भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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पृष्ठ 789
७७२आनन्दरामायणे[ सर्गः ४

ब्रह्मास्यवचनं श्रुत्वा रामं प्राह विधिः कुतः। सर्वैर्वा पुरतो मेऽस्ति बलं न तु तवाग्रतः ॥२५॥
त्वं तु मे जनकः साक्षादतस्त्वां प्रार्थयाम्यहम्। ततो रामः पुनः प्राह विहस्य चतुराननम् ॥२६॥
न श्रोष्यति वचो मेऽद्य कुशोऽयं यौवनस्थितः। प्रायः कुमरा वृद्धानं वाक्यमग्रे मजन्ति न ॥२७॥
अन्यच्चापि शृणुष्व त्वं यच्छास्त्रेऽप्युच्यते वचः लालयेत्पञ्च वर्षाणि दश वर्षाणि ताडयेत् ॥२८॥
प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत् । अतन्मे बालकाः सर्वे कुशाद्याः स्वार्थतत्पराः ॥२९॥
न श्रोष्यन्ति वचो मेऽद्य तान्गत्वा प्रार्थयस्व हि। ततः प्राह पुनर्ब्रह्मा रणक्रोधाम्बुधौ मया ॥३०॥
वाक्यं रम्यं मंजुलं च नैवाद्य वदति प्रभो। ततः प्राह विधिं रामः पुनर्वाक्य विनोदयन् ॥३१॥
विधे त्वं गच्छ वाल्मीकिं स स्वां युक्तिं वदिष्यति। ततः स रामवाक्येन वाल्मीकिं पुष्पंके स्थितम् ॥३२॥
मुनिभिर्मुनिशालायामूर्ध्वं सर्वैः स्थितं विधिः। नत्वाऽथैः सहितो गत्वा वृतं सर्वं न्यवेदयत् ॥३३॥
विधिमाहाथ वाल्मीकिर्ज्ञात्वा राममनोगतम् । स्त्रीलब्धजीविताश्चैते भवन्तु मुनिसन्निधौ ॥३४॥
नरादीनां स्त्रियः सर्वाः प्रार्थयन्तु विदेहजाम् । कुशोऽपि जानकीवाक्याच्छान्तिमेष्यति बालकः ३५
तथेति ते नलाद्याश्च दूतान् प्रेष्याथ सादरम् । आनीय स्वकुलत्राणि शतशस्तु तदा जवात् ॥३६॥
जानकीं प्रेषयामासुस्ताः सर्वाः पार्थिवयोषितः । उपायनानि संगृह्य जानकीं प्रययुर्जवात् ॥३७॥
ददृशुर्जानकीं नारीगुप्तां स्वयमथैक्षताम् । स्नुषाभिः सेवितपदां पर्यङ्के निद्रितां मुदा ॥३८॥
ततः स्त्रीः समागताः सीता दृष्ट्वा चामन्दजीविता । मस्तकद्वयमुत्थाय धृष्ट्वाऽधौपवदर्हणा ॥३९॥
त्यक्ताहं मंचकं कृत्वा संस्थिताऽऽसीन्मणीन्द्रिता। स्नुषाभिर्नीति हे रम्या प्रणेमुस्तां परस्त्रियः ॥४०॥
तासां सीमन्तरत्नोत्थप्रभया पदपंकज । विराजन्ते सोतायाश्चित्रगत्रिषिवित्रे ॥४१॥
उपायनानि संगृह्य ताभ्य सा जनकात्मजा । समालिंग्य निवेदयाथ ताः प्राह सुस्वरं वचः ॥४२॥

आप रोक दीजिए। ब्रह्माकी बात सुनकर रामने कहा कि आपने जब इतनकी अजय कर दिया था, तब किस ये लोग संग्रामभूमि छोडकर यहाँ मेरे पास क्या आय है ? ॥ २३ । २४ ॥ रामकी यह बात सुनकर ब्रह्मा कहने लगे—सब लोगोंके लिए होते मेरे पास बल है, किन्तु आपके लिए मेरेमें कुछ भी सामर्थ्य नहीं है ॥ २५ ॥ आप मेरे पिता हैं, इसी नाते मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ। फिर राम बोले कि कुश युवावस्था में है। संसारमें प्रायः देखा जाता है कि कुमार लोग वृद्धोंकी बात नहीं मानते ॥ २६ ॥ २७ । इसके अतिरिक्त शास्त्रमें भी कहा गया है कि पाँच वर्षकी अवस्थातक बच्चोंका दुलार करे, दश वर्षकी अवस्था तक डराये-धमकाये, किन्तु सोल्ह वर्षका हो जानेपर घटक साथ मित्रताका व्यवहार करना चाहिए। इसी कारण ये स्वार्थी बालक मेरी बात नहीं मानेंगे आप स्वयं जाकर उनसे प्रार्थना कीजिए। ब्रह्माने कहा कि संग्राम-कलित क्रोधके कारण आज तो वह मुझसे मीठी बात भी नहीं करता। फिर विनोदवश रामने ब्रह्मासे कहा कि आप वाल्मीकिके पास जाइए। वे आपको कोई युक्ति बतलायेंगे। रामके कथनानुसार ब्रह्मा नल आदिको अपने साथ लेकर वाल्मीकिके पास गये। वाल्मीकिजी उस समय रामके साथ पृथक विमानपर ही रहा करते थे। इससे उनके पास पहुँचने में विशेष समय नहीं लगा। वहाँ जाकर ब्रह्माने वाल्मीकिको सब वृत्तांत कह सुनाया ॥ २८-३३ ॥ रामका मनोगत अभिप्राय जानकर वाल्मीकिने ब्रह्माजीसेकहा कि अपनी स्त्रियोंकी कृपासे ये लोग जीवनदान पा सकते हैं। इसका उपाय यह है कि नल आदिकी स्त्रियाँ सीताके पास जाकर अपने पतियोंके जीवनकी भीख माँगें। यदि सीता प्रसन्न हो गयीं तो कुश भी मान जायगा ॥ ३४ ॥ ३५ ॥ वाल्मीकिके कथनानुसार नल आदिने अपनी स्त्रियोंको लिवा लानेके लिए सैकड़ों दूत भेजे और वे तुरन्त उनको लिये हुए जा पहुँचे। इसके अनन्तर वे स्त्रियाँ विविध प्रकारके उपहार लेकर सीताके पास गयीं। वहाँ पहुँचकर उन स्त्रियोंने देखा कि सीता अपनी सखियोंसे घिरी हुई बैठी झपको ले रही हैं और बहुएँ उनकी सेवामें तत्पर हैं ॥ ३६-३८ ॥ जब सीताने उन स्त्रियोंको देखा तो तकिया बगलमे कर ली और उठ बैठीं। उस समय उन स्त्रियोंने उनको प्रणाम किया ॥ ३९ ॥ ४० ॥ उन राजदयनिताके सीमन्तरत्नकी प्रभासे सीताके पैर चित्र विचित्र