श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 772, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ेंसर्गः १८ ] मनोहरकाण्डम् ७५५
यस्मिंश्च रामचन्द्रस्य वैकुण्ठारोहणोत्सवम् ॥४८॥
इदं मनोहरं काण्डं मया ते समुदीरितम् ।
ये शृण्वंति नरा भूम्यां तेषां रामे रतिर्भवेत् ॥४९॥
मनोऽभिलषितान् कामांस्ते लभन्ते न संशयः ।
पुत्रार्थी प्राप्नुयात्पुत्रं धनार्थी धनमाप्नुयात् ॥५०॥
इदं रम्यं पवित्रं च श्रवणान्मंगलप्रदम् ।
पठनीयं प्रयत्नेन रामसद्भक्तिवर्धनम् ॥५१॥
आनन्दरामायणमध्यसंस्थ मनोहरं काण्डमिदं विचित्रम् ।
पठंति शृण्वंति गृणन्ति मर्त्यास्ते स्वीयकामानखिलान् लभंते ॥५२॥
इदं पवित्रं परमं विचित्रं नानाचरित्रं त्वतिपुण्यदं च ।
सदा नरैः श्राव्यमिदं मुदा श्रीसीतापतेर्भक्तिविवृद्धिकारि ॥५३॥
इति शतकोटिरामचरितान्तर्गतं श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये मनोहरकांडे रामदासविष्णुदाससंवादे हनूमता शरसेतुभंगो नाम अष्टादश सर्गः ॥ १८ ॥
मनोहरकांडे सर्गा आनन्दरामायणेऽष्टादश ज्ञातव्याः ।
एकत्रिंशच्छताः श्लोका रामदासमुनिना पापनुदः प्रोक्ताः ॥ १ ॥
अथ मनोहरकांडे प्रकरणानुक्रमः ।
लघुरामायणम् ॥ १०४ ॥ वैकुण्ठारोहणम् ॥ १५५ ॥ रामपूजा ॥ २७५ ॥ लघुरामतोभद्रम् ॥३०९॥ रामलिंगतोभद्रम् ॥३७७॥ नवमीव्रतम् ॥२४१॥ रामनवम्युद्यापनम् ॥ १३२ ॥ वेदादिकाव्यपूजा ॥१२७। विशेषकालपूजा ॥ १९३ ॥ चैत्रमहिमावर्णनम् ॥ १६७ ॥ पिशाचमुक्तिः
॥ ४८ ॥ मैंने तुम्हें यह मनोहरकांड सुनाया है। जो लोग इस कांडको सुनते हैं, उन्हें रामचन्द्रजीकी भक्ति प्राप्त होती है ॥ ४९ ॥ वे अपना मनोऽभिलषित फल प्राप्त कर लेते हैं। इसमें कोई संशय नहीं है। इसको सुननेवाला यदि पुत्र चाहता हो तो पुत्र और धनार्थी धन पाता है ॥ ५० ॥ यह कांड बड़ा रम्य, पवित्र और सुननेसे मङ्गलदायक है। इसलिए लोगोंको प्रयत्न करके इसका पाठ करना चाहिए। इसके पाठसे रामके चरणोंमें भक्ति बढ़ती है ॥ ५१ ॥ आनन्दरामायणके अन्तर्गत यह मनोहरकांड बड़ा विचित्र है। जो लोग इसका पठन-श्रवण तथा मनन करते हैं, वे अपनी सारी कामनायें पूर्ण कर लेते हैं ॥ ५२ ॥ यह कांड परम पवित्र, विचित्र, भगवान्के विविध चरित्रोंसे भरा हुआ और अतिशय पुण्यदायक है। इसलिए लोगोंको चाहिए कि रामकी भक्ति बढ़ानेवाले इस मनोहरकांडका अवश्य श्रवण करें ॥ ५३ ॥ इति शतकोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये पं० रामतेजपाण्डेयकृत'ज्योत्स्ना'भाषाटीकासहिते मनोहरकाण्डे अष्टादशः सर्गः ॥ १८ ॥
इस मनोहरकाण्डमें कुल अठारह सर्ग हैं और इसमें रामदास मुनिने पापनाशकारी एकतीस सौ श्लोक कहे हैं। १ ॥ मनोहरकांडका प्रकरणानुक्रम—लघुरामायणमें १०४ श्लोक, वैकुण्ठारोहणमें १५५, रामपूजामें २७५, लघुरामतोभद्रमें ३०९, रामलिंगतोभद्रमें ३७७, नवमीव्रतमें २४१ रामनवमीउद्यापनमें १३२,