भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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पृष्ठ 806

सर्गः ९] पूर्णकाण्डम् ७८९


सारकांडे पंचविंशच्छतं श्लोकाः मन्त्रिशकाः । यात्राकाण्डे सप्तशतं पञ्चविंशत्परं स्मृताः ॥ ६ ॥
यागकांडे षट्शतं च पञ्चविंशोत्तरं शुभाः । विलासख्ये षट्शतं च चाष्टसप्तति सम्भृताः । ७ ॥
जन्मकाण्डे ह्यष्टशताः सद्रिश्लोकाः प्रकीर्तिताः । विवाहख्ये पञ्चशतं कीर्तिताः सप्तशीतयः । ८ ॥
सप्ताविंशा राज्यकाण्डेऽथुषद्विंशच्छतं स्मृताः । एकत्रिशच्छतं श्लोकाः प्रोक्ताः कांडे मनोहरे । ९ ॥
पूर्णकांडे पंचशतं सप्तसप्ततिमिश्रिताः । आनन्दरामचरिते सङ्ख्यैषा हि ह्यदृश ॥१०।
द्वे शते च द्विपंचाशच्छ्लोका ह्यत्रा मनोभिभिः । एष शिष्य मया प्रोक्त यथा पृष्ट त्वया पुरा ॥११॥
रामस्य तोषचरितं श्रवणात्पापकापहम् । पूर्णकाँडमिदं ज्ञेयं श्रवणान्पुण्यवर्धनम् ॥१२॥
सारकाण्डश्रवादेव संसारात्मुच्यते नरः । यात्राकाँडेन यात्राणां लभ्यते मानवैः फलम् ।१३।
यागकाँडेन यज्ञानां लभ्यते फलमुत्तमम् । विलासकाण्डश्रवणादप्सरोभिर्मोदते ॥१४।
जन्मकाँडेन प्राप्नोति नरः पुत्रादिमन्ततिम् । विवाहकाण्डश्रवणाद्रम्या स्त्री लभ्यते भुवि ॥१५॥
राज्यकाण्डेन राज्यं हि मानवैर्रुवि लभ्यते । काण्ड मनोहर श्रुत्वा लभ्यते मानसप्सितम् ॥१६॥
पूर्णकाण्डश्रवादेव विष्णोः पूर्णपदं लभेत् सर्वं विष्णुतनुःश्रुत्वाऽऽनन्दरामायणं स्विदम् ॥१७॥
सच्चिदानन्दरूपं म लीनो भवति मानवः । गतादणं नरैः श्रुत्वा कार्यमुद्यापनं नरैः ॥१८।
रामायणे श्रुते दद्याद्रथं हैममयं सुधीः । चतुर्वाजिसमायुक्तं तथा क्षौमपताकया ॥१९।
घंटैश्चैव समायुक्तं किङ्किणीजालनादितम् । यथाऽनेकैरुप मभ्यर्च्य धेनुं दद्यात्पयस्विनीम् ॥२०॥
ब्राह्मणान्भोजयेन्नाना-मिष्टान्नैरर्चयेद्बुधः । एवं कृतं मखन्तु महाकाव्यं फलप्रदम् ॥२१॥
रामायणं भवन्मूनं नात्र कार्या विचारणा । यस्मिन्भवन्ति सम्बन्धा रामायणमथाच्यते ॥२२॥
नरः प्रातः समुत्थायानन्दरामायणं पठेत् । यः स कामानवाप्नोति त्रैलोक्यादिविदुर्लभान् ।२३।


सारकांडमें २५३० श्लोक, यात्राकांडमें ७२५ श्लोक, यागकांडमें ६२५ श्लोक, विलासकांडमें ६७८ श्लोक, जन्मकांडमें ८०२ श्लोक, विवाहकांडमें ५६३ श्लोक । ५-८ ॥ राज्यकांडमें २६०२ श्लोक, मनोहरकांडमें ११०० श्लोक और पूर्णकाण्डम ५७७ श्लोक हैं । इस आनन्दरामायणमें कुल मिलाकर १२३५२ श्लोक हैं ॥ ९ ॥ हे शिष्य ! तुमने हमसे जैसा पूछा, वैसा रामचन्द्रजीको प्रसन्न करने और पापोंको नष्ट करनेवाले रामचरित्रको यह सुनाया। यह पूर्णकाण्ड पुण्यको बढ़ाता है ॥ १० ॥ ११ । १२ ॥ सारकाण्डके सुननेसे प्राणी इस संसारसे मुक्त हो जाता है । यात्राकाण्डका श्रवण करनेसे प्राणी सब तीर्थोंकी यात्राका पुण्य प्राप्त करता है ॥ १३ ॥ यागकाण्डके सुननेसे प्राणी यज्ञोंके करनेका फल पाता है और विलासकाण्डके सुननेसे स्वर्गकी अप्सराओंके साथ आनन्द करता है ॥ १४ ॥ जन्मकाण्डका श्रवण करनेसे प्राणी सन्तान पाता है और विवाह-कांड सुननेसे सुन्दर स्त्री मिलती है ॥ १५ ॥ राज्यकांडके सुननेसे संसारका राज प्राप्त होता है, मनोहरकांडको सुननेसे अपनी इच्छित कामना पूर्ण होती है और इस पूर्णकाण्डको सुननेसे प्राणी साक्षात् विष्णुभगवान्‌का पूर्णपद पाता है । जो प्राणी समस्त आनन्दरामायण सुन लेता है ॥ १६ ॥ १७ ॥ वह सच्चिदानन्दस्वरूप भगवान्‌में लीन हो जाता है। जो लोग यह रामायण सुने, उन्हें इसका उद्यापन भी करना चाहिए ॥ १८ ॥ रामायण सुन लेनेके बाद श्रोता सुनातवालेको एक ऐसा स्वर्णरथ दे, जिसमें चार घोड़े जुते हों और ऊपर रेशमी पताका फहरा रही हो ॥ १९ ॥ उसमें विविध प्रकारके यन्त्र लगे हों और किङ्किणियोंका मीठा ध्वनि निकल रही हो । इसके बाद एक दुधारू गो दे ॥ २० । इसके पश्चात् १०० ब्राह्मणोंका भोजन कराये ऐसा करनेपर यह महाकाव्य पूर्ण फलदायी होता है इसमें किसी प्रकारका संदेह न करना चाहिए । जिसमें भगवान्‌का निवास हो, उसे "रामायण" कहते हैं ॥ २१ ॥ २२ ॥ जो प्राणी सवेरे उठकर इस आनन्दरामायणका पाठ करता है तो देवताओंको भी दुर्लभ उसकी कामनाय पूर्ण होती हैं ॥२३॥ चैत्र शुक्ल नवमीको रामजन्मके अवसर-