण करना चाहिए । १५२ ॥
इति श्रीमत्सकलपण्डितमण्डलाग्रगण्य पं० रामेश्वरपाठकविरचित'ज्योत्स्ना'भाषाटीकासहित राज्यकाण्डे उत्तरार्द्धे चतुर्विंशः सर्गः ॥ २४ ॥

। इति राज्यकाण्डं उत्तरार्द्धं समाप्तम् ।

श्रीरामचन्द्रार्पणमस्तु